सरहदी जिले में तैनात ये RPS अधिकारी 2 बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हो चुके हैं, यहां पढ़ें पूरी कहानी

Premdan Detha | News18 Rajasthan
Updated: August 20, 2019, 1:54 PM IST
सरहदी जिले में तैनात ये RPS अधिकारी 2 बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हो चुके हैं, यहां पढ़ें पूरी कहानी
आरपीएस खींव सिंह भाटी। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को पा सकता है. इसका जीता जागता है उदाहरण है भारत-पाकिस्तान बॉर्डर (India-Pakistan border) पर स्थित रेतीले धोरों की धरती बाड़मेर (Barmer) में पद स्थापित राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) के सेवा वरिष्ठ अधिकारी खींव सिंह भाटी.

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कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को पा सकता है. इसका जीता जागता है उदाहरण है भारत-पाकिस्तान बॉर्डर (India-Pakistan border) पर स्थित रेतीले धोरों की धरती बाड़मेर (Barmer) में पद स्थापित राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) के सेवा वरिष्ठ अधिकारी खींव सिंह भाटी. बाड़मेर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात भाटी को हाल ही में 15 अगस्त को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है. भाटी को उनके 37 साल के सर्विसकाल में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से 200 से ज्यादा बार सम्मानित किया जा चुका है.

बॉर्डर से नौकरी शुरू की और अब भी बॉर्डर पर ही तैनाती
खींव सिंह भाटी ने 10 जनवरी, 1983 को राजस्थान पुलिस में बतौर उप निरीक्षक नौकरी ज्वॉइन की थी. इसके साथ ही उन्हें भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित श्रीगंगानगर जिले में नियुक्ति मिली. उस समय पाकिस्तान से सटे गंगानगर के बीच में कोई तारबंदी ही नहीं थी. आतंकवाद चरम पर था. भाटी बताते हैं कि उन्हें शुरू से ही चुनौती लेना पसंद था. श्रीगंगानगर में तैनाती के दौरान 19 आतंकवादियों और 5 पाकिस्तानी जासूसों को गिरफ्तार किया. कई एके-47 राइफलें, रॉकेट लॉंचर और हैंड ग्रेनेड सहित अन्य हथियार पकड़े.

2005 में भी राष्ट्रपति की ओर से सराहनीय सेवा मेडल मिल चुका है

अपनी कार्यशैली से चलते भाटी लगातार पदोन्नत होकर 30 जुलाई, 2000 को पुलिस उपाधीक्षक बने. भाटी के उत्कृष्ट कार्यों के लिए 15 अगस्त, 2005 को राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से सराहनीय सेवा मेडल प्रदान किया गया. इस बार उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है. बकौल भाटी छोटी सी उम्र में उनके पिता चले गए थे. वे अपनी बुआ के घर पर रहे. फूफाजी पुलिस में थानेदार थे. उन्हीं को उन्होंने आदर्श मानकर पुलिस सेवा को ज्वॉइन किया.

कई बार मिली धमकियां
भाटी बताते हैं कि श्रीगंगानगर में सर्विसकाल के दौरान आतंकवादी गुटों की ओर से कई बार उन्हें और परिवार को जान से मारने की धमकियां मिली. लेकिन उन पर हमेशा ईश्वर की कृपा रही. बकौल भाटी प्रत्येक पुलिसकर्मी को अपनी ड्यूटी बड़ी ईमानदारी से करनी चाहिए। इसके लिए उसे जनता में अपनी गहरी पैठ जमानी चाहिए. किसी भी काम को अंजाम देने के लिए पूरी प्लानिंग होनी चाहिए.
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First published: August 20, 2019, 1:35 PM IST
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