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OPINION: बीजेपी की 'Cow Politics' का भविष्य तय करेगा रामगढ़ चुनाव
Alwar News in Hindi

Goverdhan Chaudhary | News18 Rajasthan
Updated: January 28, 2019, 1:08 PM IST
OPINION: बीजेपी की 'Cow Politics' का भविष्य तय करेगा रामगढ़ चुनाव
रामगढ़ के चुनाव परिणाम बीजेपी की 'गाय सियासत' (Cow Politics) का भविष्य भी तय करेंगे.

रामगढ़ के चुनाव परिणाम आने वाले दिनों में प्रदेश के सियासी माहौल का रुख तय करेंगे, साथ ही बीजेपी की Cow Politics का भविष्य भी तय करेंगे.

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राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट राज्य में बीजेपी की 'गाय पर सियासत की प्रयोगशाला' रही है. गाय के नाम पर हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के केंद्र में रहे रामगढ़ में सोमवार को वोट डाले जा रहे हैं, जिसका परिणाम 31 जनवरी को आएगा. इस सीट पर कांग्रेस, बीजेपी और बसपा के बीच मुकाबला है. रामगढ़ के चुनाव परिणाम आने वाले दिनों में प्रदेश के सियासी माहौल का रुख तय करेंगे, साथ ही बीजेपी की 'गाय सियासत' (Cow Politics) का भविष्य भी तय करेंगे.

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विधानसभा चुनावों में बसपा उम्मीदवार की असामयिक मौत के बाद यहां दिसंबर में चुनाव निरस्त हुए थे, इसलिए जब इस सीट के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हुआ, तो केवल बसपा उम्मीदवार ही बदला. बसपा ने पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के पुत्र और पूर्व बीजेपी विधायक जगत सिंह को मैदान में उतारा है. कांग्रेस से पूर्व जिला प्रमुख और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान की पत्नी साफिया खान मैदान में हैं.

यहां देखें- रामगढ़ विधानसभा चुनाव का कवरेज- LIVE



बीजेपी ने गौ सियासत के पोस्टर ब्वॉय ज्ञानदेव आहूजा की जगह पूर्व प्रधान सुखवंत सिंह को मैदान में उतारा है. ज्ञानदेव आहुजा ने टिकट कटने से नाराज होकर जयपुर की सांगानेर से निर्दलीय पर्चा भर दिया था, इसी दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से उनकी एक छोटी सी मुलाकात हुई, आहूजा ने नाम वापस ले लिया और बदले में उन्हें बीजेपी का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया.


बीजेपी के लिए यह चुनाव बहुत से मायनों में महत्त्वपूर्ण है, उसके लिए हिंदुत्व और गाय की सियासत के मॉडल की सफलता और विफलता से जुड़ा हुआ चुनाव है. बीजेपी ने हालांकि 'काऊ पालिटिक्स' के पोस्टर बॉय ज्ञानदेव आहूजा का टिकट काटकर खुद भी इस मॉडल की सफलता पर सवाल लगा दिए हैं. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि बीजेपी ने भले ही आहूजा का टिकट काट दिया हो लेकिन गाय अभी भी रामगढ़ में पार्टी के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा है.

बीजेपी अगर रामगढ़ में जीती तो विपक्ष में बैठी पार्टी के हताश कार्यकर्ताओं में लोकसभा चुनाव से पहले जोश आएगा. बीजेपी अगर हारी तो इस क्षेत्र में उसका हिंदुत्व मॉडल सवालों के घेरे में जरूर आएगा, लोकसभा चुनाव से पहले यह एक झटके की तरह होगा. रामगढ़ और आसपास के इलाकों में गोतस्करी की घटनाएं राजनीति का मुद्दा रहीं है, यही घटनाएं बीजेपी की हिंदुत्ववादी गाय आधारित राजनीति के लिए खाद पानी का काम करती रही हैं. यहां गांव-गांव में बने गौरक्षा दल बीजेपी की गौ-आधारित राजनीति के जमीनी कैडर माने जाते हैं. बीजेपी उम्मीदवार सुखवंत सिंह अगर जीते तो रामगढ़ में बीजेपी की राजनीति में दो ध्रुव बन बनेंगे, ज्ञानदेव आहूजा का पार्टी ने टिकट भले ही काट दिया हो लेकिन वे इलाके में अब भी सक्रिय हैं.

रामगढ़ जीती तो 99 के फेर से निकलेगी कांग्रेस, कांग्रेस सरकार के 40 दिन के कामकाज के रेफरेंडम से भी जोड़ा जाएगा चुनाव परिणाम को.


कांग्रेस विधानसभा में 199 सीट पर हुए चुनाव में  99 सीट ही जीत पाई थी, अब अगर रामगढ़ जीती तो उसकी सीटों का आंकड़ा भी 100 हो जाएगा, आरएलडी की एक सीट मिलाकर बहुमत का आंकड़ा 101 हो जाएगा.

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रामगढ़ के चुनाव परिणाम को कांग्रेस सरकार के 40 दिन के कामकाज से भी जोड़कर देखा जाएगा. अगर परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आए तो पार्टी इसे सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के तौर पर पेश करेगी, कांग्रेस बीजेपी के गौ सियासत के मॉडल को फ्लॉप साबित करने का प्रयास करेगी. अगर परिणाम कांग्रेस के खिलाफ गया तो बीजेपी को सरकार पर हमला करने का मौका मिलेगा, बीजेपी कांग्रेस सरकार को किसान कर्ज माफी, युवाओं के बेरोजगारी भत्ते जैसी घोषणाओं के मुद्दों पर आक्रामकता से घेरेगी.

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विधानसभा चुनाव में 6 सीट जीत चुकी बसपा ने भले ही कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया हो लेकिन इस सीट पर बसपा ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों के समीकरण प्रभावित कर रखे हैं. रामगढ़ सीट पर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर है. बसपा यहां जीती तो नटवर सिंह के पुत्र जगत सिंह का सियासी कद बढ़ेगा, विधानसभा में पहली बार बसपा 7 सीटों के आंकड़े पर होगी, और लोकसभा चुनाव में भी बसपा को एक मनोवैज्ञानिक ताकत मिलेगी. बसपा अगर यह सीट हारी तो जगत सिंह के राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लग जाएगा, यह चुनाव बीजेपी छोड़ बसपा में आए जगत सिंह का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा.

रामगढ़ का चुनाव तीनों ही पार्टियों के लिए सियासी दिशा तय करने वाला होगा. राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस चुनाव के नतीजे इस इलाके में बीजेपी की हिंदुत्ववादी गाय आधारित राजनीति का भी भविष्य तय कर देंगे.


प्रदेश में इस इलाके से शुरू हुई गाय की राजनीति को अब कांग्रेस भी अपने तरीके से अपना रही है, कांग्रेस सरकार ने बेसहारा गाय गोद लेने वालों को सम्मानित करने का आदेश निकालकर बीजेपी की गाय आधारित राजनीति की काट ढूढ़ने की कवायद की है. रामगढ़ का चुनाव नेताओं का भविष्य तय करने के साथ प्रदेश में गाय आधारित राजनीति के मुद्दे को भी एक नई दिशा देने वाला होगा जिसकी गूंज लंबे समय तक प्रदेश के राजनीतिक फलक पर रहेगी.

यहां देखें- मतदान के दौरान की ताजा तस्वीरें- PHOTOS

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First published: January 28, 2019, 9:13 AM IST
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