अनूठी विरासत समेटे हुए है राजस्थान का अजमेर, पकवानों का स्वाद ऐसा की हो जाएंगे मुरीद
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अनूठी विरासत समेटे हुए है राजस्थान का अजमेर, पकवानों का स्वाद ऐसा की हो जाएंगे मुरीद
अजमेर की मेहमान नवाजी देश भर में प्रसिद्ध है. (Pic Credit: Himanshu Sharma )

अजमेर (Ajmer) के खाने का स्वाद देशी विदेशी सभी की जुबान पर छाया रहता है. अजमेर आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित और राजस्थान (Rajasthan) का सबसे पहला पूर्ण साक्षर जिला है. यही सब मिलकर तो अजमेर को सबसे खास बनाता है.

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अजमेर. अजमेर राजस्थान का एक बेहद ही खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर है जिसका हर हिस्सा अपने आप में बेहद खास है. राजा अजय राज सिंह चौहान ने अजमेर को सातवीं शताब्दी में अरावली की गोद में बसाया था. अजमेर (Ajmer) का मूल नाम अजय मेरु था. सन 1365 से लेकर 1880 तक अजमेर मेवाड़ से लेकर मुगल शासकों तक शासित रहा. उसके बाद 1881 से अजमेर पर अंग्रेजों का आधिपत्य स्थापित हो गया. अजमेर की भौगोलिक स्थिति और भी खास बनाती है. यह पूर्व में जयपुर (Jaipur) और टोंक पश्चिम में पाली से घिरा हुआ है. ब्रिटिश काल में अजमेर एक रियासत हुआ करता था. 1818 में एक संधि के दौरान दौलतराव सिंधिया ने अजमेर को ब्रिटिश सरकार (British Government) को सौंप दिया.

1836 तक अजमेर बंगाल प्रेसिडेंसी के अधीन रहा. 1 अप्रैल 1871 को अजमेर मेरवाड़ा केकड़ी के रूप में एक अलग प्रांत बना. 15 अगस्त 1947 को जब अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए तब अजमेर स्वतंत्र भारत का एक गौरवशाली हिस्सा बना. आजादी के बाद राजस्थान के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभ भाई पटेल को दिया जाता है. राजस्थान का एकीकरण कुल 7 चरणों में पूरा हुआ. एकीकरण की प्रक्रिया में शामिल होने वाली पहली रियासत अलवर थी. अंतिम रियासत सिरोही, अजमेर, मेरवाड़ा क्षेत्र थे. सरदार वल्लभ भाई पटेल की अथक प्रयासों के बाद 1 नवंबर 1956 को अजमेर राजस्थान का एक अटूट हिस्सा बन गया.

राजस्थान का दिल है अजमेर



दुनिया आज भी अजमेर को राजस्थान के हृदय स्थल के नाम से जानती है. अरावली की गोद में बसे इस खूबसूरत शहर का पर्यटन के क्षेत्र में अपना ही एक अलग नाम है. यहां हिंदुओं का पवित्र तीर्थ स्थल विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर पुष्कर में स्थित है, जबकि मुस्लिम धर्मावलंबियों की पवित्र तीर्थ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में ही स्थित है. राजा अजय राज द्वारा बनवाई गई आना सागर झील पर्यटकों को पसंदीदा स्थल है. यहां का तारागढ़ का किला चौहान वंशजों की निशानी है तो अजमेर का जैन मंदिर जिसे सोनी जी की नसिया के नाम से भी जाना जाता है.
पर्यटन की दुनिया में अपना एक अलग स्थान रखता है अजमेर की तबीजी. देश के प्रथम बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र की स्थापना यहीं की गई जो अपने आप में एक अनोखी बात है. अगर पुराने स्मारकों और पर्यटक स्थलों की बात की जाए तो तारागढ़ का किला, अड़ाई दिन का झोपड़ा, मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, जैन मंदिर, पुष्कर झील, फायसागर झील सभी अपने आप में अजमेर को सबसे अलग बनाते हैं. अजमेर धर्म और संस्कृति का विश्व में अनोखा केंद्र है जहां गंगा जमुनी तहजीब एक साथ देखने को मिलती है. अजमेर आर्थिक रूप से भी अपने आप को विकसित करता आया है. अजमेर के किशनगढ़ का संगमरमर पत्थर जिससे ताजमहल के निर्माण में प्रमुख योगदान है अजमेर की ख्याति को और ज्यादा बढ़ा देता है. वर्तमान समय में अजमेर अपने पुराने स्वरूप से नए स्वरूप में लगातार परिवर्तित हो रहा है.

