बाड़मेर: जिला अस्पताल के भयावह हालात, एक बिस्तर पर 2 से 3 मरीज, फर्श पर भी हो रहा इलाज

10 बेड की क्षमता वाली इमरजेंसी में हर घंटे औसतन 10 मरीज आ रहे हैं.

10 बेड की क्षमता वाली इमरजेंसी में हर घंटे औसतन 10 मरीज आ रहे हैं.

Dreadful condition of barmer district hospital: बाड़मेर में कोरोना के बिगड़े हालात के कारण जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर आ गया है. यहां आपातकालीन ईकाई में एक बेड पर 2 से 3 मरीज ऑक्सीजन ले रहे हैं.

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बाड़मेर. पश्चिमी राजस्थान में स्थित बाड़मेर जिले का जिला अस्पताल (Barmer District Hospital) कोरोना काल में बुरे हालात से गुजर रहा है. अस्पताल के 10 बेड के आपातकालीन वार्ड में इन दिनों मरीजों की जमकर फजीहत हो रही है. उपचार के लिए यहां पहुंच रहे गंभीर रोगियों को भी बेड नसीब नहीं (No bed) हो पा रहे हैं. ज्यादातर रोगी जमीन पर लेटकर इलाज ले रहे हैं. लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों के चलते अस्पताल का फर्श भी कम पड़ने लगा है. अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि एक बिस्तर पर दो से तीन मरीज लेटने को मजबूर हैं. इससे जहां संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है वहीं गंभीर रोगियों का दर्द भी दुगुना हो गया है.

बाड़मेर में कोरोना की दूसरी लहर जानलेवा होने के साथ ही बेकाबू होती जा रही है. कोरोना के बढ़ते रोगियों के कारण जिला अस्पताल में अब चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह से लड़खड़ा चुकी है. 10 बेड की क्षमता वाली इमरजेंसी में हर घंटे 10 मरीज आ रहे हैं. हाई फ्लो मास्क से ऑक्सीजन ले रहे कई रोगी फर्श पर भी भर्ती हैं. यहां 24 घंटे सेवा दे रहे नर्सिंग स्टाफ हर मरीज की जान को बचाने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है.

रोजाना 65-70 से ज्यादा रोगी भर्ती हो रहे हैं

इमरजेंसी में रोज 65-70 से ज्यादा रोगी भर्ती हो रहे हैं. जबकि जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की क्षमता 10 बेड की है. कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण जगह नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल प्रशासन उन्हें एक बारगी जैसे -तैसे भर्ती कर जान बचाने का प्रयास कर रहा है. आपातकालीन वार्ड में पाइपलाइन से ऑक्सीजन सप्लाई के 10 प्लग ही है. इसके बावजूद फर्श पर क्षमता से ज्यादा भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर पर सपोर्ट देकर रखा जा रहा है.
सभी अस्पताल फुल हो चुके हैं

इमरजेंसी में सीरियस मरीजों का तत्काल इलाज तो शुरू कर दिया जाता है, लेकिन इसके बाद उन्हें भर्ती करने के लिए वार्डों में बेड खाली नहीं होने के कारण घंटों इमरजेंसी में रखना पड़ रहा है. जैसे ही वार्ड में बेड खाली होता है तो उसकी सूचना इमरजेंसी को मिलती है. इसके बाद मरीज को वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है. ऐसे में आपातकालीन वार्ड भी वेंटिलेटर पर है. बाड़मेर जिला अस्पताल समेत कन्या महाविद्यालय और कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में बनाये गये कोविड सेंटर में सभी बेड फुल हो चुके हैं. ऐसे में केयर्न वेदान्ता की ओर से 100 बेड का अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है.

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