आज का श्रवण कुमार: बूढ़ी मां को हाथ ठेले पर करा रहा है 220 KM की तीर्थयात्रा

Premdan Detha | News18 Rajasthan
Updated: September 3, 2019, 7:24 PM IST
आज का श्रवण कुमार: बूढ़ी मां को हाथ ठेले पर करा रहा है 220 KM की तीर्थयात्रा
कलयुग में भी श्रवण जैसा बेटा पैदा होता है. यह साबित कर दिखाया राजस्थान के बाड़मेर जिले के छोटू गांव के खुमाराम नाई ने. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

कलयुग में भी श्रवण (Shravan ) जैसा बेटा पैदा होता है. यह साबित कर दिखाया राजस्थान (Rajasthan) के बाड़मेर जिले (Barmer) के छोटू गांव के खुमाराम नाई ने. खुमाराम अपनी 85 वर्षीय दिव्यांग मां (Divyang mother) को उसकी रामदेवरा (Ramdevra) की पैदल यात्रा की इच्छा पूरी करने के लिए उसे हाथ ठेले (Hand cart) में लिटाकर घर से रवाना हो गया.

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आज के युग में भी श्रवण कुमार (Shravan Kumar) जैसा बेटा पैदा होता है. यह साबित कर दिखाया राजस्थान (Rajasthan) के बाड़मेर जिले (Barmer) के छोटू गांव के खुमाराम नाई ने. खुमाराम अपनी 85 वर्षीय दिव्यांग मां (Divyang mother) को उसकी रामदेवरा (Ramdevra) की पैदल यात्रा की इच्छा पूरी करने के लिए उसे हाथ ठेले (Hand cart) में लिटाकर घर से रवाना हो गया. गांव से करीब 220 किलोमीटर दूरी पर स्थित रामदेवरा के लिए मां को ठेले पर लिटाकर निकला खुमाराम नाई गत पांच दिन में आधी दूरी पूरी कर चुका है.

12 वर्ष की आयु में ही चली गई थी आंखों की रोशनी
यह कहानी है गुड़ामालानी जिले के छोटू गांव के खुमाराम नाई की. खुमाराम के पिता सोनाराम समाज के जाने माने पंच थे. उनका अगरीदेवी से बाल विवाह हो गया था. अगरीदेवी की आंखों की रोशनी 12 वर्ष की आयु में किसी बीमारी के कारण चली गई थी. सोनाराम और अगरी देवी के 3 लड़के और एक लड़की कुल 4 संतानें हुई. अगरीदेवी ने आंखें नहीं होते हुए भी चारों बच्चों का लालन पालन अच्छे से किया.




This is the modern shravan son-यह है आधुनिक श्रवण बेटा
अगरीदेवी की आंख की रोशनी 12 वर्ष की आयु में किसी बीमारी के कारण चली गई थी.फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


मां ने पदयात्रा की इच्छा जताई तो बेटे ने उसे पूरा करने की ठानी
गत करीब 30 साल पहले अगरी देवी की तबीयत खराब हो गई और बीमार रहने लगी. पिछले साल से उन्होंने खाना पीना भी छोड़ दिया. एक दिन रात को अगरीदेवी ने कहा कि अगर वह पैदल रामदेवरा जाए तो ठीक हो जाएगी. तब खुमाराम ने कहा कि मां तुम 85 साल की हो. देख भी नहीं सकती हो. ऐसे में तुम पैदल नहीं चल पाओगी. इस पर खुमाराम ने बाबा रामदेव से मन्नत मांगी की कि अगर मां ठीक हो गई तो वह उसे हाथ ठेले पर ले जाकर रामदेवरा दर्शन करवाएगा.

This is the modern shravan son-यह है आधुनिक श्रवण बेटा
खुमाराम ने बाबा रामदेव से मन्नत मांगी की कि अगर मां ठीक हो गई तो वह उसे हाथ ठेले पर ले जाकर रामदेवरा दर्शन करवाएगा.

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अगरीदेवी ठीक हुई तो बेटा चल पड़ा मां को लेकर
कुछ समय बाद अगरी देवी की तबीयत में कुछ सुधार हुआ. उसे भूख भी लगने लगी तो खुमाराम ने मां की इच्छा पूरी करने की ठान ली. उसने 5 दिन पहले मां अगरीदेवी को हाथ ठेले में लिटाया और रामदेवरा के लिए निकल पड़ा.

5 दिनों में आधी दूरी तय की
इन 5 दिनों में खुमाराम लगातार रामदेवरा की ओर बढ़ रहा है. अब तक वह करीब आधा सफर तय कर चुका है. इस दौरान कई बार बारिश आई. कई बार हाथ ठेला खराब हुआ, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी. वह मां की इच्छा को पूरा करने के लिए लगातार चलता जा रहा है.

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First published: September 3, 2019, 6:42 PM IST
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