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मॉब लिंचिंग का डार्क जोन: 3 साल में 638 मामले दर्ज, सवा साल में 3 की मौत

राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले का करीब 150 किलोमीटर इलाका ऐसा डार्क जोन बन गया है जहां मॉब लिंचिंग की घटनाएं सर्वाधिक हो रही हैं.

राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले का करीब 150 किलोमीटर इलाका ऐसा डार्क जोन बन गया है जहां मॉब लिंचिंग की घटनाएं सर्वाधिक हो रही हैं.

राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले का करीब 150 किलोमीटर इलाका ऐसा डार्क जोन बन गया है जहां मॉब लिंचिंग की घटनाएं सर्वाधिक हो रही हैं. गौतस्करों के हरियाणा बॉर्डर क्रॉस करने से पहले पुलिस और कथित गौरक्षकों के साथ झड़प की सबसे अधिक घटनाएं यहीं होती हैं.

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    राजस्थान के अलवर और भरतपुर का हरियाणा बॉर्डर से लगता इलाका लंबे समय से मॉब लिंचिंग का डार्क जोन बना हुआ है. दोनों जिलों के करीब 150 किमी इलाके में गौ तस्करों की कथित गौ रक्षकों और पुलिस के बीच झड़प की सबसे अधिक घटनाएं होती हैं. महीने में 5-6 ऐसी घटनाएं यहां आम हैं जिनमें से एक-दो वारदातों में पुलिस पर फायरिंग के मामले भी शामिल हैं.

    ऐसी वारदातों में अब तक तीन लाेगों की जान जा चुकी हैं और एक मरते-मरते बचा है. पहलू खां और उमर खान के बाद पिछले सप्ताह अकबर उर्फ रकबर गौतस्करी के चलते मॉब लिंचिंग का शिकार हुआ और मारा गया. यूं तो पूरे राजस्थान में गौतस्करी होती है लेकिन प्रदेशभर से गौतस्करों को हरियाणा और दिल्ली जाने के लिए इन्हीं दो जिलों से गुजरना होता है. इस बात का गौरक्षक संगठनों को भी पता है और उनकी नजर भी बॉर्डर इलाकों के ऐसे रास्तों पर रहती है जहां से गौतस्कर गुजरते हैं.

    3 साल में 638 मामले दर्ज
    अलवर और भरतपुर जिले का यह इलाका राजस्थान का मेवात इलाका है जहां गौवंश की तस्करी किस स्तर पर हो रही है इसका अंदाजा गत साढ़े तीन साल के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है. पिछले साढ़े तीन बरसों में दोनों जिलों में ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं. इन जिलों में महज तीन साल में ही गौतस्करी के 638 मामले दर्ज कर 719 गौतस्करों को पकड़ा गया. ये तो तब है जब पुलिस बहुत से मामले दर्ज ही नहीं करती है. आंकड़ों की यह तस्वीर बयां करती है कि गौतस्कर कितने बेखौफ हैं. पुलिस के लाख जतन के बावजूद गौतस्कर उनके काबू नहीं आ रहे हैं.

    alwar, mob lynching
    पिछले सवा साल में अलवर में यहां हुई मॉब लिंचिंग की घटनाएं.


    अलवर में 410 मामले, 610 गौतस्कर गिरफ्तार
    अलवर जिले में 2015 से अब तक गौतस्करी के 410 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें 610 गौतस्करों को गिरफ्तार किया गया है. अलवर जिले में वर्ष 2015 में गौतस्करी के 160 मामले दर्ज कर 226 गौतस्करों को गिरफ्तार किया गया. वर्ष 2016 में 117 मुकदमें दर्ज 248 गौतस्करों को पकड़ा गया. वर्ष 2017 में गौतस्करी के 94 मुकदमे दर्ज कर 108 गौतस्करों को दबोचा गया. वर्ष 2018 में मई माह तक गौतस्करी के 39 मामले दर्ज हो चुके हैं. इनमें 28 गौतस्करों को गिरफ्तार किया गया है.

