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भंवर जितेन्द्र सिंह- अलवर सीट को बचाए रखने की जिम्मेदारी है सिंह के कंधों पर

भंवर जितेन्द्र सिंह- अलवर सीट को बचाए रखने की जिम्मेदारी है सिंह के कंधों पर

भंवर जितेन्द्र सिंह। फाेटो एफबी।

भंवर जितेन्द्र सिंह। फाेटो एफबी।

अलवर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने इस बार सीट को बचाए रखने का जिम्मा पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह को सौंप रखा है. अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य भंवर जितेन्द्र सिंह पहले भी एक बार इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

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अलवर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने इस बार सीट को बचाए रखने का जिम्मा पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह को सौंप रखा है. अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य भंवर जितेन्द्र सिंह पहले भी एक बार इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. सहज व सौम्य स्वभाव के धनी जितेन्द्र सिंह का इस बार यहां मुकाबला नाथ संप्रदाय के बाबा बालकनाथ से हुआ है. कड़े मुकाबले वाली इस सीट पर वर्तमान में कांग्रेस काबिज है.

पहली बार चुनाव में किस्मत आजमा रहे बालकनाथ 6 साल की आयु में चांदनाथ के शिष्य बन गए थे

भंवर जितेन्द्र सिंह अलवर की राजनीति में करीब दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय हैं. सिंह ने वर्ष 1998 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उन्हें राजनीतिक करियर की पहली सफलता मिली और वे विधानसभा पहुंचे. उसके बाद वे अगले विधानसभा चुनाव 2003 में फिर लगातार अलवर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. लगातार दस साल तक विधायक रहने के बाद पार्टी ने सिंह को वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव में उतारा. यहां भी सिंह ने अपनी जीत का सफर जारी रखा और पहली बार सांसद बने.

भंवर जितेन्द्र सिंह। फाेटो एफबी।


केन्द्र में मंत्री व संगठन में कई अहम दायित्व संभाल चुके हैं
संगठन में आलाकमान के नजदीकी लोगों में शुमार सिंह सांसद बनने के बाद मनमोहन कैबिनेट के सदस्य बने. वर्ष 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने उनको फिर रिपिट किया. लेकिन तब तक मोदी लहर पूरे देश में फैल चुकी थी. लिहाजा सिंह भी मोदी लहर में अपना जलवा कायम नहीं रख सके और वे बीजेपी प्रत्याशी महंत चांदनाथ के सामने चुनाव हार गए. उसके बाद सिंह को संगठन में जिम्मेदारी सौंपी गई. वे एआईसीसी के सचिव रहने के साथ ही कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.



पार्टी ने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर सिंह को सौंपी है जिम्मेदारी
इस बीच वर्ष 2017 में सांसद महंत चांदनाथ के निधन के चलते इस सीट पर वर्ष- 2018 में उपचुनाव हुए. इस उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव ने जीत हासिल कर इस सीट को वापस पार्टी की झोली में डाल दिया. लेकिन पार्टी ने अपने मौजूदा सांसद डॉ. यादव का टिकट काटकर सिंह को अलवर फतह करने की जिम्मेदारी सौंप दी. अलवर में कांग्रेस का झंडा बुलंद करने वाले सिंह की मां महेन्द्रा कुमारी भी पूर्व में अलवर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. वे यहां बीजेपी से सांसद रहीं हैं.



इस बार पुराने प्रतिद्वंदी के शिष्य से है मुकाबला
पार्टी ने एक बार फिर भंवर जितेन्द्र सिंह पर भरोसा कर उन्हें पुराना वर्चस्व स्थापित करने का मौका दिया है. सिंह ने भी मौके को भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. अपनी सहज सुलभता के कारण वे आम आदमी के संपर्क में रहते हैं. वर्ष 2014 में जहां सिंह का मुकाबला महंत चांदनाथ से हुआ था, वहीं इस बार उनके शिष्य बाबा बालकनाथ से हुआ है. देखना यह है कि क्या सिंह इस बार अपना पुराना जलवा बरकरार रख पाएंगे या नहीं.

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