पेट की भूख के आगे यहां सबकुछ बेमानी, बारां में बच्चों को गिरवी रख रहे हैं आदिवासी

हाड़ौती संभाग में स्थित बारां जिले में गरीबी से जूझ रहे आदिवासी समुदाय के लोग अपने बच्चों को गिरवी रखने को मजबूर हो रहे हैं. महज 30 से 40 हजार रुपए में इन बच्चों को भेड़ व ऊंट चराने के लिए गिरवी रखा जा रहा है.

Vipin Tiwari | News18 Rajasthan
Updated: July 2, 2019, 7:55 PM IST
पेट की भूख के आगे यहां सबकुछ बेमानी, बारां में बच्चों को गिरवी रख रहे हैं आदिवासी
30 से 40 हजार रुपए सालाना में रख रहे हैं गिरवी हैं बच्चे।
Vipin Tiwari | News18 Rajasthan
Updated: July 2, 2019, 7:55 PM IST
हाड़ौती संभाग में स्थित बारां जिले में गरीबी से जूझ रहे आदिवासी समुदाय के लोग अपने बच्चों को गिरवी रखने को मजबूर हो रहे हैं. महज 30 से 40 हजार रुपए में इन बच्चों को भेड़ व ऊंट चराने के लिए गिरवी रखा जा रहा है. सरकारी दावों के विपरीत बारां जिले के आदिवासी समुदाय की यह तस्वीर दिन प्रतिदिन भयावह होती जा रही है.

सरकारी दावों की पोल खोल रही है भयावह तस्वीर
बारां जिले के आदिवासी क्षेत्र में निःशुल्क राशन, शिक्षा और चिकित्सा के सरकारी दावों की पोल खोलने वाली यह दास्तां बता रही है कि पेट की भूख के आगे सबकुछ बेमानी है. यहां मां-बाप सालभर की मजदूरी के नाम पर 30 से 40 हजार रुपए में बच्चों को रेबारियों के पास गिरवी रख रहे हैं. रेबारी इन बच्चों को भेड़ और ऊंट चराने का काम देते हैं.

रेबारियों के पास रखे जा रहे हैं गिरवी

बारां के शाहाबाद उपखंड के भील समाज के गांव आनासागर, रानीपुरा, हाड़ौता, उचावत, मंगलपुरा, खूंटी, बलारपुर आदि गांवों के 50 से ज्यादा बच्चे रेबारियों के पास गिरवी हैं. जगह-जगह भेड़ निष्क्रमण के दौरान रेवड़ के साथ यह बच्चे आसानी से देखे जा सकते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि चाइल्ड लाइन और मानव तस्करी यूनिट इस गोरखधंधे को जानकर भी अनजान बनी हुई है.

30-30 हजार रुपए में रखा गिरवी
शाहाबाद उपखंड के एक गांव के शामू और रमेश के पिता की 3-4 वर्ष पहले बीमारी से मौत हो गई थी. मां नाते चली गई. चाचा की हैसियत इतनी नहीं थी वह उन्हें पाल सके. लिहाजा उसने दोनों भतीजों को रेबारियों के पास 30-30 हजार रुपए में गिरवी रख दिया. दोनों भाई दो वर्ष से रेबारियों के साथ भेड़ें चराते हैं. इसी इलाके के एक अन्य गांव में दो वर्ष पहले दीन्या की पत्नी की मौत हो गई थी. क्रियाकर्म और अन्य कामों पर 30 हजार रुपए खर्च हो गए. इतने रुपयों की व्यवस्था करने के लिए उसने अपने 14 वर्ष के बेटे को भेड़ें चराने के लिए गिरवी रख दिया. उसका बेटा अभी भी रेबारियों के साथ है.
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उपखंड अधिकारी बोले शिकायत आएगी तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी
इस पूरे मामले पर शाहबाद के उपखण्ड अधिकारी कैलाश गुर्जर का कहना है कि बच्चों को गिरवी रखने की सूचना या शिकायत आती है तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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First published: July 2, 2019, 7:38 PM IST
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