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पति ने बच्‍चों और परिवार को संभाला, पत्‍नी ने बॉडी बिल्डिंग में जीता मेडल, पढ़ें कांस्‍टेबल की कहानी

Success Story: भरतपुर शहर की रहने वाली संजू उपाध्याय वर्तमान में राजस्थान पुलिस विभाग में कांस्टेबल हैं. उन्‍होंने महार ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट: ललितेश कुशवाहा

    भरतपुर. हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने ऐसे खेल में हाथ आजमाए जिसे सिर्फ लड़कों का खेल कहा जाता है. दरअसल एक समय हुआ करता था जब पहलवानी और बॉडी बिल्डिंग लड़कों के खेल माने जाते थे, लेकिन अब लड़कियों भी इन खेलों में बढ़ चढ़कर भाग ले रहीं है. अक्सर कहा जाता है कि किसी पुरूष की सफलता के पीछे किसी महिला का हाथ होता है, लेकिन यह कहानी एकदम उलट है.

    भरतपुर शहर की न्यू पुष्प वाटिका कॉलोनी निवासी संयोगिता उर्फ संजू उपाध्याय (Sanyogita alias Sanju Upadhyay) पत्नी चंद्रप्रकाश उपाध्याय ने हाल ही में आयोजित महाराष्ट्र के पुणे में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स प्रतियोगिता में बॉडी बिल्डिंग खेल में गोल्ड मेडल जीता है. वहीं, संजू ने इस सफलता का श्रेय अपने पति, पिता और कोच को दिया है.

    कौन हैं गोल्ड मैडल विजेता संजू?
    भरतपुर शहर की न्यू पुष्प वाटिका कॉलोनी निवासी संजू उपाध्याय वर्तमान में राजस्थान पुलिस विभाग में कांस्टेबल हैं. जबकि उनके पति चंद्र प्रकाश उपाध्याय भरतपुर शहर में सहायक लेखा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. उनके परिवार में दो बच्चे और सास हैं. संजू ने 2022 महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस गेम्स प्रतियोगिता में बॉडी बिल्डिंग खेल में गोल्ड मेडल जीता है. इससे पहले वह नेशनल बॉक्सिंग खिलाडी भी रही हैं .इसके बाद उन्होंने कोच अमित जांगिड़ के निर्देशन में बॉडी बिल्डिंग खेल की तैयारी की और आज ये सफलता मिली है.

    ऐसे मिली खेल में जाने की प्रेरणा
    संजू उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2006 में राजस्थान पुलिस कांस्टेबल के रुप में भर्ती हुई और उनकी पहली पोस्टिंग करौली में थी. एक दिन अचानक पुलिस लाइन में घूमने के लिए गई तो वहां पता चला पुलिस लाइन में पुलिस रेंज प्रतियोगिता आयोजित हो रही है. वहां के खेल प्रभारी महेंद्र सिंह ने मुझ से बेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में भाग लेने को कहा था. हालांकि मुझे इस खेल की जानकारी नहीं थी. साथ ही बताया कि उनके पिता एक पहलवान थे और वो बचपन में अक्सर उनके साथ काली बगीची स्थित भूरी सिंह व्यायामशाला में जाती थीं. इस कारण उन्हें पहलवानी और बॉक्सिंग खेल के बारे में तो जानकारी थी, लेकिन बेट लिफ्टिंग खेल से दूर तक नाता नहीं था. खेल प्रभारी ने बेटलिफ्टिंग के बारे में जानकारी दी और यही से प्रेरणा मिली कि खेल में बहुत कुछ कर सकती हूं.

    बॉक्सिंग को छोड़ बॉडी बिल्डिंग में आजमाएं हाथ
    संजू ने बताया कि बेट लिफ्टिंग खेल के बाद बॉक्सिंग में करीब चार साल तक 81 प्लस किलो में हाथ आजमाए और नेशनल तक खेलकर राजस्थान की बेस्ट बॉक्सर भी रहीं, लेकिन आगे सफलता नहीं मिल पा रही थी. उसी दौरान अपनी फिटनेस के लिए जिम जाने लगी. मेहनत और शरीर को देख जिम में मौजूद लोगो ने कहा आप की कदकाठी बॉडी बिल्डिंग के लोगों की तरह है. आपको इस खेल में जाना चाहिए और इसमें स्कोप भी बड़ा है. सोच समझकर अंतिम फैसला लिया लग्न और मेहनत के साथ इसी में लग गई. प्रतिदिन चार घंटे जिम में मेहनत करने के बाद 81 प्लस से 55 किग्रा में खेलने के लिए वजन घटाया. वजन घटने के बाद लगातार हौसला बढ़ता गया. राजस्थान पुलिस विभाग के निर्देश से करीब दो साल से 5वीं बटालियन आरएसी जयपुर में तैयारी करने चली गई . कोच अमित जांगिड़ के निर्देशन में इस खेल की तैयारी की.

    पति ने बढ़ाया हौसला और संभाला परिवार
    संजू ने बताया कि इस सफलता का पूरा श्रेय उनके पति चंद्रप्रकाश उपाध्याय को जाता है क्योंकि उन्होंने छोटे छोटे बच्चो की देखभाल करने के साथ साथ पूरे परिवार को संभाला. आधुनिकता के दौर में लोग पुराी रूढ़िवादी परंपरा पर्दा प्रथा की परवाह किए बिना मुझे इस खेल में आगे जाने के लिए प्रोत्साहित किया और समय समय पर जरूरत के हिसाब से पैसों का इंतजाम भी करते रहे. उन्होंने कभी मुझे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी. अंत में संजू ने समाज को सन्देश देते हुए कहा कि पुरानी रुढ़िवादी परंपरा को छोड़कर बहन बेटियों को आगे लाना चाहिए क्योंकि देश के प्रत्येक गांव में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. खास तौर पर भरतपुर जिले में आज के इस दौर में बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं.

    Tags: Bharatpur News, Rajasthan police, Womens Success Story

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