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पति को खोजते-खोजते बिहार से 930 KM दूर भरतपुर पहुंची सीता देवी, मिल गए 'राम'

पति को खोजते-खोजते बिहार से 930 KM दूर भरतपुर पहुंची सीता देवी, मिल गए 'राम'

बिहार के सीतामढ़ी की सीता देवी ने 930 किमी की दूरी तय करके भरतपुर में अपने पति रामस्वरूप को खोज लिया.

बिहार के सीतामढ़ी की सीता देवी ने 930 किमी की दूरी तय करके भरतपुर में अपने पति रामस्वरूप को खोज लिया.

Bharatpur News: भरतपुर का 'अपना घर आश्रम' राजस्थान का एक स्थान है जहां अब तक ना जानें कितने ही बिछुड़े हुये अपनों से मिल चुके हैं. आज हम आपको यहां तीन ऐसी संघर्षशील महिलाओं की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने अपने खोये हुये पतियों इसी आश्रम के बदौलत फिर पाया.

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    भरतपुर. पूर्वी राजस्थान के भरतपुर शहर में स्थित ‘अपना घर आश्रम’ (Apna Ghar Ashram) एक ऐसी जगह है जिसने देश के कोने-कोने से बिछड़े लोगों मिलाने में अहम भूमिका निभाई है. इस अपना घर आश्रम की आज चर्चा इसलिये भी जरुरी हो जाती है क्योंकि आज करवा चौथ (Karva Chauth) है. इस आश्रम ने देश के अलग-अलग कोनों की तीन महिलाओं को उनके बिछड़े पतियों से मिलवाने का बड़ा और पुण्य का काम किया है. इस आश्रम ने बिहार के सीतामढ़ी, हरियाणा के फरीदाबाद और उत्तरप्रदेश की झांसी की तीन महिलाओं को उनके खाेये पति लौटाये हैं. इस आश्रम में वर्तमान 3780 लोग रह रहे हैं जो अपनों से बिछड़े हुये हैं.

    जानकारी के अनुसार बिहार में नेपाल की सीमा पर बसे सीतामढ़ी की सीता देवी (28) के पति रामस्वरूप मजदूरी करते थे. रामस्वरूप मानसिक रूप से बीमार रहते थे. तंगहाली के चलते उनका उचित इलाज नहीं हो पाया. करीब डेढ़ बरस पहले सीतादेवी के पति अचानक लापता हो गये. इससे सीतादेवी टूट जरूर गई लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और पति खोजबीन जारी रखी. इस बीच जुलाई, 2020 में रामस्वरूप अपना घर की टीम को गाजियाबाद मिले. वहां उन्हें यहां लाया गया. एक दिन सोशल मीडिया के जरिये सीतादेवी को रामस्वरूप की खबर मिली. खोजबीन के पता चला कि रामस्वरूप अपना घर में है तो वह 925 KM का सफर कर सीतामढ़ी से भरतपुर आई और पति को देखकर सुकून मिला कि आखिरकार उसे उसका चांद मिल गया.

    अपना घर ने ठिकाना दिया सोशल मीडिया ने मिलाया
    सीता जैसी ही कहानी हरियाणा के फरीदाबाद की जनकरानी (85) की है. जनकरानी के पति एमएस चावला भी करीब सात माह पहले अचानक लापता हो गये. परिवार ने उनको ढूंढने की खूब कोशिश की लेकिन पार नहीं पड़ी और चावला का कोई सुराग नहीं लग पाया. चावला भी मानसिक रूप से बीमार थे. उसके बाद चावला को भटकते-भटकते इसी वर्ष अगस्त माह अपना घर में ठिकाना मिल गया. अपना घर आश्रम ने चावला को इसी वर्ष अगस्त हरिद्वार से रेस्क्यू किया था. बाद में उनका पत्नी जनकरानी से यहीं पर मिलाप हुआ. जनकरानी के मुताबिक वे पति तलाश के लिये अखबार, टीवी और सोशल मीडिया पर उनकी खोज करती रहती थी कि जानें कब उनकी खबर मिले जाये. अपना घर आश्रम ने उनकी इस मुराद को पूरी कर उन्हें नया जीवनदान दे दिया.

    बस से उतरकर लापता हो गये थे जयकुंवर के पति
    सीतामढ़ी की सीता और फरीदाबाद की जनकरानी की तरह ही उत्तर प्रदेश के झांसी की जय कुंवर (52) के पति देवीलाल की भी दिमागी हालत कमजोर थी. मूलरूप से हरियाणा के पलवल निवासी देवीलाल करीब आठ माह पहले एक दिन पलवल से झांसी आते समय रास्ते में बस कहीं उतर गये और लापता हो गये. जय कुंवर के अनुसार पति क्या गये मानों पूरी दुनिया से उनका मोहभंग हो गया. लेकिन उम्मीद फिर भी नहीं टूटी थी. पति की तलाश के दौरान गैर सरकारी संगठन के सदस्य ने उनको अपना घर आश्रम की जानकारी दी और कहा कि एक बार वहां भी पता कर लिजिये. उम्मीद के सहारे वह यहां आई तो उसे भी पति देवीलाल मिल गये. देवीलाल को अपना घर आश्रम की टीम जुलाई, 2021 में यहां लाई थी. अपना घर में पति को देखते ही जय कुंवर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

    3780 लोग रहते हैं अपना घर में
    उल्लेखनीय है कि भरतपुर में अपना घर आश्रम करीब 20 बरस से संचालित हो रहा है. वर्ष 2000 से यह आश्रम अब तक कई बिछुड़ों को मिला चुका है. आश्रम की टीम की ओर से रेस्क्यू किये लोगों और यहां भूले भटके आये लोगो की पूरी डिटेल को अपडेट करके रखा जाता है. आश्रम की प्रशासनिक अधिकारी बबीता गुलाटी का दावा है की आश्रम के जरिये अब तक लगभग 22000 लोगों को उनके परिवार से मिलाया जा चुका है. आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बीएम भारद्वाज बताते हैं कि वर्तमान में यहां 3780 लोग रहते हैं. इनमें कई मानसिक रूप बीमार हैं. वे अपना नाम पता तक नहीं बता पाते हैं.

    इनपुट : दीपक पुरी

    Tags: Bharatpur News, Karva Chauth 2021, Rajasthan latest news, Rajasthan News Update

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