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बाड़मेर की लक्ष्मी चौधरी बनी असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रदेश में महिला वर्ग में रही टॉपर, पढें- सफलता की कहानी

राजस्थान में हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी विषय के परिणामों में बाड़मेर की लक्ष्मी चौधरी ने प्रदेश में टॉप किया है ...अधिक पढ़ें

    मनमोहन सेजू/बाड़मेर. कहते है कि अगर मन में कुछ बड़ा करने की ठान लो और शिद्दत से मेहनत करते रहो तो मंजिल मिल ही जाती है. ऐसा ही कुछ हुआ है बाड़मेर के छोटे से गांव की रहने वाली लक्ष्मी चौधरी के साथ. जिस समय बाड़मेर के ग्रामीण इलाकों में बालिका शिक्षा की बात बेमानी सी लगती थी तब अपने गांव से बाहर निकल कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली लक्ष्मी आज असिस्टेंट प्रोफेसर बनी है.

    भारत-पाक सीमा पर बसे सरहदी बाड़मेर जिले की बेटी ने एक बार फिर राज्य में परचम लहराया है. हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी विषय के परिणामो में बाड़मेर की लक्ष्मी चौधरी ने प्रदेश में टॉप किया है. अपनी आंखो में इस पद का सपना लिए जब लक्ष्मी ने अपने दूसरे प्रयास में ही इंटरव्यू क्लीयर किया तो उसके माता-पिता व परिवार के सभी लोग खुशी से फूले नही समा रहे है. इतना ही लक्ष्मी ने हिंदी विषय से प्रदेश में महिला वर्ग में टॉप किया है तो वहीं ऑल ओवर रैंक में 5वां स्थान हासिल किया है.

    …तो आसानी से पूरा होता है सपना
    भुरटिया गांव की रहने वाली लक्ष्मी का कहना है कि अगर कुछ करने का दृढ़ संकल्प मन मे ठान लो तो कोई भी विपदा का सामना आसानी से कर सफलता को पा ही लेते है. लक्ष्मी की शुरुआती शिक्षा आठवीं तक की पढ़ाई उसके गांव में हुई फिर उच्च शिक्षा के लिए वह बाड़मेर जिला मुख्यालय आ गई थी. अपने कृषक माता-पिता के हौसले की बदौलत उसने अपनी कॉलेज की तालीम नियमित विद्यार्थी के रूप मे की. लक्ष्मी जिस वक्त वह कॉलेज की तालीम ले रही थी तब वह इकलौती ऐसी विद्यार्थी थी जिसका परिवार तो गांव में रहता था और वह किराए का कमरा लेकर अपनी शिक्षा पूरी कर रही थी. कॉलेज की शिक्षा के दौरान ही कॉलेज लेक्चरर बनने का सपना उसने देखा और उसके लिए जुट गई. शादी के बाद पति रवि कुमार ने भी उनके सपने को साकार करने में मदद की और पहले असफल प्रयास ने उसे तोड़ा नही. उसने दूसरे प्रयास में अपनी पूरी मेहनत झोंक दी और महिला वर्ग में राज्य में पहला स्थान हासिल कर लिया.

    भाई के साथ जाती थीं स्कूल
    लक्ष्मी हिंदी साहित्य जैसे कठिन विषय में महारथ हासिल कर चुकी है. लक्ष्मी बचपन में भाई की अंगुली पकड़ कर गांव की स्कूल जाती थी तो शादी के बाद सांस ने उसके कांधे पर हाथ रखकर उसे आगे बढ़ने का हौसला दिया. आज जब लक्ष्मी को सफलता मिली है तो उसके घर राजस्थान गो सेवा आयोग के अध्यक्ष मेवाराम जैन समेत कई जन प्रतिनिधि और परिचित बधाई देने पहुंचे.

    अपने देशी परिधान और परिवेश के साथ NEWS18 LOCAL से बात करते हुए लक्ष्मी ने बताया कि एक असफलता से किसी भी इंसान को रुकना नही चाहिए. उस असफलता को हथियार बनाकर मंजिल की तरफ दुगुनी गति से बढ़ना चाहिए और यही हिम्मत सफलता को आपके कदमों में लाकर रख देगी. लक्ष्मी की सफलता और उसके सफरनामे से आज बाड़मेर का हर बाशिंदा कायल नजर आ रहा है.

    Tags: Barmer news, Rajasthan news

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