बहू हो तो ऐसी ! सात समंदर पार से आईं ससुराल के स्कूली बच्चों की समस्या का समाधान करने

परिवार के प्रति बहु के समर्पण की कहानियां तो आपने कई सुनी होंगी. लेकिन आज बात करते हैं एक ऐसी बहू की जो पूरे गांव खासतौर पर स्कूली बच्चों के चिंता करती है. वह चिंता करती है कि ससुराल की स्कूल के बच्चे साफ और शुद्ध पानी पीएं.

News18 Rajasthan
Updated: April 18, 2019, 4:48 PM IST
बहू हो तो ऐसी ! सात समंदर पार से आईं ससुराल के स्कूली बच्चों की समस्या का समाधान करने
अर्चना सुखधन। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
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Updated: April 18, 2019, 4:48 PM IST
परिवार के प्रति बहु के समर्पण की कहानियां तो आपने कई सुनी होंगी. लेकिन आज बात करते हैं एक ऐसी बहू की जो पूरे गांव खासतौर पर स्कूली बच्चों के चिंता करती है. वह चिंता करती है कि ससुराल की स्कूल के बच्चे साफ और शुद्ध पानी पीएं. यही वजह है कि ससुराल के पानी में फ्लोराइड की अत्याधिक मात्रा ने बहू को कुछ इस तरह चिंतित किया कि वह समस्या का समाधान करने के लिए सात समंदर पार ठेठ अमेरिका से अजमेर जिले के पिपलाज गांव तक चली आई.

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अर्चना सुखधन के लिए गुरुवार का दिन अलग ही सुकून लेकर आया. सुकून इसलिए क्योंकि जिन स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर वह अमेरिका में बैठी हैरान-परेशान थी. आज उनकी समस्या का समाधान कर दिया. अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक नामी गिरामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बतौर सेवा दे रही अर्चना सुखधन की चिंता की वजह थी ससुराल के पानी में फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा.

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11 पीपीएम तक फ्लोराइड मात्रा वाला पानी पीने पर मजबूर हैं
अजमेर जिले के पिपलाज गांव में ग्रामीण 11 पीपीएम तक फ्लोराइड मात्रा वाला पानी पीने पर मजबूर हैं. गांव में बीसलपुर परियोजना का पानी तो आता है, लेकिन नियमित रूप से नहीं. ऐसे में पिपलाज की सीनियर सेकंडरी स्कूल में पढ़ने वाले करीब एक हजार बच्चों के लिए साफ़ और फ्लोराइड मुक्त पानी अर्चना सुखधन की पहली प्राथमिकता बन गया.

  

 

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अर्चना के पति पढ़े हैं इसी स्कूल में
कैलिफोर्निया से पिपलाज पहुंचते ही अर्चना ने स्कूली बच्चों के लिए वाटर कूलर और आर. ओ. की व्यवस्था की ताकि बच्चे फ्लोराइड पानी से निजात पा सके. अर्चना के पति राम रैगर इसी स्कूल के छात्र रहे और अव्वल दर्जे से पास होते हुए आईआईटी मुंबई के रास्ते अमेरिका तक जाकर अपनी योग्यता साबित करने में जुट गए. राम रैगर अपने पिता के नाम से गांव के लिए कुछ अलग योजना को आकार दे रहे थे, जबकि अर्चना की प्राथमिकता में पीने का साफ़ पानी सबसे ऊपर था. बहूरानी के जरिये गांव में हुई इस शुरुआत से स्कूल के प्रिंसिपल गदगद हैं तो अर्चना को भी कोई कम सुकून नहीं है.

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