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Success Story: इलाज के अभाव में बचपन में पिता को खो चुका बाड़मेर का हंसाराम अब बनेगा डॉक्टर

Success Story: इलाज के अभाव में बचपन में पिता को खो चुका बाड़मेर का हंसाराम अब बनेगा डॉक्टर

कमजोर आर्थिक हालात के चलते पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की वजह से हंसाराम के पिता की मौत हो गई थी.

कमजोर आर्थिक हालात के चलते पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की वजह से हंसाराम के पिता की मौत हो गई थी.

Hansaram Success Story : बाड़मेर के हंसाराम ने अपने दोस्त के सब्सक्रिप्शन से ऑनलाइन प्रैक्टिस टेस्ट देकर इस बार NEET क्रैक किया है. हंसाराम ने पिछली बार भी नीट एग्जाम अच्छे नंबरों से क्लियर कर लिया था. लेकिन उसका दाखिला सरकारी मेडिकल कॉलेज में नहीं हो पाया. पैसे के अभाव में प्राइवेट कॉलेज में वह जा नहीं सका था. उसने फिर जबर्दस्त मेहनत की और इस बार अच्छी रैंक मिली. अब उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जायेगा.

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बाड़मेर. कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो बाधाएं कभी भी आड़े नहीं आती है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बाड़मेर के समदड़ी के हंसाराम (Hansaram) ने. दोस्तों की किताबें लेकर पढ़ाई करके सफलता हासिल करने की कहानियां आम बात है, लेकिन कोविड ने अब इस ट्रेंड को भी बदलकर रख दिया है. समदड़ी के उन्डेरिया बेरा के हंसाराम ने दोस्त के भी दोस्त के सब्सक्रिप्शन का उपयोग कर इस साल मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट क्रैक (NEET) किया है.

घर की आर्थिक हालात सही नहीं होने के कारण हंसाराम प्रैक्टिस के लिए ऑनलाइन टेस्ट सीरिज के लिए सब्सक्रिप्शन नहीं ले पा रहा था. उसके दोस्त ने अपने दोस्त का आईडी पासवर्ड उसे दे दिया. इससे हंसाराम ने टेस्ट पेपर की प्रैक्टिस की. इसी वजह से हंसाराम ने नीट 2021 में 720 में से 627 अंक हासिल किए हैं. उसे अब गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज मिलना लगभग तय है.

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पिछले साल 720 में से 595 अंक हासिल किए थे
हंसाराम ने पिछले साल 720 में से 595 अंक हासिल किए थे. हंसाराम को पिछली बार महज दस नंबर कम होने की वजह से गवर्नमेंट कॉलेज नहीं मिल पाया था. परिवार के कमजोर आर्थिक हालात के कारण हंसाराम प्राइवेट कॉलेज की फीस भरने में सक्षम नहीं था. इस कारण उसने इस साल फिर से नीट रिपीट किया है. हंसाराम के पिता भीमाराम का निधन साल 2013 में ही हो गया था. उन्हें किडनी में समस्या थी.
चिकित्सा के अभाव में हो गई थी पिता की मौत
चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की वजह से हंसाराम के पिता की मौत हो गई. बड़े भाई दिव्यांग और बेरोजगार हैं. मां मथुरा देवी की उम्र 62 वर्ष हो चुकी है. वे पहले मनरेगा मजदूरी करती थीं. नीट क्लियर करने वाले हंसाराम बताते हैं कि कोविड काल में ऑनलाइन क्लासेज ही चल रही थीं. उनके एक दोस्त के परिचित ने ऑनलाइन टेस्ट सीरिज में रजिस्ट्रेशन तो करवा लिया था लेकिन पढ़ाई करना छोड़ दिया था. उसने अपना लॉगिन और पासवर्ड दे दिया और उसी से सालभर तैयारी की और प्रैक्टिस टेस्ट दिए.

सफलता का श्रेय अपने मामा को दिया
आखिरकार सफलता हंसाराम के कदम चूमने आ ही गई. हंसाराम अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मामा ओलाराम चौधरी को देते हैं. आज हंसाराम की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अभाव कभी भी प्रतिभा के पंख नही रोक सकता. कुछ करने का जुनून हो तो कोई ना कोई माध्यम उसे सफलता का ताज पहना ही देता है.

Tags: Job and career, NEET, Rajasthan latest news, Rajasthan News Update

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