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Surgical strike 2.0: बाड़मेर बॉर्डर इलाके में गांवों की चौपाल तक छाया हुआ है ये मुद्दा

भारत-पाक सीमा से सटे बाड़मेर जिले के एक गांव में चौपाल.
भारत-पाक सीमा से सटे बाड़मेर जिले के एक गांव में चौपाल.

भारत-पाक सीमा से सटे बाड़मेर जिले के एक गांव में लोग भारत पाकिस्तान युद्ध और वर्तमान स्थिति पर एकजुट हो गए हैं. गांवों की चौपाल पर एक ही मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ, वो है पाकिस्तान को सबक सिखाना.

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भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है और इस बीच पश्चिमी राजस्थान के बॉर्डर इलाके पर भी हलचल तेज हो गई है. भारत-पाक सीमा से सटे बाड़मेर जिले के एक गांव में लोग भारत पाकिस्तान युद्ध और वर्तमान स्थिति पर एकजुट हो गए हैं. गांवों की चौपाल पर एक ही मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ, वो है पाकिस्तान को सबक सिखाना. लोगों का कहना है कि हमने इससे पहले 1965 और 1971 की लड़ाई देखी है, इस दौरान हमने सेना की पूरी मदद की थी और पाकिस्तान को धूल चटाई थी. अब फिर से ऐसा मौका आया है जिसमें पाक को सबक सिखाना जरूरी है.

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ग्रामीणों का कहना है कि आज जो सेना ने एयर स्ट्राइक की है उसके बाद हमें इस बात की खुशी है कि मोदी ने पाकिस्तान को टारगेट किया है और आतंकवादियों को मारने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया है. पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में उनका कहना है कि बॉर्डर के इलाकों के गांव के लोग हमेशा सतर्क हैं और किसी भी स्थिति में निपटने के लिए तैयार हैं. जब भी युद्ध जैसी स्थिति होती है तो सबसे पहले गांव वाले ही सेना की मदद करते हैं. हमें इस बात की खुशी है कि जरूरत पड़ने पर हम अब भी सेना के मदद को हरदम तैयार हैं.



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1971 में पाकिस्तान ने हमला किया था, हमारा गांव पूरा चौकस हो गया. हमने सेना का पूरा साथ दिया, सेना के साथ हमारे गांव के लोग भी बॉर्डर पर लड़ने चले गए थे.
पृथ्वी सिंह, बॉर्डर निवासी


बॉर्डर पर चले तनाव के बीच पश्चिमी राजस्थान बॉर्डर के गांव के लोग अपनी जिंदगी आम दिनों की तरह ही जी रहे है रहे हैं लेकिन कुछ खास है तो उनका जोश जो देखते ही बन रहा है. हर कोई इस बात से खुश है कि हमने पाकिस्तान के घर में घुसकर उनके ऊपर एयर स्ट्राइक की.

हमारा पूरा गांव सेना के लिए इस लड़ाई में उनके साथ है. हमें हमारी सेना और सरकार दोनों पर पूरा भरोसा है. एकबार फिर दुश्मन को धूल चटा देंगे.
खंगार सिंह, बॉर्डर निवासी

हमारे पीएम ने बहुत अच्छा काम किया है. हम भी सरकार, फौज के साथ हैं. युद्ध हुआ तो सेना की हर संभव मदद के लिए तैयार हैं.
हिंदू सिंह, बॉर्डर निवासी


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बॉर्डर पर गांव के लोगों का कहना है कि हमने इससे पहले भी 1965 और 1971 की लड़ाई देखी हैं. उस समय भी हमने अपनी सेना का पूरा साथ दिया था. सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पाकिस्तान को धूल चटाई थी. आज अगर फिर से जंग होती है तो हम हर मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार हैं. गांव के हर शख्स का यही कहना है कि पाकिस्तान को मूंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना सक्षम है.

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