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अनूठी परंपरा: बांसवाड़ा के इस गांव में 129 साल से संक्रांति पर हजारों लोग जुटते हैं भविष्यवाणी सुनने के लिए

Ashutosh Trivedi | News18 Rajasthan
Updated: January 14, 2020, 6:40 PM IST
अनूठी परंपरा: बांसवाड़ा के इस गांव में 129 साल से संक्रांति पर हजारों लोग जुटते हैं भविष्यवाणी सुनने के लिए
इसके लिए आयोजनकर्ताओं को कोई विशेष व्यवस्था नहीं करनी पड़ती है. लोग अपनी आस्था के साथ यहां पहुंचते हैं.

न कोई निमंत्रण (Invitation) न कोई सूचना. न कोई टेंट की व्यवस्था न ही बिछात की. फिर भी प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोग (Thousands of people) मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर बांसवाड़ा (Banswara) जिले के घाटोल उपखंड क्षेत्र के भूंगडा गांव (Bhungda Village) में पहुंचते हैं.

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बांसवाड़ा. न कोई निमंत्रण (Invitation) न कोई सूचना. न कोई टेंट की व्यवस्था न ही बिछात की. फिर भी प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोग (Thousands of people) मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर यहां पहुंचते हैं. वजह है वर्षभर की भविष्यवाणी (Prediction) सुनना. प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को यह नजारा देखने को मिलता है बांसवाड़ा (Banswara) जिले के घाटोल उपखंड क्षेत्र के भूंगडा गांव (Bhungda Village) में.

सुबह से ही ग्रामीणों के आने का सिलसिला शुरू हो गया
इसके लिए आयोजनकर्ताओं को कोई विशेष व्यवस्था नहीं करनी पड़ती है. लोग अपनी आस्था के साथ यहां पहुंचते हैं. इस बार भी मकर संक्रांति के पर्व पर मंगलवार को भूंगडा गांव में हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे. सुबह से ही ग्रामीणों के आने का सिलसिला शुरू हो गया. दोपहर तक मैदान पूरी तरह से खचाखच भर गया. जहां तक नजर पहुंच रही थी वहां तक ग्रामीण ही ग्रामीण नजर आ रहे थे.

सभी तरह के भविष्यफल के बारे में ग्रामीणों को बताया जाता है

पं. दक्षेश पण्ड्या ने ग्रामीणों को वर्षभर का भविष्य सुनाया. भविष्यफल राशि के अनुसार कैसा होगा ? देश-दुनिया में क्या होगा ? फसल कैसी होगी ? व्यापार कैसा होगा ? विषम परिस्थितियां कैसी रहेगी ? सभी तरह के भविष्यफल के बारे में पंडित उपस्थित ग्रामीणों को बताते हैं. ग्रामीण बड़े ध्यान से इस भविष्यवाणी का सुनते हैं. ग्रामीणों के अनुसार इस गांव में 129 साल यह परपंरा चल रही है. प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर भविष्यवाणी सुनने के लिए यूं ही मेला जुटता है. बरसों से पण्ड्या परिवार ही भविष्यवाणी सुनाते आए हैं. इससे पहले पं.दक्षेश पण्ड्या के पूर्वज इस परंपरा को निभाते रहे हैं.

श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा चढ़ाते हैं
यह सिर्फ इस आयोजन के प्रति गहरी आस्था ही है कि हजारों की संख्या में लोग मकर संक्रांति के दिन बिन बुलाए यहां पहुंचते हैं. भविष्यफल जानने के बाद ग्रामीण पंडित के रखे हुए पंचांग पर अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा चढ़ाते हैं और अपने अपने घर के लिए प्रस्थान करते हैं. इसके प्रति ग्रामीणों के मन में आज भी वैसी ही आस्था है जैसे पहले थी. इसके लिए जो भी थोड़ी बहुत  व्यवस्था माइक आदि की होती है वह महज गांव के पांच लोग ही संभालते हैं.नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का ऐलान, पंचायत चुनाव के बाद RLP करेगी बड़ा आंदोलन

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First published: January 14, 2020, 6:36 PM IST
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