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अजमेर के किशनगढ़ का संगमरमर पत्थर जिससे ताजमहल के निर्माण में प्रमुख योगदान है अजमेर की ख्याति को और ज्यादा बढ़ा देता है. (Pic Credit: Himanshu Sharma )


आगे बढ़ रहा है अजमेर

आज का अजमेर आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित और राजस्थान का सबसे पहला पूर्ण साक्षर जिला है. शिक्षा के क्षेत्र में भी अजमेर ने अपना परचम खूब लहराया है. विश्व प्रसिद्ध मेयो कॉलेज अजमेर में ही स्थित है. शहर के पुराने स्कूलों में सैंट एंसेल्म, सोफिया जैसे स्कूलों की भी गिनती होती है जो आज शिक्षा के क्षेत्र में अपना एक अलग मुकाम रखते हैं. अजमेर का गवर्नमेंट कॉलेज और दयानंद कॉलेज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज भी अजमेर की कीर्ति को बढ़ा रहे हैं. अजमेर में स्थित रेलवे कारखाना जिसमें कैरिज और लोको दोनों शाखाएं शामिल हैं. अजमेर की जनता को वर्षों से रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं. वर्तमान समय में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी अजमेर में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए अपने पैर पसार रही हैं जोकि अजमेर की जनता के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो रहा है. अजमेर की मेहमान नवाजी देश भर में प्रसिद्ध है. यहां के लोग अपने खास मेहमान नवाजी के लिए जाने जाते हैं.

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अजमेर की मेहमान नवाजी देश भर में प्रसिद्ध है. यहां के लोग अपने खास मेहमान नवाजी के लिए जाने जाते हैं. (Pic Credit: Himanshu Sharma )


स्वाद ऐसा ही हो जाएंगे फैन

अजमेर के खाने का स्वाद देशी विदेशी सभी की जुबान पर छाया रहता है. अजमेर में कड़ी कचोरी से लेकर सोहन हलवे तक दूध जलेबी से लेकर आलू टिक्की तक गोलगप्पे से लेकर  सोन पपड़ी तक हर चीज अपने मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार मिलती है. यहां के लोग हर चीज के स्वाद में अपने प्यार का तड़का लगाकर रखते हैं जिससे मेहमानों का स्वागत दिल खोलकर किया जाता है. नया बाजार स्थित गोल प्याऊ हो या कैसरगंज गोल चक्कर की कड़ी कचोरी, कड़ी समोसा या आलू टिक्की का स्वाद लोगों की जबान पर सालों साल अपना जादू बिखेरना रहता है. राजस्थान का प्रसिद्ध पकवान दाल बाटी चूरमा भी अजमेर में बेहद शौक के साथ खाया जाता है. अब अगर बात की जाए पहनावे की तो अजमेर के लोग यहां भी अपनी छाप छोड़ते हैं. अजमेर में देशी-विदेशी सब तरह के परिधान लोगों द्वारा पहने जाते हैं. अजमेर के लोगों के पहनावे का रंगीला अंदाज अजमेर को देश दुनिया में सबसे ज्यादा करता है. यही कारण है कि अजमेर के वास्ते दुनिया के किसी भी कोने में जाने के बाद भी अपने आपको अजमेर की गलियों से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. अजमेर में बिछड़ा हुआ प्यार उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रखता है. यही सब मिलकर तो अजमेर को सबसे खास बनाता है.
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