नाबालिग रेप पीड़िता ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप, उठे कार्यशैली पर सवाल

राजस्थान के बारां जिले की रेप पीड़िता एक नाबालिग ने सीसवाली थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इससे पुलिस की पूरी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं.

Vipin Tiwari | News18 Rajasthan
Updated: September 4, 2019, 4:57 PM IST
नाबालिग रेप पीड़िता ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप, उठे कार्यशैली पर सवाल
दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग लड़की ने सुनाई आपबीती
Vipin Tiwari | News18 Rajasthan
Updated: September 4, 2019, 4:57 PM IST
बारां जिले के सीसवाली थाना पुलिस पर एक नाबालिग रेप पीड़िता (Rape victim) ने बेहद ही गंभीर आरोप लगाए हैं. इस नाबालिग (Minor) के आरोपों ने पुलिस (Police) की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. नाबालिग को 31 मई को उसी के गांव के मुकेश और रणजीत नाम के दो युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए और रास्ते में उसके साथ दुष्कर्म किया. उसके बाद लड़की के गांव के ही अनिल नाम के एक लड़के को 20 हजार रुपए लेकर सौंप दिए. अनिल उस समय मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के श्योपुर में अपने रिश्तेदार के यहां था. उसके बाद अनिल उस नाबालिग लड़की को लेकर जयपुर (Jaipur) चला गया और करीब तीन महीने तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा.

थाने वाले लड़की का पता लगाने के नाम पर उसके मजदूर पिता से मंगाते थे गाड़ी 
लड़की का पिता अपनी बेटी को ढूंढने के लिए 3 महीने तक थानेदार से लेकर आईजी तक गुहार लगाता रहा. खेतों में मजदूरी करने वाले इस लड़की के पिता का कहना है कि उसकी बेटी को ढूंढने के लिए पुलिसवालों ने उसी से कई बार गाड़ियां मंगवाई. जिसके 15 हजार रुपए भी उसने उधार लेकर चुकाए, लेकिन पुलिस उसकी बेटी का कोई सुराग नहीं लगा पाई.

इस थाने के पुलिस अधिकारियों ने रेप पीड़िता नाबालिग लड़की के पिता की नहीं सुनी फरियाद


नामजद रिपोर्ट लिखवाने के बाद भी पता नहीं लगा पाई पुलिस 

बारां के जिस सीसवाली थाने में लड़की के पिता ने अपनी नाबालिक बेटी के गांव के लड़के अनिल के संग चले जाने की रिपोर्ट लिखवाई, उस थाने के अधिकारी तीन महीने तक उसकी लड़की का पता तक नहीं लगा पाए. इसी बीच 23 अगस्त को अनिल का वकील लड़की को अचानक भिखारी की वेश-भूषा में सदर थाने छोड़ गया. सूचना मिलने पर सीसवाली थाने के अधिकारियों ने लड़की के पिता से गाड़ी मंगवाई और वहां लड़की को लेकर थाने पहुंच गए. लड़की के पिता का आरोप है की पुलिसकर्मियों ने उसे अपनी बेटी से नहीं मिलने दिया.

वकील ने डरा-धमकाकर नहीं मिलने दिया था पिता से 
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लड़की का आरोप है की अनिल और उसके वकील ने उसे डराया धमकाया और कहा -' तेरे पिता तुझे जला कर मार देंगे, तुम उनसे बात मत करना'. थाने में भी पुलिसवालों ने उससे कहा - 'तू किसी के खिलाफ बयान मत दे'. इसके बाद पुलिस वालों ने लड़की को किशोर न्यायालय में पेश कर सखी केंद्र भेज दिया. सखी केंद्र में भी 4  दिन रहने के दौरान लड़की को उसके पिता से नहीं मिलने दिया गया.  इस डरी-सहमी नाबालिग लड़की को शायद अपने साथ हुए सही-गलत का पता नहीं था, उसने  वकील और पुलिस के कहने पर कोर्ट में अपना बयान दे दिया.  राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद 5  दिन गुजरने पर लड़की जब अपने पिता से मिली तो सारी हकीकत बताई. अब लड़की के पिता आरोपी को सजा दिलाने के लिए उच्चाधिकारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं.

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First published: September 4, 2019, 4:44 PM IST
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