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1971 War Memory: पाकिस्तान पर जीत की 50वीं वर्षगांठ, बाड़मेर में विजय मशाल के पहुंचते ही लगे जय हिंद के जयकारे

पाकिस्तान पर स्वर्णिम विजय की 50वीं वर्षगांठ, विजय मशाल बाड़मेर पहुंची

पाकिस्तान पर स्वर्णिम विजय की 50वीं वर्षगांठ, विजय मशाल बाड़मेर पहुंची

Vijay Mashal Yatra : भारत-पाक के युद्ध में भारत की स्वर्णिम विजय की 50वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए शुरू की गई विजय मशाल सरहद के अंतिम छोर पर बसे बाड़मेर पहुंची. 16 दिसम्बर 2020 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से 4 मशाल देश के अलग-अलग इलाकों के लिए निकली है.

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बाड़मेर. वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भारत की स्वर्णिम विजय की 50वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए शुरू की गई विजय मशाल सरहद के अंतिम छोर पर बसे बाड़मेर पहुंची. इस गौरवशाली यात्रा के बाड़मेर पहुंचने पर सेना, सीमा सुरक्षा बल और बाड़मेर प्रशासन की तरफ से इसका भव्य स्वागत किया गया. दिल्ली से रवाना हुई पश्चिमी विजय मशाल यात्रा पश्चिमी राजस्थान के 14 और गुजरात के 33 जिलों से होते हुए दक्षिण राज्यों में प्रवेश करेगी.

भारत-पाकिस्तान सीमा के अंतिम छोर पर बसे सरहदी बाड़मेर जिला मुख्यालय के अहिंसा सर्किल पर भारतमाता के जयकारों के बीच पश्चिम विजय मशाल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया. इस वर्ष 1971 के युद्ध में भारत की शानदार जीत की 50वीं वर्षगांठ है.

भारत माता के जयकारों से सैकड़ों लोगों ने किया स्वागत
इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए, भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 2021 को 'स्वर्णिम विजय वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है. बाड़मेर जिला मुख्यालय पर शहीद चौराहे पर जब बोगरा ब्रिगेड के मुख्यालय से विजय मशाल पहुंची तो सैकड़ों लोगों ने भारत माता के जयकारों से आसमान गुंजायमान कर दिया. इस यात्रा के जरिये युवाओं में देशभक्ति और सेना से जुड़ने का जज्बा और भी मजबूत होता नजर आया.

यात्रा से देशवासियों में नव ऊर्जा का संचार होगा
शहीद सर्किल पर आयोजित इस खास कार्यक्रम में बीएसएफ डीआईजी विनीत कुमार,बाड़मेर जिला कलेक्टर लोकबंधु यादव, रावत त्रिभुवन सिंह ने शहीद सर्किल पर पुष्प चक्र अर्पित किए। बीएसएफ डीआईजी विनीत कुमार के मुताबिक इस तरह के आयोजन युवाओं और देशवासियों में नव ऊर्जा का संचार करते हैं. यह यात्रा हमें उस गौरवशाली इतिहास को करीब से जानने का मौका देती है, जब भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करके नए देश की नींव रखी थी.

विजय मशाल यात्रा से युवाओं को मिलेगी प्रेरणा
भारतीय सेना की ओर से बाड़मेर के धोरों में दिखाई गई वीरता के तराने आज भी फिजां में गूंजते हैं. बाड़मेर पहुंची विजय मशाल यात्रा की अगुवाई टीम थार के वीर द्वारा की गई. टीम थार के वीर के संरक्षक रावल त्रिभुवन सिंह के मुताबिक बीएसएफ, सेना की धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ियों को इससे प्रेरणा मिलेगी. यहां के शहीदों द्वारा दिखाए गए पराक्रम की वजह से सरहदी बाड़मेर हमेशा शहीदों को याद करता रहेगा. इस अवसर पर रावत त्रिभुवन सिंह ने विजय मशाल को देश के लिए गौरव का पल बताया. उनके मुताबिक यह मशाल लोगों में नई ऊर्जा के साथ-साथ नया जोश भरेगी.

बाड़मेर की अहम भूमिका रही थी 71 के युद्ध में
सरहदी बाड़मेर की 1971 के युद्ध में अहम भूमिका रही थी. इस युद्ध मे उतरी कमान में लड़े गए बैटल ऑफ बसन्तर की कमान बाड़मेर के वीर जांबाज लेफ्टिनेंट जनरल और महावीर चक्र विजेता हणुत सिंह के हाथों में थी. गौरतलब है कि जाट रेजिमेंट द्वारा विजय मशाल दिल्ली से शुरू की गई है. आपको बता दे कि 16 दिसम्बर 2020 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से 4 मशाल देश के अलग अलग इलाकों के लिए निकली है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विजय मशाल को रवाना किया था, जो कि शनिवार को बाड़मेर पहुँची.

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