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    लकड़ी के बदले गोकाष्ट से अंतिम संस्कार, पर्यावरण संरक्षण के लिए श्मशान समिति ने उठाया अनोखा कदम

    बाड़मेर में अब गोबर से बने लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जाता है. (सांकेतिक तस्वीर)
    बाड़मेर में अब गोबर से बने लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जाता है. (सांकेतिक तस्वीर)

    बाड़मेर के सार्वजनिक मोक्षधाम में सालों पहले गोबर से बने उपलों से शवों का अंतिम संस्कार (Last Rite) होता था. फिर लड़की से अंतिम संस्कार किया जाने लगा. लेकिन अब गोबर से बने गोकाष्ट से अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

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    बाड़मेर. पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) को लेकर राजस्थान के बाड़मेर की श्मशान विकास समिति की ओर से अनूठी पहल की गई है. श्मशान घाटों में अब लकड़ी की बजाय गाय के गोबर से बने गोकाष्ट से अंतिम संस्कार (Last Rite) किया जा रहा है. ऐसे में जहां गाय का महत्व बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर सड़कों और गोशालाओं में पड़े गोबर का समुचित उपयोग होने लगा है. इससे प्रदूषण को कंट्रोल करने में भी मदद मिल रही है.

    स्थानीय लोगों के मुताबिक बाड़मेर के सार्वजनिक मोक्षधाम में सालों पहले गोबर से बने उपलों से शवों का अंतिम संस्कार होता था. फिर लड़की से अंतिम संस्कार किया जाने लगा. लेकिन अब गोबर से बने गोकाष्ट से अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

    बाड़मेर श्मशान विकास समिति के संयोजक भैरू सिंह फुलवारिया बताते हैं कि गोबर जलने से पर्यावरण शुद्ध होगा. अंतिम संस्कार में इसके उपयोग से आसपास का वातावरण शुद्ध होगा. इससे भी बड़ी बात यह है कि एक शव के अंतिम संस्कार में 4 से 5 क्विंटल लकड़ी खर्च होता था. लेकिन गोकाष्ट मात्र 3 से 3.50 क्विंटल लगता है. गोकाष्ट के प्रयोग से एक अंतिम संस्कार में दो पेड़ों को बचाया जा रहा है.



    बाड़मेर स्थित सार्वजनिक मोक्षधाम में पेड़ की लकड़ी 6.50 रुपए किलो मिलती है, जबकि गोकाष्ट 5 रुपए किलो मिलता है. ऐसे में अंतिम संस्कार में खर्च भी कम पड़ रहा है.
    भगवती गोशाला, निम्बड़ी के अध्यक्ष ओमप्रकाश मेहता बताते हैं कि धार्मिक महत्व के हिसाब से गोबर का प्रमुख स्थान है. धर्म से लेकर अंतिम संस्कार में इसकी बढ़ती उपयोगिता के चलते गोशाला में गोकाष्ट का प्लांट लगाया है. यहां से रोज दो गाड़ी गोकाष्ट मुफ्त सार्वजनिक मोक्षधाम में भेजी जाती है.
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