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Vijayadashami 2022: शस्त्र पूजन की वर्षों पुरानी परंपरा निभा रहा बाड़मेर राजघराना, धूमधाम से हुई पूजा

Vijayadashami 2022: बाड़मेर में राजघराने की ओर से रावल त्रिभुवन सिंह ने बाड़मेर के सैकड़ों लोगों के साथ माता नागणेची मंदि ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- मनमोहन सेजू

बाड़मेर. भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे सरहदी बाड़मेर में दशहरे के मौके पर राजघराना शस्त्र पूजन की हजारों वर्षों पुरानी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं. आज विजयादशमी के अवसर पर राजस्थान में कई राजघरानों ने मंदिरों में सैकड़ो लोगों के साथ अस्त्र-शस्त्र पूजा की. इस दौरान रावल त्रिभुवन सिंह ने बाड़मेर के सैकड़ों लोगों के साथ माता नागणेची मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच परंपरागत ढंग से शस्त्र पूजा की. अपने घरों से शस्त्र और अस्त्र लेकर बाड़मेर फोर्ट पहुंचे लोगों ने केसरिया साफे और हाथ में तलवार, बंदूक और अन्य अस्त्र-शस्त्र लेकर मां की आराधना करते हुए जिले और देश के खुशहाली की कामना की.

बता दें कि देश भर में दशहरे के मौके पर अलग-अलग आयोजनों के जरिए शक्ति और शस्त्र की उपासना की जाती है. वहीं, सरहदी बाड़मेर में राजघराने शस्त्र पूजन की अपनी पुरानी परंपरा को विजय दशमी के दिन निर्वहन करते है. इस बार भी बरसों से अपनी क्षत्रिय कुल की परंपरा को जिंदा रखने के साथ साथ इसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से भव्य शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया.

सनातन परंपरा में शस्त्र और शास्त्र दोनों का बहुत महत्व है. शास्त्र की रक्षा और आत्मरक्षा के लिए धर्मसम्म्त तरीके से शस्त्र का प्रयोग होता रहा है. प्राचीनकाल में क्षत्रिय शत्रुओं पर विजय की कामना लिए इसी दिन का चुनाव युद्ध के लिए किया करते थे. पूर्व की भांति आज भी शस्त्र पूजन की परंपरा कायम है और देश की तमाम रियासतों और शासकीय शस्त्रागारों में आज भी शस्त्र पूजा बड़ी धूमधाम के साथ की जाती है. केसरिया साफा और हाथ में तलवार और बंदूक लेकर मां की आराधना के बाद विजयादशमी पर पथ प्रेरणा पदयात्रा निकाली गई. इस अवसर पर रावल त्रिभुवन सिंह ने कहा कि शस्त्र समाज के रक्षक होते हैं और इसलिए विजयादशमी के दिन समाज के रक्षकों यानी शस्त्र की पूजा होती है. बरसों तक तलवार और कुल्हाड़ी ने समाज की रक्षा की तो उसकी पूजा की जाती थी. अब उसका स्थान राफेल जैसे आत्याधुनिक हथियारों ने ले लिया, तो हमारा देश उनकी पूजा करता है.

इसके साथ रावल त्रिभुवन सिंह ने राजपूत समाज की हजारों बरसों पुरानी इस परंपरा को आगे बढ़ाना जरूरी बताया है. उन्‍होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में भी शस्त्र पूजन को लेकर ज्ञान हो इसके लिए हजारों वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए हर साल विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा की जाती है.

Nagneshi Mata Mandir

Tags: Barmer news, Vijayadashami

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