Home /News /rajasthan /

लोगों ने कहा 'पत्थर', पेट्रो केमिकल इंजीनियर बन उसी बेटी ने रचा इतिहास, MNC में 28 लाख का पैकेज

लोगों ने कहा 'पत्थर', पेट्रो केमिकल इंजीनियर बन उसी बेटी ने रचा इतिहास, MNC में 28 लाख का पैकेज


Barmer News: दलित समुदाय की बेटी रचना लीलड़ ने पेट्रो केमिकल में इंजीनियर बनकर नया मुकाम हासिल कर लिया है.

Barmer News: दलित समुदाय की बेटी रचना लीलड़ ने पेट्रो केमिकल में इंजीनियर बनकर नया मुकाम हासिल कर लिया है.

Rajasthan News: दलित समुदाय की बेटी रचना लीलड़ (Rachna Lilar) ने पेट्रो केमिकल में इंजीनियर बनकर नया मुकाम हासिल कर लिया है. आज वह गुजरात के पोरबंदर में लाखों के पैकेज पर काम कर रही है. रचना की शुरुआती तालीम अपने गांव आटी में ही हुई. वह बताती हैं  कि माना कि मुश्किलें बहुत थी लेकिन अगर ठान लो तो सब कुछ किया जा सकता है. रचना 28 लाख की आबादी वाले बाड़मेर की पहली पेट्रो केमिकल इंजीनियर है. इतना ही नहीं रचना आज वेदांता केयर्न में 28 लाख के पैकेज पर गुजरात के पोरबंदर में काम कर रही है. 

अधिक पढ़ें ...

बाड़मेर. ‘कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…’ कहते हैं कि प्रतिभा कभी मुश्किलों में खुद के वजूद को खत्म नहीं करती. वह तमाम मुश्किलों को पार कर के सफलता का पताका फहरा ही देती है. आज हम आपको एक ऐसी ही शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने पूरे राजस्थान (Rajasthan News) का नाम गौरवान्वित किया है. ये सफलता की कहानी है सरहदी बाड़मेर के एक छोटे से गांव की एक दलित बेटी रचना लीलड़  (Rachna Lilar) की. राजस्थान की इस बेटी ने बाड़मेर की पहली पेट्रो केमिकल इंजीनियर बनकर ना केवल इतिहास रच दिया है. अंतराष्ट्रीय कंपनी में लाखों के पैकेज पर काम करके मिसाल बन चुकी है.

भारत पाकिस्तान की सीमा पर बसे सरहदी बाड़मेर के पास एक छोटा सा गांव है आटी. यहां की रहने वाली रचना लीलड़ के चर्चे आज हर जगह है. रचना  28 लाख की आबादी वाले बाड़मेर की पहली पेट्रो केमिकल इंजीनियर है. इतना ही नहीं रचना आज वेदांता केयर्न में 28 लाख के पैकेज पर गुजरात के पोरबंदर में काम कर रही है. रचना लीलड़ की मां  बताती हैं  कि जब वह पैदा हुई थी तब लोगो ने कहा था कि घर मे पत्थर पैदा हुआ है लेकिन तब उन्होंने ठान लिया कि इस बेटी को वह पढ़ा लिखा कर मील का पत्थर बनाएगी और आज वह बात हकीकत बन चुकी है.

बरसों तलक दबी कुचली कही जाने वाली दलित समुदाय की रचना लीलड़ की शुरुआती तालीम अपने गांव आटी में ही हुई. आठवीं के बाद में स्कूल नहीं होने की वजह से उसने अकेले ही 20 किलोमीटर दूर बाड़मेर जिला मुख्यालय पर रोज आना जाना किया. कुछ कर देने के जुनून की वजह से वह इंजीनियरिंग में आई और कैपस इंटरव्यू में ही सलेक्ट कर ली गई. रचना लीलड़ बताती हैं कि माना कि मुश्किलें बहुत थी लेकिन अगर ठान लो तो सब कुछ किया जा सकता है.आज पोरबंदर में लाखों के पैकेज पर काम कर बाड़मेर का गौरव बढ़ाया है.

इस दलित बेटी रचना लीलड़ के चर्चे है, हो भी क्यों नही जिस जगह पर आज भी बेटियों के जन्म पर पत्थर पैदा हुआ कहा जाता है वहां की बेटी कि सफलता की यह प्राचीर लाखों के लिए नई राह दिखाने वाला है.

Tags: Barmer news, Rajasthan news

विज्ञापन
विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर