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पाकिस्तान से आए इस समाज के लोग बनाते हैं स्पेशल मिठाई, इनके यहां नहीं लेता कोई दहेज

Rajendra Prasad Sharma | News18 Rajasthan
Updated: February 3, 2020, 5:31 PM IST
पाकिस्तान से आए इस समाज के लोग बनाते हैं स्पेशल मिठाई, इनके यहां नहीं लेता कोई दहेज
पुष्करणा ब्राह्मण समाज के लोग मगध मिठाई बनाते हुए

पुष्करणा समाज (Pushkarna Society) द्वारा तैयार की गई देसी मिठाई, जिसे 300-400 लोग मिलकर तैयार करते हैं. यह मिठाई साल भर तक खराब भी नहीं होती है. पुष्करणा ब्राह्मण समाज के लोग राजस्थान में अनेक स्थानों सहित खैरथल (Khairthal) के अंदर निवास कर रहे हैं.

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अलवर. पुष्करणा ब्राह्मण समाज और उनकी विशेष मगध मिठाई (Special Magadh Sweets) जो भाईचारे (Brotherhood) की मिठास घोलने का काम करती है. परम्परा की ऐसी मिसाल जो भाईचारे का संचार करती है. यह मिठाई आपसी कड़वाहट को दूर कर एक-दूसरे के प्रति मिठास घोलने का काम करती है.पुष्करणा समाज के लोग सन् 1947 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से जान बचाकर अपना सब कुछ छोड़ कर अपनी यादों को साथ लिए हुए हिंदुस्तान में आए थे. पुष्करणा ब्राह्मण (Pushkarna Brahmin Society) समाज के लोग राजस्थान में अनेक स्थानों सहित खैरथल के अंदर निवास कर रहे हैं. पुष्करणा समाज द्वारा तैयार की गई देसी मिठाई, जिसे 300—400 लोग मिलकर तैयार करते हैं. यह मिठाई साल भर तक खराब भी नहीं होती है.

हर मौकों पर बनाई जाती है मगध मिठाई

खैरथल में बसे इस समाज की हर बात निराली है. यहां होली हो या दिवाली, रक्षाबंधन हो या हिंदू संस्कृति का कोई भी त्योहार, शादी हो या खुशी का कोई भी मौका. खैरथल के पुष्करणा समाज में अपने हाथों द्वारा बनी हुई घरेलू मिठाई का उपयोग किया जाता है. इस समाज के द्वारा निर्मित की जाने वाली विशेष मिठाई जिसे यह लोग मगध कहते हैं.

घंटों मशक्कत के बाद तैयार हो पाती है यह मिठाई

एक बहुत विशाल कड़ाही के अंदर 300-400 लोगों के समूह द्वारा अपनी परंपरा को कायम रखते हुए और अपनी सामाजिक मिठाई को यह लोग बनाते हैं, जिसके 3 पार्ट होते हैं. कड़ाही के अंदर घंटों कड़ी मशक्कत के बाद यह मिठाई बनकर तैयार होती है. इस मगध मिठाई की खासियत यह है कि आप इसको पूरे साल भर तक खा सकते है. यह मिठाई एक साल तक खराब नहीं होती है.

साल भर तक खराब नहीं होती है मगध मिठाई

इस मिठाई को जब भी खाया जाए तब इसके अंदर देसी घी और चीनी का पाउडर मिलाने से वह मगध बन जाता है. यह मिठाई इतनी स्वादिष्ट होती है कि आसपास के अन्य समाजों के लोग भी इसकी डिमांड करते हैं. खैरथल क्षेत्र में आसपास के सभी वर्गों के लोग पुष्करणा समाज के कार्यक्रमों में इस विशेष मिठाई की डिमांड जरूर करते हैं.10 दिन पहले एक छुट्टी का दिन तय होता है

इस विशेष मिठाई को तैयार करने के लिए कार्यक्रम से 10 दिन पहले एक छुट्टी का दिन तय किया जाता है, जिसमें पुष्करणा ब्राह्मण समाज के बड़े बुजुर्गों की देखरेख में सभी युवा एक जगह पर एकत्रित होते हैं और एक विशाल कड़ाही के अंदर घंटों कड़ी मशक्कत के बाद इसको तैयार करते हैं.

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हैं पुष्करणा समाज के लोग

पुष्करणा ब्राह्मण समाज वर्ष 1947 में शरणार्थी बनकर खाली हाथ हिंदुस्तान में आए थे. इस समाज ने अपना मुकाम स्थापित करने के लिए अच्छी शिक्षा अर्जित की. इसके बलबूते पर इस समाज के करीब 200 लोग शिक्षा विभाग में है. इस समाज के लोग देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं.

दहेज विरोधी है यह समाज

पुष्करणा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉक्टर ओमप्रकाश मान्धु ने बताया कि इस समाज के अंदर दहेज दान की कोई डिमांड नहीं की जाती है. यह समाज पूरी तरह दहेज विरोधी भी है.

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First published: February 3, 2020, 5:31 PM IST
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