बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र: यहां बीटीपी की धमक से सहमी हुई है बीजेपी-कांग्रेस

आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला बेहद रोचक हुआ है. लोकसभा क्षेत्र में दोनों प्रमुख दलों बीजेपी व कांग्रेस को भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) ने चुनाव मैदान में सीधे चुनौती दे रखी है. यहां मतदान में 3.83 फीसदी का उछाल आया है.

News18 Rajasthan
Updated: May 19, 2019, 11:51 AM IST
बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र: यहां बीटीपी की धमक से सहमी हुई है बीजेपी-कांग्रेस
बेणेश्वर धाम। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
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Updated: May 19, 2019, 11:51 AM IST
आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला बेहद रोचक हुआ है. लोकसभा क्षेत्र में दोनों प्रमुख दलों बीजेपी व कांग्रेस को भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) ने चुनाव मैदान में सीधे चुनौती दे रखी है. इस नवगठित पार्टी ने विधानसभा चुनाव में क्षेत्र से दो सीटों पर कब्जा करके बीजेपी और कांग्रेस की नींद उड़ा दी थी. अब लोकसभा चुनाव में बीटीपी की उपस्थिति से दोनों प्रमुख पार्टियों ने यहां फूंक-फूंककर कदम रखे हैं. प्रदेश में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में यहां 29 अप्रैल को हुए मतदान में इस बार मतदाताओं ने अच्छी जागरुकता दिखाई है. यहां मतदान में 3.83 फीसदी का उछाल आया है.

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बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. कांग्रेस के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में सेंधमारी के लिए बीजेपी लगातार प्रयासरत रही है. इसमें वह दो बार सफल भी हुई है. उसके बाद बीजेपी की इस क्षेत्र से अपेक्षाएं काफी बढ़ गई. लोकसभा चुनाव-2014 में बीजेपी ने यह सीट कांग्रेस से छीनी थी.

ताराचंद भगौरा।


इसी सीट पर बना हुआ है त्रिकोणीय संघर्ष
कांग्रेस इस क्षेत्र के वोट बैंक को बचाए रखने और बीजेपी उसमें सेंधमारी की फिराक में है. लिहाजा दोनों ही पार्टियों की नजरें इस क्षेत्र पर हमेशा टिकी रही हैं. इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों से यहां अपने प्रत्याशी बदले हैं. यहां बीजेपी के कनकमल कटारा, कांग्रेस के ताराचंद भगौरा और बीटीपी के कांतिलाल रोत बीच मुकाबला हुआ है. प्रदेश में यही एक मात्र सीट है जहां त्रिकोणीय संघर्ष बना हुआ है.

कनकमल कटारा।

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कांग्रेस का गढ़ रहा है यह क्षेत्र
यहां वर्ष 2014 में 68.98 फीसदी मतदान हुआ था वहीं इस बार यह 3.83 फीसदी के उछाल के साथ 72.81 प्रतिशत तक जा पहुंचा है. कांग्रेस का परंपरागत क्षेत्र होने के कारण कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश में लोकसभा चुनाव के अपने दौरों की शुरूआत इसी क्षेत्र के प्रसिद्ध बेणेश्वर धाम से की थी. वहीं आदिवासी बहुल क्षेत्रों के सियासी समीकरण साधने के लिए पीएम मोदी ने उदयपुर में सभा की थी.

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क्षेत्र के सभी आठों विधानसभा क्षेत्र आरक्षित हैं
गुजरात और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की सीमा के निकट डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों की आठ विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बने इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 19,75,198 मतदाता हैं. क्षेत्र में डूंगरपुर, सागवाड़ा, चौरासी, घाटोल, गढ़ी, बांसवाड़ा, बागीदौरा और कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. ये सभी सीटों अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.

कांतिलाल रोत।


बीटीपी ने यहां उखाड़ रखी है बीजेपी-कांग्रेस की सांसें
गत विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र में बीटीपी ने जब डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा और चौरासी सीट पर धमाकेदार जीत दर्ज कराई तो दोनों पार्टियां सकते में आ गई थीं. विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत से उत्साहित बीटीपी ने इस बार बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत चार लोकसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें वह इस क्षेत्र में बेहद मजबूती के साथ डटी हुई है. यहां बीजेपी-कांग्रेस दोनों के समीकरण बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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