    भरतपुर में 228 मामले दर्ज, 109 तस्कर दबोचे
    भरतपुर जिले में पुलिस ने वर्ष 2015 से अब तक 228 मामले दर्ज कर 109 तस्करों को पकड़ा गया. इनमें गौतस्करों के खिलाफ वर्ष 2015 में 65, वर्ष 2016 में 71, वर्ष 2017 में 58 मामले दर्ज कर 69 गौतस्करों को पकड़ा गया. वहीं मई 2018 तक 34 मामले दर्ज 40 गौतस्करों को दबोचा गया.


    इन रास्तों से होती है तस्करी
    राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़, शाहजंहापुर, नीमराणा, भिवाड़ी, तिजारा, रामगढ़, गोविंदगढ़ और नौगावां की सीमा हरिणाणा से जुड़ती है. वहीं भरतपुर के पहाड़ी, कैथवाड़ा, कामां और सीकरी की सीमा हरियाणा को छूती हैं. दोनों जिलों के यही वो इलाके हैं जहां से गौतस्कर प्रदेश से गौवंश की तस्करी करते हैं. यहां से गौवंश की तस्करी करके उन्हें हरियाणा के नूंह व मेवात में ले जाया जाता है.

    सवा साल में चार बड़ी घटनाएं

    पहली वारदात: 3 अप्रेल 2017- पहलू खां की मौत

    3 अप्रेल 2017 को अलवर जिले के बहरोड़ में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर शाम के वक्त जागुवास चौक औद्योगिक क्रॉसिंग पर हुई घटना को भुलाया नहीं जा सकता. वहां गोरक्षा दल और अन्य हिन्दूवादी संगठन के लोगों ने सैकड़ों लोगों के साथ गोतस्करी के आरोप में 6 वाहनों को रोककर 15 गोतस्करों के साथ मारपीट कर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया था. मारपीट में गंभीर रूप से घायल पांच जनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनमें से मेवात जिले के नूंह के जयसिंहपुर निवासी 50 वर्षीय पहलू खां की 5 अप्रेल को निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

    दूसरी वारदात: 9 नवंबर, 2017- उमर खान की हत्या

    दूसरा बड़ा मामला 9 नवंबर, 2017 की रात को गोविंदगढ़ थाना इलाके में सामने आया था. कथित गोरक्षकों ने उमर खान की पिटाई के बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी. बाद में शव को रेलवे पटरी पर डाल दिया था. पुलिस ने शव को मर्चरी में रखवा दिया था. तीन दिन बाद परिजनों के आने के बाद घटना का खुलासा हुआ अन्यथा पुलिस मामले को दबाकर बैठे हुए थी.

    तीसरी वारदात: 23 दिसम्बर 2017- जाकिर खान पर जानलेवा हमला

    तीसरा बड़ा मामला अलवर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में 23 दिसम्बर 2017 को सामने आया. रामगढ़ थाना इलाके में एक बार फिर गाय ले जा रहे एक युवक की 40-50 लोगों ने पिटाई कर दी. गोरक्षा के नाम पर कथित गोरक्षकों ने उसकी जमकर पिटाई की, लेकिन गनीमत यह रही पुलिस समय पर पहुंच गई. अन्यथा उसकी पीट पीटकर हत्या कर दी जाती. पिटाई के बाद गंभीर हालत में युवक जाकिर खान को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया था. जाकिर अपने तीन साथियों के साथ अलवर जिले के बानसूर क्षेत्र से गाय लेकर हरियाणा जा रहा था.

    चौथी वारदात: 20 जुलाई 2018- अकबर उर्फ रकबर की मौत

    दो दिन पूर्व शुक्रवार रात को अलवर के रामगढ़ इलाके में गो तस्करी के शक में भीड़ ने अकबर उर्फ रकबर पर हमला बोल दिया था. बाद में अकबर की मौत हो गई थी. घटना के अगले दिन इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका और उसकी कार्रवाई पर सवाल उठने लग गए थे. इस मामले में मारपीट के बाद मौत के शिकार हुए अकबर उर्फ रकबर खान को अस्पताल ले जाने में देरी के आरोप में एक सहायक पुलिस उप निरीक्षक को निलंबित और तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

     

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