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कांग्रेस की किसान न्याय यात्रा आज से, सीएम राजे के क्षेत्र को किया टारगेट

फोटो-(ईटीवी)
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कांगेस मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में किसान न्याय यात्रा और किसान सभा करके राजनीतिक बढ़त लेने की कवायद शुरू कर रही है. किसानों की मांगों पर कांग्रेस ने मंगलवार से बारां से चार दिन की किसान न्याय यात्रा शुरू की है.

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कांगेस मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में किसान न्याय यात्रा और किसान सभा करके राजनीतिक बढ़त लेने की कवायद शुरू कर रही है. किसानों की मांगों पर कांग्रेस ने मंगलवार से बारां से चार दिन की किसान न्याय यात्रा शुरू की है. पीसीसी चीफ सचिन पायलट के लिए इस यात्रा के कई सियासी मायने हैं.

सचिन पायलट ने किसान न्याय यात्रा के लिए हाड़ौती का चयन सोच समझकर किया है. बारां-झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह का क्षेत्र है, झालावाड़ सीएम वसुंधरा राजे का निर्वाचन क्षेत्र है, बारां जिला मुख्यालय का क्षेत्र कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का निर्वाचन क्षेत्र है.

किसान न्याय यात्रा के जरिए पायलट मुख्यमंत्री को उनके गृह क्षेत्र में घेरने की रणनीति बना रहे हैं. हालांकि सचिन पायलट ने किसान न्याय यात्रा के लिए हाड़ौती के चयन के पीछे वहां किसानों की आत्महत्याएं ज्यादा होने का कारण बताया है, साथ ही पायलट का दावा है कि किसान न्याय यात्रा के पीछे राजनीति नहीं है.



किसान न्याय यात्रा के बहाने पायलट पार्टी में अपना कद और जनसमर्थन बढ़ाने की कवायद भी कर रहे हैं. सीकर और बासंवाड़ा में किसान रैलियों के बाद अब हाड़ौती के इलाके को पायलट राजनीतिक रूप से साधना चारह रहे हैं.
झालावाड़ सीट से पायलट की मां रमा पायलट भी चुनाव लड़ चुकी हैं, लिहाजा सचिन हाड़ौती की अहमियत बखूबी समझते हैं. अशोक गहलोत को गुजरात का प्रभारी बनाने के बाद पायलट के सामने अब मैदान काफी हद तक क्लियर है, चुनाव से पहले वे किसानों के हितैषी नेता की छवि पुख्ता करना चाहते हैं. हाड़ौती की किसान न्याय यात्रा इस लिहाज से ही डिजाइन की गई है.

किसानों के मुद्दे पर माकपा पहले ही आंदोलन करके राजनीतिक क्रेडिट ले चुकी है, कांग्रेस कर्ज माफी पर आंदोलन की बात करती रही और माकपा आंदोलन करके मांगें मनवाने में भी कामयाब रही. पिछड़ने के बाद अब सचिन पायलट ने सीएम के गृह क्षेत्र से किसान न्याय यात्रा शुरू करके छिन गए मुद्दे को वापस हाथ में लेने की कवायद की है.

हालांकि सचिन पायलट तर्क देते हैं कि किसानों से जुड़े मुद्दे पर सब मिलकर लड़ रहे हैं, किसान खेत और सड़क पर तो कामयाब रहे, लेकिन टेबल पर हार गए.
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