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20 रुपये की दिहाड़ी करने वाले मजदूर आसुराम कैसे बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पढ़ें संघर्ष की कहानी

आसुराम की सफलता की कहानी युवाओं के लिये प्ररेणास्त्रोत है.

आसुराम की सफलता की कहानी युवाओं के लिये प्ररेणास्त्रोत है.

Barmer Latest News: राजस्थान के पश्चिमी इलाके में भारत-पाकिस्तान की सरहद पर बसे बाड़मेर जिले के चौहटन निवासी आसुराम गढ़वीर (Asuram Gadhveer) ने सफलता की नई कहानी लिखी है. आसुराम बचपन में कभी 20 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर काम करते थे लेकिन उन्होंने अपने सपने को संजोये रखा और पढ़ाई जारी रखी. आज आसुराम का सपना पूरा हो गया है. आसुराम ने कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर (Aassistant professor) में परिणाम में अनुसूचित जाति वर्ग में राजस्थान में पहली रैंक हासिल की है. आसुराम बताते हैं कि इस परीक्षा के लिए वे नियमित रूप से रात में आठ बजे से दो बजे तक पढ़ाई करते थे तब जाकर सफलता हाथ आई है. आसुराम इससे पहले शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल होकर शिक्षक बने. उसके बाद पीजी और नेट की परीक्षा पास की. आसुराम ने साबित कर दिया कि वह वास्तव में गुदड़ी का लाल हैं.

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बाड़मेर. सफलता हमेशा कठोर परिश्रम के मार्ग से ही होकर गुजरती है. कोई अगर इस पर पूरी शिद्दत से इस सफर को पूरा कर ले तो वह मंजिल तक पहुंच ही जाता है. जिंदगी की तमाम मुश्किलों के बावजूद की गई कड़ी मेहनत सफलता का ताज पहना ही देती है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बाड़मेर के गुदड़ी के लाल आसुराम गढ़वीर (Asuram Gadhveer) ने. आसुराम ने 20 रुपये रोजना में दिहाड़ी मजदूरी भी की लेकिन अपनी पढ़ाई को जारी रखा. इसका नतीजा यह हुआ कि बीते दिनों जारी हुए कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर (Aassistant professor) की परीक्षा परिणाम में आसुराम ने अनुसूचित जाति वर्ग में राज्यभर में पहली रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया.

सरहदी बाड़मेर के छोटे से गांव चौहटन के रहने वाले आसुराम गढ़वीर ने असिस्टेंट प्रोफेसर के परीक्षा परिणाम में एससी वर्ग में राज्यभर में पहली रैंक हासिल की है. बचपन में महज 20 रुपये दिहाड़ी मजदूरी कर खुद का और परिवार का गुजर बसर करने वाले आसुराम के माता पिता अभी तलक मजदूरी करते थे. लेकिन बेटे की सफलता के बाद अब सभी को आसुराम की मेहनत पर गर्व है. आसुराम बताते हैं कि इस परीक्षा के लिए वे नियमित रूप से रात में आठ बजे से दो बजे तक पढ़ाई करते थे तब जाकर सफलता हाथ आई है. आसुराम इससे पहले शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल होकर शिक्षक बने. उसके बाद पीजी और नेट की परीक्षा पास की.

सफलता के पीछे छोटे भाई का भी बड़ा त्याग शामिल है
आसुराम की इस सफलता के पीछे उनके छोटे भाई का भी बड़ा त्याग शामिल है. बड़ा भाई पढ़ता रहे इसके लिए छोटे भाई ने आर्थिक तंगी के चलते पांचवी में ही पढ़ाई छोड़ दी. अब जब बड़ा भाई सफल हुआ तो वह छोटे भाई के त्याग को नहीं तो भूला और डबडबाई आंखों से उसे सलाम किया. कल तलक जो आसुराम मजदूरी करता था उसने उस परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़ दिये हैं जिसमें बैठने से पहले लोगों के पसीने छूट जाते हैं.

बस इरादा मजबूत और नेक होना चाहिये
आसुराम ने साबित कर दिया कि वह वास्तव में गुदड़ी का लाल हैं. आसुराम की सफलता बताती है कि अगर इरादा मजबूत और नेक हो तो सक्सेस को झक मारकर आना ही पड़ेगा. मुश्किलें कितनी भी हो अगर शिद्दत से मेहनत की जाये तो किसी लक्ष्य को पाया जा सकता है. कड़ी मेहनत ही आसुराम की सफलता का मूलमंत्र है और वे इसे ही दूसरों को भी अपनाने की अपील कर रहे हैं.

Tags: Barmer news, Job and career, Rajasthan news, Success Story

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