अलवर रेप केस: 21 गवाहों ने बच्ची से रेप और हत्या के आरोपी राजकुमार को दिलाया मृत्युदंड

चार साल की बच्‍ची से रेप और पत्‍थर से कुचल कर हत्‍या करने के मामले में विशेष अदालत ने आखिरकार चार साल के बाद 12 जून को फैसला सुनाया था. 21 गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी राजकुार को दोषी ठहराया गया था.

News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 5:35 PM IST
अलवर रेप केस: 21 गवाहों ने बच्ची से रेप और हत्या के आरोपी राजकुमार को दिलाया मृत्युदंड
राजकुमार ने बच्ची से दुष्कर्म किया और फिर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी थी.
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Updated: June 13, 2019, 5:35 PM IST
चार साल की मासूम से रेप के मामले में 21 गवाहों की गवाही के बाद आरोपी को कोर्ट ने दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई. गवाहों के बयान और सबूत के तौर पर पेश 29 दस्तावेज के आधार पर पांच साल के बाद पॉक्‍सो की  विशेष अदालत ने 12 जून को फैसला सुनाया था. विशेष जज ने धर्मेंद्र उर्फ राजकुमार को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. राजकुमार ने बच्ची से दुष्कर्म के बाद पत्थर कुचल कर  उसकी हत्या कर दी थी.

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रेप का दोषी राजकुमार उर्फ धर्मेंद्र.




बहरोड़ में मासूम को टॉफी दिलाने के बहाने से उठाया था
शर्मसार करने वाली यह करतूत 1 फरवरी 2015 की है. राजकुमार अलवर के बहरोड़ में एक चार साल की मासूम को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था. बाद में दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी थी. लोक अभियोजक (सरकारी वकील) विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपी धर्मेंद्र उर्फ राजकुमार पुत्र अभय सिंह निवासी रिवाली बहरोड़ ने इस घटना को अंजाम दिया था. बच्ची करीब 4 वर्ष की थी, जिसको टॉफी देने के बहाने वह खंडहरनुमा मकान में ले जाया गया था. राजकुमार ने मासूम से दुष्कर्म किया और उसके बाद उसका सिर पत्थर से कुचल कर उसकी हत्या कर दी.

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पुलिस गिरफ्त में 4 साल की मासूम बच्ची से रेप करने का दोषी करार दिया गया राजकुमार.


धारा 302, 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत फांसी की सजा
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विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय शर्मा ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए धर्मेंद्र उर्फ राजकुमार को आईपीसी की धारा 302, 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत फांसी की सजा सुनाई. वहीं, इस प्रकरण पर विशिष्ट लोक अभियोजक विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि चार वर्ष पूर्व 1 फरवरी 2015 को बहरोड़ थाने के रेवाली गांव यह मामला हुआ था. जिसकी रिपोर्ट बहरोड़ थाने में दर्ज करवाई गई थी. इस मामले में लगातार कार्रवाई जारी रही और आखिरकार चार साल बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया.

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