बाड़मेर: रेप की शिकार नाबालिग ने बाल संरक्षण आयोग से मांगा इंसाफ, लगाई न्याय की गुहार

आयोग ने पुलिस से रिपोर्ट मांगा है.
आयोग ने पुलिस से रिपोर्ट मांगा है.

पीड़िता का कहना है कि इस मामले की शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों से भी की गई थी. राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने भी मामले फौरन कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. 

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PREM DAN

बाड़मेर. राजस्थान के सरहदी बाड़मेर में मई महीने में बीजराड़ थाना क्षेत्र में एक दलित नाबालिग मासूम के साथ हुए बलात्कार (Minor Girl Rape) के मामले में अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर पीड़िता गुरुवार को राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल से मिली. मामले के 5 महीने बीत जाने के बावजूद आरोपी के खुले में घूमने और उसकी गिरफ्तारी नहीं होने पर बेनीवाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग ली है. गुरुवार को जयपुर से सरहदी बाड़मेर में बलात्कार पीड़िता और उनके परिजनों से मिलने पहुंची राजस्थान राज्य बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल के सामने उस वक़्त मामला विकट हो गया जब 5 महीने पहले बलात्कार का शिकार हुई दलित नाबालिग मासूम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिए.

बलात्कार की घटना के बाद बाड़मेर पुलिस अधीक्षक से लेकर, जोधपुर रेंज आईजी नवज्योति गोगाई, संभागीय आयुक्त डॉक्टर समित शर्मा तक से अपने दर्द का इज़हार कर चुकी पीड़िता ने बड़ी बेबाकी से बेनीवाल के सामने अपनी बात रखी. पीड़िता के मुताबित, घटना के बाद से उसका स्कूल छूट गया और उसे और उसके घरवालों को धमकियां भी दी जा रही हैं. लेकिन अभी तक आरोपी खुले में घूम रहा है. पीड़िता ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट उसके मामले में त्वरित कार्रवाई करने के आदेश बाड़मेर पुलिस को दे चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ.



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बाल सरंक्षण अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

सरहदी बाड़मेर की इस मासूम के साथ हुई दरिंदगी को लेकर राजस्थान राज्य बाल सरंक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल का कहना है कि मामले पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए सख्ताई से कहा जा रहा है. बाड़मेर पुलिस से मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग ली गई है. बहरहाल तीन दिन पहले हुए मासूम के साथ बलात्कार के मामले में पीड़िता और उनके परिजनों से मिलने पहुंची बेनीवाल के सामने एक और पीड़िता के आने से एक बारगी स्थिती "काटो तो खून नहीं" वाली हो गई. वहीं मामले को बेनीवाल ने संभालने की कोशिश तो की, लेकिन पीड़िता का 5 महीने से लंबित न्याय कब मिलेगा यह जरूर देखने वाली बात रहेगी.
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