बाड़मेर: पुलिस हिरासत में मौत, 48 घंटे बाद भी नहीं हो पाया पोस्टमार्टम, वार्ताओं का दौर जारी, देखें पूरा अपडेट
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बाड़मेर: पुलिस हिरासत में मौत, 48 घंटे बाद भी नहीं हो पाया पोस्टमार्टम, वार्ताओं का दौर जारी, देखें पूरा अपडेट
मृतक के परिजन और समाज के लोग अब तक कि वार्ता से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे और वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

बाड़मेर (Barmer) जिले के ग्रामीण थाने में पुलिस की अवैध हिरासत में युवक जीतू खटीक की मौत (Death in police custody) का मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है. घटना के करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक जीतू का शव पुलिस सुरक्षा (Police security) में जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा है.

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बाड़मेर. जिले के ग्रामीण थाने में पुलिस की अवैध हिरासत में युवक जीतू खटीक की मौत (Death in police custody) की मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है. घटना के करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक जीतू का शव पुलिस सुरक्षा (Police security) में जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा है और बाहर वार्ताओं (Talks) के दौर चल रहे हैं. इस मामले में बाड़मेर जिला मुख्यालय से लेकर विधानसभा तक में संग्राम छिड़ा हुआ है. प्रकरण में अभी तक पुलिस अधीक्षक, उप अधीक्षक, थानाप्रभारी और पूरे थाना स्टाफ पर गाज गिर चुकी है, लेकिन युवक के परिजन अपनी मांगों (Demands) पर अड़े हुए हैं.

परिजन अड़े हैं अपनी मांगों पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पहले पुलिस अधीक्षक को एपीओ कर जोधपुर रेंज आईजी नवज्योति गोगोई को मौके पर भेजा. उसके बाद एडीजी रवि प्रकाश मेहरड़ा को मौके पर भेजकर परिजनों और समाज के लोगों से समझाइस का प्रयास किया. लेकिन पार नहीं पड़ी. चार दौर की वार्ता लगातार असफल होने के बाद अब शनिवार को बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन को भेजा गया है. लेकिन मृतक के परिजन और समाज के लोग अब तक कि वार्ता से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे और वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

परिजनों और समाज के लोगों की ये हैं मांगें



- एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए.


- पीड़ित परिवार के किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए.
- आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की जाए.
- मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए.
- पीड़ित परिवार के लिए एक भूखंड दिया जाए.

राजस्थान पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं
मृतक के परिजनों और समाजजनों का कहना है कि उन्हें राजस्थान पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है. जब तक हमारी मांगों को नहीं माना जाएगा तब तक किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं होगा. वहीं जैसे जैसे समय बीत रहा है वैसे वैसे इस मामले में समाज के नेताओं के साथ-साथ बीजेपी नेता भी जुटते जा रहे हैं. बाड़मेर पहुंचे केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल के बेटे रवि मेघवाल का कहना है अधिकारी बेलगाम हो गए हैं और आए दिन इस तरह के की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. बकौल रवि मंत्री मेघवाल पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट संसद और एससी-एसटी कमीशन के समक्ष रखेंगे.

बाड़मेर: पुलिस हिरासत में मौत, 48 घंटे बाद भी नहीं हो पाया पोस्टमार्टम, वार्ताओं का दौर जारी, यहां देखें पूरा अपडेट Barmer: Death in police custody-Postmortem could not be done even after 48 hours, negotiations continue
मृतक जीतू खटीक।


बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन पहुंचे धरनास्थल पर
वहीं शनिवार को वार्ता के लिए धरनास्थल पर पहुंचे बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वासन भी दिया कि राजस्थान सरकार दुख की इस घड़ी में उनके साथ है. वह पीड़ित परिवार को हर संभव न्याय और मदद करने का प्रयास करेगी.

अब तक ये अधिकारी नप चुके हैं
इस मामले को लेकर राज्य सरकार ने बाड़मेर पुलिस अधीक्षक शरद चौधरी और बाड़मेर पुलिस उप अधीक्षक विजय सिंह चारण को एपीओ कर दिया है. वहीं बाड़मेर ग्रामीण थानाप्रभारी दीप सिंह भाटी को सस्पेंड कर दिया गया है. इसके साथ ही पूरे थानास्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

गुरुवार को हुई थी युवक की मौत
उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले बुधवार दोपहर को हमीरपुरा निवासी जीतू खटीक को ग्रामीण थाना पुलिस चोरी के मामले में पूछताछ करने के लिए लाई थी. गुरुवार को सुबह पुलिस हिरासत में अचानक जीतू की बिगड़ी तबीयत बिगड़ गई. इस पर पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए. युवक को आनन-फानन में इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया. वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया.

 

 

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