लॉकडाउन के बीच जंगल से बाहर इंसानी बस्ती में आया ये जानवर, मचा दिया हड़कंप
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लॉकडाउन के बीच जंगल से बाहर इंसानी बस्ती में आया ये जानवर, मचा दिया हड़कंप
नाहरगढ़ सेंचुरी से आया दुर्लभ प्रजाति का पाम सिवेट यानी बिज्‍जू.

बायोलॉजिस्ट डॉ. जॉय गार्डनर के अनुसार, पाम सिवेट (Palm Civet) को स्‍थानीय भाषा में बिज्‍जू करते हैं. यह बेहद दुर्लभ प्रजाति (Rare Species) का शर्मीला जानवर है.

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जयपुर. राजधानी जयपुर (Jaipur) में हसनपुरा के पास एनबीसी कॉलोनी (NBC Colony) में आज एक बिज्जू यानि पाम सिवेट (Palm Civet) का रेस्क्यू किया गया. जंगल से भटक कर यह दुर्लभ प्रजाति (Rare Species) का जीव आबादी की ओर आ गया था. बिज्‍जू को देखकर इलाके में दहशत का माहौल बन गया. कुछ लोग बिज्‍जू को मारने की कोशिश करने लगे. गनीमत रही कि समय रहते इलाके के कुछ जागरूक लोग मौके पर पहुंच गए और उन्‍होंने लोगों को मारने से रोका. इसी बीच, जानवरों की देखभाल से जुड़ी संस्‍था को कॉल कर मौके पर बुलाया गया. लंबी मश्‍क्‍कत के बाद बिज्‍जू को काबू कर पिंजड़े में कैद कर लिया गया.

बिज्‍जू यानी पाम सिवेट के बारे में कन्जर्वेशन बायोलॉजिस्ट डॉ. जॉय गार्डनर का कहना है कि इसे स्थानीय भाषा मे बिज्जू कहते हैं. ये बिल्ली जैसा दिखने वाला वाईवेरिडाए परिवार से है. यह संकटग्रस्त प्रजाति का काफी शर्मिला जीव है. यह जंगल मे बहुत कम ही नजर आता है. ये एक रात्रिचर जीव है, लेकिन लॉकडाउन के बाद इंसानी हलचल कम हुई है. इससे बहुत से दुर्लभ जीवों की हलचल बढ़ी है. नतीजनत यह जीव जंगल से भटक कर रिहायशी इलाके में आ गया. उल्‍लेखनीय है कि एनबीसी इलाके में एक नाला नाहरगढ़ सेंचुरी से जुड़ा हुआ है, इसीलिए नाले से  यहां पर अक्‍सर कई जीव इंसान की बस्ती की ओर आ जाते हैं.

झालाना के जंगल में छोड़ा गया बिज्‍जू
पाम सिवेट को पकड़कर अब झालाना के जंगल मे छोड़ दिया गया है. लॉकडाउन के दौरान, तमाम लोगों के कहीं भी आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है. लेकिन, यह जाहिर सी बात है कि यह लॉकडाउन वन्यजीवों पर अमल में नहीं आता है. इसी वजह से राजधानी जयपुर समेत राजस्थान के कई इलाकों में वन्यजीवों की हलचल काफी बढ़ गई है. लॉकडाउन के बावजूद वन्य जीव संरक्षण से जुड़े कई रेस्क्यू विशेषज्ञ लगातार वन्यजीवों को इस तरह के मामलों में आबादी में आने पर रेस्क्यू करके बचा रहे हैं और उन्हें जंगल की तरफ वापस छोड़ भी रहे हैं. वन्‍य जीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों की कोशिश है कि जंगल से भटक कर रिहायशी इलाके में आने वाले किसी भी जानवर को कोई नुकसान न पहुंचे और न ही कोई जानवर किसी इंसान को कोई नुकसान पहुंचाए.



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