पहलू खां मॉब लिंचिंग: अधीनस्थ कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे सरकार और परिजन
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पहलू खां मॉब लिंचिंग: अधीनस्थ कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे सरकार और परिजन
इस पूरे मामले में 14 अगस्त को अलवर की एडीजे-1 अदालत ने मामले के सभी 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था.

राजस्थान (Rajasthan) के अलवर के बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग मामले (pehlu khan mob lynching case) में राज्य सरकार (State government) और मृतक पहलू खां के परिजनों (family) ने अधीनस्थ अदालत (Subordinate court) के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर (Appeal filed) कर दी है.

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अलवर. राजस्थान (Rajasthan) के अलवर के बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग मामले (Pehlu Khan Mob Lynching Case) में राज्य सरकार (State Government) और मृतक पहलू खां के परिजनों (Family) ने अधीनस्थ अदालत (Subordinate Court) के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर (Appeal Filed) की है. इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) जल्द सुनवाई (Hearing) शुरू करेगा. सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मेजर आर.पी सिंह और मृतक पहलू खां के परिजनों की ओर से उसके बेटे इरशाद ने अपील दायर की है.

सभी छह आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था
इस पूरे मामले में बीते 14 अगस्त को अलवर की एडीजे-1 अदालत ने मामले के सभी छह आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका. वहीं पहलू खां के बच्चे भी आरोपियों को नहीं पहचान पाए. इसके साथ ही अदालत ने मामले में पेश किए गए वीडियो फुटेज को एफएसएल नहीं होने के कारण उन्हें एविडेंस (सबूत) नहीं माना था.

इन आधारों पर की गई है अपील
परिजनों की ओर से अपील पेश करने वाले वरिष्ठ वकील नासिर अली नकवी ने बताया कि अधीनस्थ अदालत ने हमारे सबूतों का ठीक तरह से परीक्षण नहीं किया. वहीं वीडियो फुटेज को एविडेंस के तौर पर शामिल नहीं करना भी गलत था. इन्हीं आधार पर हमने अपील दायर की है.



क्या है पूरा मामला
बता दें कि अलवर के बहरोड़ में 1 अप्रैल, 2017 को हरियाणा के नूंह मेवात का निवासी पहलू खान मॉब लिंचिंग का शिकार हुआ था. पिटाई के तीन दिन बाद 4 अप्रैल, 2017 को बहरोड़ के कैलाश अस्पताल में इलाज के दौरान बुरी तरह घायल पहलू खान की मौत हो गई थी. इस मामले में कोर्ट में चालान के बाद नियमित सुनवाई हुई, लेकिन पुलिस जांच में ऐसी कई खामियां रही जिनके चलते कोर्ट में पहलू खान का पक्ष कमजोर पड़ा और संदेह के लाभ पर आरोपी बरी हो गए.

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