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बाड़मेर के गावों में पड़ा है अकाल, पशुपालक चारे के लिए गिरवी रख रहे हैं गहने

बाड़मेर के गावों में पड़ा है अकाल, पशुपालक चारे के लिए गिरवी रख रहे हैं गहने

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांवों में अकाल की वजह से हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वहां के पशुपालक अपने गहने गिरवी रखकर मवेशियों को बचाने के जतन कर रहे हैं. मगर राज्य सरकार ने बाड़मेर जिले के 2 हजार 206 गांव को अभाव गस्त  घोषित तो कर दिए लेकिन अभी तक इन गांवों में अकाल राहत शिविर व रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की है, जिससे सैकड़ों की संख्या मे मवेशी सीमावर्ती गांवों में चारे पानी की वजह से दम तोड़ रहे हैं और वहां के पशुपालक पलायन के लिए भी मन बना रहे है.

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांवों में अकाल की वजह से हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वहां के पशुपालक अपने गहने गिरवी रखकर मवेशियों को बचाने के जतन कर रहे हैं. मगर राज्य सरकार ने बाड़मेर जिले के 2 हजार 206 गांव को अभाव गस्त घोषित तो कर दिए लेकिन अभी तक इन गांवों में अकाल राहत शिविर व रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की है, जिससे सैकड़ों की संख्या मे मवेशी सीमावर्ती गांवों में चारे पानी की वजह से दम तोड़ रहे हैं और वहां के पशुपालक पलायन के लिए भी मन बना रहे है.

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांवों में अकाल की वजह से हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वहां के पशुपालक अपने गहने गिरवी रखकर मवेशियों को बचाने के जतन कर रहे हैं.

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांवों में अकाल की वजह से हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वहां के पशुपालक अपने गहने गिरवी रखकर मवेशियों को बचाने के जतन कर रहे हैं. मगर राज्य सरकार ने बाड़मेर जिले के 2 हजार 206 गांव को अभाव गस्त घोषित तो कर दिए लेकिन अभी तक इन गांवों में अकाल राहत शिविर व रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की है, जिससे सैकड़ों की संख्या मे मवेशी सीमावर्ती गांवों में चारे पानी की वजह से दम तोड़ रहे हैं और वहां के पशुपालक पलायन के लिए भी मन बना रहे है.

बाड़मेर जिले में चारे की आस में पशुधन भटक रहा है और पानी के लिए मीलों सफर तय करना पड़ रहा है, जिसके कारण कई मवेशी मौत के घाट उतर गए हैं. वहीं पशुधन को बचाने के लिए किसान अपने गहने बेचकर व साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर पशुधन को बचाने की कोशिश कर रहे है.

यहां के प्रशासनिक अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नही खुल रही है. जिले के सीमावर्ती गांवों के ग्रामीण बताते हैं कि तीन साल से बिल्कुल बारिश नहीं हुई है और विशेषकर इस साल तो पशुधन के बुरे हाल हैं. उनके खाने के लिए किसी भी प्रकार की घास नही हैं. अब तो ऐसी स्थिति आई है कि पशुओं को बचाने के लिए गहने गिरवी रख रहे हैं. अब अगर सरकार ने समय रहते पशु राहत शिविर नहीं खोले तो हालात और बिगड़ सकते हैं.

जिले के 2 हजार 206 गांवों के लाखों सूखा प्रभावित किसानों को फसल खराबे के मुआवजे और अकाल राहत योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं का इंतजार है.

सूखा प्रभावित गांवों की अधिसूचना जारी होने के बाद भी न तो किसानों को मुआवजा तय हुआ है और न ही सुविधाएं ही मिलना शुरू हुई हैं.

Tags: Barmer news

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