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नागरिकता संशोधन कानून: हिंदू शरणार्थियों की उम्मीदें जगी, बाड़मेर में 7 नए आवेदन आए

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों से आए हिंदू (Hindu) तथा दूसरे धर्मों के शरणार्थियों ने इस कानून के पक्ष में समर्थन किया
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों से आए हिंदू (Hindu) तथा दूसरे धर्मों के शरणार्थियों ने इस कानून के पक्ष में समर्थन किया

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Act) के बाद अब पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों (Pakistani Hindu Refugees) को उम्मीद जगी है कि उन्हें जल्द भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) मिलेगी.

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बाड़मेर. नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Act) के बाद अब पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों (Pakistani Hindu Refugees) को उम्मीद जगी है कि उन्हें जल्द भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) मिलेगी. बाड़मेर (Barmer) जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को नागरिकता आवेदन के लिए आयोजित विशेष कैम्प में 7 नए पाकिस्तानी शरणार्थियों ने आवेदन (Application) किया है. वहीं 26 पुराने आवेदकों के दस्तावेजों की कमी पूर्ति को पूरा किया गया है.

शरणार्थियों ने कहा पाकिस्तान में उन पर जुल्म और अत्याचार हो रहे थे
भगवान महावीर टाउन हॉल में आयोजित विशेष शिविर भारतीय नागरिकता के लिए सात नए आवेदकों ने आवेदन किया है. पाकिस्तान से आए इन विस्थापित हिंदूओ का कहना है कि पाकिस्तान में उनके ऊपर जुल्म और अत्याचार हो रहे थे. इसलिए वहां से पलायन कर वे हिंदुस्तान आए हैं. शिविर में जिला कलक्टर अंशदीप, अतिरिक्त जिला कलक्टर राकेश कुमार शर्मा और राज्य सरकार की ओर से नियुक्त प्रतिनिधी मौजूद रहे.

आवेदनों को नियमानुसार राज्य स्तर पर भेजा जाएगा
विशेष शिविर में जिला कलक्टर अंशदीप के समक्ष पूर्व में लंबित आवेदनो की कमी पूर्ति करवाई गई. जिला कलक्टर अंशदीप ने बताया कि भारतीय नागरिकता के लिए आवेदनों को नियमानुसार राज्य स्तर पर भेजा जाएगा. इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर राकेश कुमार शर्मा ने आवेदनकर्ताओं को राज्य निष्ठा की शपथ दिलाई.



राजस्थान में लागू करने पर अनिश्चितता के बादल
उल्लेखनीय है कि हाल ही में राज्यसभा और लोकसभा में पारित किए गए नागरिकता संशोधन कानून के राजस्थान में लागू होने पर भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं. इस कानून को लागू करने के मामले पर राजस्थान भी अन्य कांग्रेस शासित राज्यों की तर्ज पर पीछे हट सकता है. सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने गृह विभाग के आला अधिकारियों को इस कानून पर मंथन करने के निर्देश दे रखें हैं. इस मामले में शुक्रवार देर रात तक गृह विभाग के अधिकारी विधि विभाग से राय लेते रहे. हालांकि अभी तक कोई भी अधिकारी इस पर खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है.

 

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