बाड़मेर बॉर्डर से LIVE : सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाने को तैयार हैं ग्रामीण

गडरा गांव में मौजूद ग्रामीण। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

गडरा गांव में मौजूद ग्रामीण। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बावजूद भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों के हालात बिल्कुल सामान्य नजर आ रहे हैं. सेना के शौर्य के दम पर ग्रामीण उत्साह से लबरेज हैं.

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भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बावजूद भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों के हालात बिल्कुल सामान्य नजर आ रहे हैं. सेना के शौर्य के दम पर ग्रामीण उत्साह से लबरेज हैं. वे अपने रोजमर्रा के कामकाज में व्यस्त हैं. युद्ध की बात करने पर वे सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए तैयार बैठे हैं.

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पाकिस्तान से महज दो किलोमीटर दूरी पर स्थित बाड़मेर जिले के गडरा गांव के लोग जरूरत पड़ने पर दुश्मनों से दो-दो हाथ करने को भी तैयार हैं. हालांकि भारत-पाक के मध्य तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इस क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर रखा है, लेकिन उसके बावजूद ग्रामीणों के चेहरों पर कई कोई खौफ नहीं है. इस गांव में कुछ ग्रामीण ऐसे भी हैं जो 1971 कि लड़ाई में हालात का सामना कर चुके हैं.



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1971 की लड़ाई में हालात का सामना कर चुके हैं यहां के लोग

ग्रामीण कमालदीन 1971 की लड़ाई में हालात का सामना कर चुके हैं. पुरानी यादों को दोहराते हुए कमालदीन कहते हैं कि उस समय अचानक लड़ाई शुरू हो गई थी. तब कुछ भी समझ में नहीं आया था. अचानक सेना ने पूरा गांव खाली करवा दिया. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. यहां अब सब लोगों को पता है कि युद्ध के हालात क्या करना है. वे इसको समझते हैं. वो कहते हैं जरूरत पड़ने पर सेना के साथ मिलकर दुश्मनों का खात्मा करेंगे.

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1971 में रेगिस्तानी इलाकों में रहना पड़ा था

गांव में छोटी सी दुकान पर बैठे प्रतापाराम व गुलेचराम ने भी पुरानी यादों को साझा किया. उन्होंने कहा कि 1971 की लड़ाई में गांव को छोड़कर रेगिस्तानी इलाकों में रहना पड़ा था. करीब सात दिन तक रेतीले धोरों में रहने के बाद वापस गांव आए थे. लेकन आज हालात बदले हुए हैं. ग्रामीण सेना के साथ मिलकर दुश्मनों को जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं.

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