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Barmer: 1400 फीट की ऊंचाई पर विराजमान हैं माता जगतंबा, नवरात्र में उमड़ते हैं भक्त

सरहदी बाड़मेर जिले में 473 साल से स्थापित गढ़ जोगमाया मंदिर के किस्से अनूठे हैं. पाकिस्तान के नापाक इरादों को ध्वस्त करने ...अधिक पढ़ें

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मनमोहन सेजू

बाड़मेर. वर्ष 1965 और 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई लड़ाई के कई किस्से आपने सुने होंगे, लेकिन राजस्थान के सरहदी बाड़मेर में 473 साल से स्थापित गढ़ जोगमाया मंदिर के किस्से अनूठे हैं. पाकिस्तान के नापाक इरादों को ध्वस्त करने के लिए बाड़मेर में एक ऐसी शक्ति का हाथ था जिसके चरणों मे जाने के बाद हर इंसान अपने आपको सुरक्षित महसूस करता था. लगभग 1400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना जगतंबा माता मंदिर आज भी लोगों के आस्था का केंद्र बना हुआ है.

भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बाड़मेर का सबसे पुराना जोगमायागढ़ मंदिर लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है. माता के दर्शन के लिए नवरात्र के दौरान हजारों लोग यहां मत्था टेकने आते है. बाड़मेर शहर की स्थापना गढ़ मंदिर की स्थापना के बाद हुई थी. 16वीं शताब्दी में रावत भीमाजी ने बाड़मेर की ऊंची पहाड़ी पर जोगमायागढ़ मंदिर और उससे थोड़ा नीचे नागनेचिया माता के मंदिर की स्थापना की थी.

इस मंदिर में विराजित मां जगतम्बा के चमत्कार का अहसास उस वक्त हुआ जब वर्ष 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान लोग अपनी जान बचाने के लिए मंदिर की सीढ़ियों पर जाकर सो जाते थे. लड़ाई के दौरान पाकिस्तान ने बमबारी करने में कोई कसर नही छोड़ी थी, लेकिन यहां रहने वाले किसी भी व्यक्ति का बाल भी बांका नहीं हुआ था. उस समय से आस्था का केंद्र बना यह मंदिर लाखों भक्तों के लिए असीम शक्ति का रूप है. भक्त मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने से पहले राठौड़ वंश की कुलदेवी नागणेची माता मंदिर में भी धोक लगाते है.

गढ़ मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी बताते हैं कि पहले जूना बाड़मेर में इस मंदिर की स्थापना की गई थी, लेकिन उसके बाद राव भीमाजी ने माताजी की मूर्ति को करीब 1400 फीट ऊंचाई पर पहाड़ी में स्थापित किया. यह ऐसी पहाड़ी थी जिस पर कोई भी सीधी चढ़ाई नहीं कर सकता था. साल 1965 और 1971 की लड़ाई में दुश्मन पाकिस्तान की ओर से की गई बमबारी का असर इस पहाड़ी पर नहीं हुआ.

जोगमायागढ़ मंदिर ट्रस्ट के व्यवस्थापक गोरधन सिंह बताते है कि 473 साल पहले स्थापित हुए इस मंदिर में करीब 500 सीढियां हैं. शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी पर इसको स्थापित किया गया है. बाड़मेर-जैसलमेर के बीच युद्ध हुआ था तब उस समय बारूद की जगह चांदी को काटकर छर्रे बनाए गए और दुश्मनों पर दागे गए थे.

बहरहाल शारदीय नवरात्र में इस मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था देखने को मिलती है. भक्त माता के दर्शन के लिए तड़के चार बजे से ही कतारों में लगकर माताजी के चरणों मे शीश नवाजते है. नवरात्र के नौ दिन तक हज़ारों भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं.

Tags: Barmer news, India pakistan war, Navratri Celebration, Rajasthan news in hindi

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