Barmer: रेतीले धोरों में मेहनतकश रिटायर्ड अधिकारी ने लगा डाले सेव, लिची और नारंगी के पेड़

बकौल चौधरी पेड़ों से फल मिलने से अधिक मुझे इनको हराभरा देखकर सुकून मिलता है.
बकौल चौधरी पेड़ों से फल मिलने से अधिक मुझे इनको हराभरा देखकर सुकून मिलता है.

बाड़मेर ( Barmer) जैसे रेतीले इलाके में एक रिटायर्ड अधिकारी ने अपनी मेहनत के बूते विपरीत जलवायु (Adverse climate) में भी फलों का बगीचा (Fruit garden) लगाकर सबको हैरत में डाल दिया है.

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बाड़मेर. पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान की सरहद (India-Pakistan border-) पर स्थित बाड़मेर का जिक्र आते ही जेहन में रेत के समंदर में टापू सरीखे नजर आने वाले इलाके की तस्वीर उभरती है. हर दूसरे साल सूखा और अकाल को देखने वाले इसे इलाके में भी हिम्मत और जज्बे से धरती को हरितमा (Greenery) की चुनरी ओढ़ाई जा सकती है. इसे साबित कर दिखाया है एक रिटायर्ड मेहनतकश अधिकारी ने. इस अधिकारी ने अपनी 10 साल की मेहनत से अपने घर में एक बगीचा (Garden) लगाया है. यह बगीचा आज सभी को हैरत में डाले हुए है. ये अधिकारी हैं सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी मूलाराम चौधरी.

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ऊंचे-ऊंचे पेड़ और वह भी फलों से लदकद
जिला मुख्यालय के बलदेव नगर में मूलाराम चौधरी ने अपने घर पर छोटा बगीचा तैयार किया है. चौधरी के इस बगीचे में जहां देखो वहां हरियाली ही हरियाली नजर आती है. ऊंचे-ऊंचे पेड़ और वह भी फलों से लदकद. मूलाराम चौधरी ने इस बगीचे को अपने पसीने से सींचा है. उन्होंने केवल खुद की मेहनत की बदौलत 10 साल में यह वाटिका तैयार की है. उन्होंने दस साल पहले बगीचे में फलदार पौधे लगाने शुरू किए थे. वे अब फलों से लदे नजर आ रहे हैं.
फलों के ये पेड़ महका रहे हैं मूलाराम के बगीचे को


मूलाराम ने दस साल पहले बगीचे में नींबू, मौसमी, नारंगी, अनार, थाई सेव, पपीता, शहतूत, सहजन, लीची, सीताफल, अंजीर, अंगूर और कागजी नींबू के पौधे लगाये थे. चौधरी ने दिनरात मेहनत कर इन पौधों की नेचर के विपरीत जलवायु, मिट्टी और पानी के यह वाटिका तैयार कर डाली. इसके अलावा अशोक, बेलपत्र, बिजोरा, तुलसी, इलायची और गिलोय सहित कई देशी पौधे भी लगाए हुए हैं. चौधरी ने बताया कि मूल रूप से किसान होने के कारण हमेशा खाली पड़ी जगह पर बगीचा लगाने के लिए खाली समय में काम किया है. दस साल की मेहनत करने के बाद अब फलदार पौधे तैयार हुए हैं. बकौल चौधरी पेड़ों से फल मिलने से अधिक मुझे इनको हराभरा देखकर सुकून मिलता है.

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घर के आगे लगा रखा है 25 फीट का कल्प वृक्ष
चौधरी के घर के आगे लगा 25 फीट का कल्प वृक्ष भी किसी सपने के हकीकत में बदलने सरीखा है. हर तरफ फलदार पेड़ों के बीच चौधरी घंटों इनकी सेवा में बिता देते हैं. लगातार दस बरसों तक चौधरी की इस वाटिका के लिए की गई मेहनत आज यहां साफ तौर पर देखने को मिल रही है.
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