घास-फूस की झोपड़ी में चलता है सरकारी स्कूल, बुनियादी सुविधायें भी हैं नदारत

ना तो पीने का पानी है और ना ही शौचालय है. बाकी सुविधाएं तो भूल ही जाइये. ऊपर से इंद्र देव की मेहरबानी हो जाए तो बिन बताए छुट्टी भी हो जाती है.

Premdan Detha | News18 Rajasthan
Updated: August 3, 2019, 7:23 PM IST
Premdan Detha | News18 Rajasthan
Updated: August 3, 2019, 7:23 PM IST
जिनके कंधों पर भविष्य की जिम्मेदारी है. वो नौनिहाल किस हाल में और कैसे पढ़ाई कर रहे हैं. बाड़मेर का ये स्कूल कहने को तो सरकारी स्कूल है, पर स्कूल का संचालन घास-फूस की बनी झोपड़ी में हो रहा है. ना तो पीने का पानी है और ना ही शौचालय है. बाकी सुविधाएं तो भूल ही जाइये. ऊपर से इंद्र देव की मेहरबानी हो जाए तो बिन बताए छुट्टी भी हो जाती है.

घास-फूस की झोपड़ी में स्कूल, School in a thatched hut
मासूम बच्चे मौसम की मार झेलते हुए घास-फूस की झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर है.


मन में लगन है, पढ़ने की ललक है, पढ़ाई में होशियार भी हैं लेकिन सिस्टम के मारे हैं. ना बिल्डिंग है ना ही ब्लैक बोर्ड अब ऐसे हालातों में बच्चों की पढ़ाई कैसे होती होगी सोचना मुस्किल नहीं है.

घास-फूस की झोपड़ी में स्कूल, School in a thatched hut
ना घंटी है और ना शौचालय सरी जरूरी सुविधाएं इस स्कूल से नदारद हैं


सरकारी उपेझा का शिकार नहीं बल्कि, स्थानीय लोग ही हैं जिम्मेदार 

बाड़मेर जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर आटी गांव का ये स्कूल सरकारी उपेझा का शिकार नहीं बल्कि इस स्कूल के इस हाल के लिए स्थानीय लोग ही जिम्मेदार हैं. आपसी विवाद में स्थानीय लोग ही स्कूल को बनने नहीं दे रहे हैं. उम्मीद है किसी जिम्मेदार की नजर इस स्कूल पर पड़े और अपने ही वजूद को तलाशते इस स्कूल के दिन बदले नहीं तो इस स्कूल में पढ़ने वाले 40 बच्चों का भविष्य तो अंधकार में ही रहेगा.

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First published: August 3, 2019, 7:19 PM IST
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