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दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक से भरतपुर में फैक्ट्रियों पर डले ताले

DEEPAK LAWANIYA | ETV Rajasthan
Updated: October 12, 2017, 4:32 PM IST
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक से भरतपुर में फैक्ट्रियों पर डले ताले
फैक्ट्रियों में ताले डलने से दुकानें भी हुईं सूनी.
DEEPAK LAWANIYA | ETV Rajasthan
Updated: October 12, 2017, 4:32 PM IST
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों की बिक्री बंद करने के निर्देश जारी होने के बाद से भरतपुर की पटाखा फैक्ट्रियों में ताले लग गए हैं. इससे पटाखा व्यवसाय से जुड़े हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. मिनी शिवाकाशी के रूप में पहचाने रखने वाले भरतपुर में कई वर्षों से पटाखा व्यवसाय चला आ रहा है. यहां पर कई फैक्ट्रियां हैं, जहां आतिशबाजी का निर्माण होता है. इन पटाखा कारखानों से क्षेत्र के हजारों लोग जुड़े हुए हैं और उनका चौका चूल्हा भी इन्हीं फैक्ट्रियों की बदौलत चला आ रहा है.

दीपावली आने से पूर्व भरतपुर में पटाखा बनाने का काम जोरशोर के साथ शुरू हो जाता है. मजदूर वर्ग के लोग फुलझड़ी ,धमाकेदार बम सहित अन्य आतिशबाजी बनाने के कार्य में जुट जाते हैं. दीपावली से कुछ दिन पूर्व शहर के कई स्थानों पर अस्थाई रूप से आतिशबाजी की दुकानें भी सज जाती हैं. आतिशबाजी विक्रेता प्रशासन से अस्थाई लाइसेंस लेकर पटाखा बेच कर कमाई करते हैं. इस बार भी आतिशबाजी दुकान लगाने के लिए सैकड़ों लोगों ने प्रशासन के सामने आवेदन किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मिलने के बाद प्रशासन ने सभी आवेदन निरस्त कर दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भरतपुर की आतिशबाजी फैक्ट्रियों में ताले लग गए हैं. मजदूर वर्ग के लोग आतिशबाजी फैक्ट्रियां बंद होने से अपनी आजीविका चलाने के लिए मोहताज दिखाई दे रहे हैं. आतिशबाजी से जुड़े मजदूरों का कहना है कि वर्षों से आतिशबाजी बनाने के काम में लगे हुए हैं. उन्हें कोई और काम नहीं आता. ऐसे में उनके सामने अब रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो रही है.
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