बाड़मेर में लगातार बढ़ रहे एड्स के मरीज, हजार से ऊपर पहुंचा आंकड़ा

फोटो-(ईटीवी)

बाड़मेर जिले में एड्स का दंश तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि सरकार की ओर से एड्स बचाव को लेकर लाख कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन बाड़मेर जिले में आंकड़ें तमाम प्रचार-प्रसार को झूठलाते नजर आते हैं.

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बाड़मेर जिले में एड्स का दंश तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि सरकार की ओर से एड्स बचाव को लेकर लाख कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन बाड़मेर जिले में आंकड़ें तमाम प्रचार-प्रसार को झूठलाते नजर आते हैं.

सरकार भले ही इसके बचाव व रोकथाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही हो, लेकिन सच का सामना करने से हर कोई कतराते नजर आते है. अब तक 1001 एचआईवी पीड़ित सामने आए हैं.

एचआईवी रोकथाम को लेकर जितने प्रयास होने चाहिए उतने चिकित्सा महकमा नहीं कर पा रहा है. उपचार के लिए दवा तो दी जा रही है, लेकिन न तो मौतें थम रही हैं और न रोगी. ऐसी स्थिति विभागीय लचरता की कलई खोल रही है.

जिले में प्रतिवर्ष एड्स रोगियों की संख्या बढऩे के साथ मौत का आकड़ा भी बढ़ता जा रहा है. राजस्थान एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से रोकथाम व काबू करने के प्रयासों के बावजूद यह लाइलाज बीमारी थार में घातक बनती जा रही है. जिले में अशिक्षा व जागरूकता की कमी के साथ सुदूर गांवों में इसकी स्क्रीनिंग व जांच का कार्य प्रभावी तरीके से नहीं होता है.

जिले के बाहरी प्रदेशों में काम करने वाले सभी लोगों का रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं होने से नए-नए रोगी सामने आ रहे है. जिले में वर्ष 2013 में 539 रोगियों को एआरटी सेन्टर से इस रोग से लड़ने के लिए दवा दी जाती थी. यह आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते पिछले तीन वर्ष में करीब दोगुना हो गया है. वहीं मौतों की संख्या का ग्राफ प्रतिवर्ष बढ़ रहा है.

जिले में एक तरफ एड्स रोगियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, तो दूसरी तरफ सरकारी योजनाएं व सुविधाएं इनके लिए दूर की कौड़ी बनी हुई है. नियमानुसार एड्स पीड़ितों को बीपीएल श्रेणी में लेने का नियम हैं, जबकि जिले के सैकड़ों मरीज इस सुविधा से वंचित हैं. वहीं रोडवेज में निशुल्क यात्रा के लिए इनके स्मार्ट कार्ड नहीं बने हैं. इसके कारण प्रतिमाह दवा के लिए एआरटी सेंटर व अन्य यात्रा में आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है.

जिला स्तर पर दूर दराज से पहुंचने वाले रोगियों के ठहराव के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने से मुश्किलों से गुजरना पड़ रहा है. इस रोग से जुड़े पालनहार बच्चों को समय पर पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलने से परेशानियां बढ़ जाती है. महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न परियोजनाओं में काम कर रही महिला पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी सहायिका के माध्यम से क्षेत्र मे विस्थापितों को चिन्हित कर कैम्प में लाना होगा. वहीं ब्लॉक स्तरीय योजना तैयार करने में सहायता प्रदान करने में सहायता करेंगे.

जिले में 14 जन स्वास्थ्य केन्द्रों में एकीकृत सलाह और जांच केन्द्र आईसीटीसी केन्द्र हैं. यहां पर गोपनीय माहौल में एड्स के बारे में जानकारी व सहायता प्रदान की जाती है. जिला चिकित्सालय स्थित एआरटी सेंटर में एड्स पीड़ितों की सीडी4 जांच के लिए करीब 25 लाख रुपए लागत की मशीनें लगी है, जिसके बावजूद बाड़मेर स्वास्थ्य विभाग रोकथाम को लेकर विफल हो रहा है.

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