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भारत-पाक युद्ध-1965 की अनसुनी दास्तां, 9 बार ब्लास्ट करके सेना ने ग्रामीणों को दिया ये तोहफा

सेना द्वारा ब्लास्ट करके बनाया गया तालाब।  फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
सेना द्वारा ब्लास्ट करके बनाया गया तालाब। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भी पश्चिमी राजस्थान के बॉर्डर पर ग्रामीण पूरी तरह से सेना के साथ जुटे हुए थे. इस दौरान ग्रामीणों की ओर से की गई मदद के बाद सेना ने ग्रामीणों को एक ऐसा तोहफा दिया जो आज तक हजारों लोगों और लाखों मवेशियों की प्यास बुझा रहा है.

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भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के इस दौर में भारत-पाक अतंरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के ग्रामीण, सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए हैं. भारतीय एयरफोर्स की ओर से पीओके में की गई एयर स्ट्राइक के बाद ग्रामीणों का जोश और जज्बा देखने लायक है. ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों में यह जोश और जज्बा अभी जागा है. यह पहले भी ऐसा ही था और आज भी ऐसा है.

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1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भी पश्चिमी राजस्थान के बॉर्डर पर ग्रामीण पूरी तरह से सेना के साथ जुटे हुए थे. इस दौरान ग्रामीणों की ओर से की गई मदद के बाद सेना ने ग्रामीणों को एक ऐसा तोहफा दिया जो आज तक हजारों लोगों और लाखों मवेशियों की प्यास बुझा रहा है. ग्रामीण आज भी सेना के इस तोहफ से अभिभूत हैं.



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सेना के कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था ग्रामीणों ने
दरअसल यह अनसुनी दास्तां है बाड़मेर जिले में भारत-पाक अंतररराष्ट्रीय सीमा से सटे तामलोर गांव की. तामलोर के ग्रामीणों ने 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान सेना के कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था. रेगिस्तानी इलाका होने के कारण सेना को रास्ता दिखाने से लेकर उनके लिए खाने पीने की खाद्य सामग्री भी अपने घरों से बनाकर उन तक पहुंचाते थे.

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ग्रामीणों के जोश से सेना हुई खुश
बकौल सरपंच हिंदू सिंह युद्ध के दौरान ग्रामीणों की देशभक्ति के जज्बे और जुनून को देखकर सेना खुश थी. सेना के अधिकारियों ने ग्रामीणों से पूछा कि वे उनके लिए क्या कर सकते हैं. चूंकि उस दौर में सीमावर्ती गांव में धोरों में दूर-दूर तक पानी का इंतजाम नहीं था. ग्रामीण खाल में भरकर पानी लाते थे. ग्रामीणों ने ईनाम के रूप में सेना से पानी का तालाब मांगा. गांव के आसपास जमीन पथरीली थी, लिहाजा वहां खुदाई बहुत मुश्किल थी. इस पर सेना ने नौ बार ब्लास्ट करके वहां तालाब के लिए खुदाई की. उसके बाद 54 वर्षों से ग्रामीण इसी तालाब का पानी पी रहे हैं.

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सरपंच हिंदू सिंह। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


10 गांव और बॉर्डर पर बीएसएफ के जवान पीते हैं इसका पानी
मानसून की बारिश में तालाब भर जाने से आसपास के 10 गांव और बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ के जवान सालभर इसका पानी पीते हैं. ट्रैक्टर और टंकियों के जरिए यहां से घरों और चौकियों तक पानी ले जाया जाता है. पिछले 2 साल से अकाल पड़ने के कारण वर्तमान में यह तालाब खाली पड़ा है. ग्रामीणों के अनुसार वे आज भी सेना के साथ दिल से खड़े हैं.

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