31 साल महंत रहे थे चांदनाथ लेकिन सांसद बनने से पहले खुल गई थी ये पोल

News18Hindi
Updated: September 17, 2017, 11:01 AM IST
31 साल महंत रहे थे चांदनाथ लेकिन सांसद बनने से पहले खुल गई थी ये पोल
धर्म को आस्था और शिक्षा को कर्म क्षेत्र बनाने वाले चांदनाथ ने शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में कई अहम काम किए.
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Updated: September 17, 2017, 11:01 AM IST
राजस्थान के अलवर सांसद और मठ अस्थल बोहर के पूर्व महंत चांदनाथ के निधन पर पूरा नाथ पंथ सम्प्रदाय शोक संतप्त है.

धर्म को आस्था और शिक्षा को कर्म क्षेत्र बनाने वाले चांदनाथ ने शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में कई अहम काम किए. मठ के स्कूल से यूनिवर्सिटी तक सफर उन्हीं के दम पर हुआ. लेकिन तीन साल पहले धर्म, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र के साथ उन्हें अलवर सांसद के तौर पर राजनीति को नया कर्मक्षेत्र चुना.

हालांकि राजनीति शुरू करने से पहले ही चुनाव प्रचार के दौरान ही कालेधन पर वो चर्चा में आ गए थे. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'पैसे लाने में बहुत दिक्कत हो रही है, हमारे पैसे भी पकड़े गए' के वीडियो में उनकी पोल खुल गई थी. हालांकि बाबा रामदेव ने तब 'बावला मत बन' कहते हुए बात दबाने की पूरी कोशिश भी की थी.

गुरु हरियाणा सरकार में मंत्री थे, चांदनाथ अलवर से सांसद बने

बाबा मस्त नाथ मठ के महंत चांदनाथ को राजनीति में लाने के पीछे योग गुरु बाबा रामदेव की भूमिका रही. बताया जाता है कि लोकसभा चुनाव के समय रामदेव के कहने पर ही महंत चांदनाथ को बीजेपी से अलवर सीट के लिए टिकट मिला था. हालांकि चांदनाथ धर्म और शिक्षा के क्षेत्र से राजनीति में उतरने वाले नाथ पंथ के पहले महंत नहीं थे. उनसे पहले उन्हीं के गुरु महत श्रेयोनाथ हरियाणा सरकार में मंत्री भी रह चुके थे. हालांकि खराब स्वास्थ्य के चलते नहीं चांदनाथ अपने संसदीय क्षेत्र को अधिक समय नहीं दे सके.

स्कूल को कॉलेज और फिर यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया

शिक्षा तथा चिकित्सा को कर्मक्षेत्र बनाते हुए वर्ष 1986 में ही स्कूल से इसकी शुरुआत की. 28 वर्ष की उम्र में जब महंत ने गद्दी को संभाला था तो बोहर में बाबा मस्तनाथ परिसर में एक आयुर्वेदिक कॉलेज और एक आंखों का अस्पताल था. इसके बाद इसे यूनिवर्सिटी बनाने, स्कूल शुरू करने, संस्कृत कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज तक की शुरुआत की गई. 2012 में संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलवाया.

100 से ज्यादा मेडिकल और शैक्षिणक कोर्स

स्कूल से कॉलेज और फिर कॉलेज से यूनिवर्सिटी तक के सफर को लेकर बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मारकंडेय आहूजा के अनुसार 1985 में श्री बाबा मस्तनाथ मठ अस्थल बोहर में नाथ संप्रदाय की गद्दी संभालने वाले महंत चांदनाथ के नेतृत्व में 100 से ज्यादा मेडिकल व शैक्षणिक कोर्स शुरू किए गए. चांदनाथ ने यहां 150 करोड़ रुपए की लागत से अक्षरधाम की तर्ज पर मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू करवाया.

दिल्ली के बेगमपुर में पैदा हुए थे चांदनाथ

योगी चांदनाथ का जन्म 21 जून 1956 को दिल्ली के बेगमपुर गांव के साधारण किसान परिवार में हुआ था. 1977 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए ऑनर्स की डिग्री ली. 1978 में अस्थल बोहर मठ के महंत श्रेयोनाथ के शिष्य बने. वर्ष 1984 में उन्हें अस्थल बोहर मठ का उत्तराधिकारी घोषित किया. श्रेयोनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद वर्ष 1985 में गद्दी संभाली.

31 वर्ष रहे मठ अस्थल बोहर के महंत

चांदनाथ 31 वर्ष से मठ अस्थल बोहर के महंत की गद्दी पर आसिन रहे. बाबा मस्तनाथ के बाद शिष्य परंपरा में बालकनाथ आठवें योगी हैं, जिन्हें इस गद्दी पर बैठाया गया है. महंत चांदनाथ ने अपने खराब स्वास्थ्य के चलते पिछले साल जुलाई में अपने शिष्य अलवर निवासी योगी बालकनाथ को मठ अस्थल बोहर का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. जुलाई में नाथ संप्रदाय के अनुसार वैदिक मंत्रों के बीच बालक नाथ को उत्तराधिकारी बनाने की रस्म अदायगी की गई थी. योगी बालक नाथ का जन्म गांव कोहराणा बहरोड़ जिला अलवर में 1986 में हुआ. मात्र 12 वर्ष की आयु में इनके पारिवारिक सदस्य बाबा मस्तनाथ की मन्नत स्वरूप इन्हें नाथ संप्रदाय में दीक्षित करने हेतु समर्पित कर गए और तभी से वर्तमान महंत चांदनाथ के शिष्य रूप में योगी बालक नाथ सेवारत रहे.

निमोनिया होने बाद से थे बीमार

महंत चांदनाथ 2015 में निमोनिया होने के बाद से करीब एक साल तक बीमारी से जूझते रहे थे. इस से शरीर से काफी कमजोर हो चुका था. खराब स्वास्थ्य के चलते ही चांदनाथ अपने संसदीय क्षेत्र अलवर में भी समय नहीं दे पाए. चांदनाथ ने शनिवार रात 12 बजे अंतिम सांस ली. दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका निधन हुआ. उनका अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था.
First published: September 17, 2017
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