Bhilwara: राजस्थान की कोरोना सिटी, 21 पॉजिटिव केस, 2 की मौत, 8 दिन से कर्फ्यू

यहां अभी तक कुल 588 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए हैं.
यहां अभी तक कुल 588 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए हैं.

राजस्थान (Rajsthan) के भीलवाड़ा (bhilwara) की पहचान वस्त्रनगरी के रूप में रही है. फिलहाल यहां कोरोना वायरस (coronavirus) से संक्रमित 21 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 2 की मौत हो चुकी है.

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भीलवाड़ा. भारत (India) में राजस्थान (Rajsthan) के भीलवाड़ा (bhilwara) की पहचान वस्त्रनगरी के रूप में रही है. फिलहाल यहां कोरोना वायरस (coronavirus) से संक्रमित 21 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 2 की मौत हो चुकी है. बचे हुए 19 मरीजों का इलाज चल रहा है. इनमें 4 जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती हैं और शेष भीलवाड़ा के जिला अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती हैं. कोरोना वायरस से संक्रमित जिन दो मरीजों की मौत हो चुकी है उनके 2 -2 परिजन भी अब इस वायरस की जद में आ चुके हैं. कोरोना के कारण भीलवाड़ा की हालत खराब है. इसके कारण ही यहां गत 8 दिन से कर्फ्यू लगा हुआ है.

3 डॉक्टर और 13 सहकर्मी चपेट में
शहर के बृजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल में काम करने वाले 3 डॉक्टर भी कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं. उनके साथ इस अस्पताल के उनके 13 सहकर्मी भी इस वायरस की चपेट में आ गए हैं. ये सभी कर्मचारी जिला अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. यह संक्रमण यहीं नहीं रुका बल्कि एक डॉक्टर की पत्नी भी इसकी चपेट में आ गईं.

संक्रमण की शुरुआत कैसे हुई
हालांकि अभी इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है, लेकिन दो आशंकाएं जताई जा रही हैं. एक तो यहां काम करने वाले एक डॉक्टर के संबंधियों का सऊदी अरब से आना और उनका संक्रमित होना. दूसरा इस अस्पताल में एक निमोनिया पीड़ित मरीज का इलाज होना. बाद में इस मरीज की उपचार के दौरान जयपुर में मौत हो गई. भीलवाड़ा और जयपुर के अस्पतालों ने इस मरीज की कोई ऐसी जांच नहीं की गई जिससे उसकी मौत की सही वजह का पता चल पाता या मौत से पहले उसकी सही बीमारी पकड़ में आती. अब इसे अस्पतालों की लापरवाही कही जाए या कुछ और पर सच तो यही है कि इसका खमियाजा अकेले इस शहर को नहीं, बल्कि पूरे जिले और राजस्थान को भुगतना पड़ रहा है. यहां लोग अपने-अपने घरों में डर के साये में कैद हैं.



हर स्तर पर मुस्तैद है प्रशासनिक अमला

प्रशासनिक स्तर पर इस वैश्विक महामारी से लड़ने में जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट, एसपी हरेंद्र महावर, अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन राकेश कुमार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मुस्ताक और जिला अस्पताल अधीक्षक अरुण गौड़ जी-जान से जुटे हैं. शहर में शुक्रवार को कर्फ्यू के 8वें दिन सभी आपातकालीन सेवाओं को यथावत रखते हुए रोजमर्रा की वस्तुएं दूध, फल और सब्जी वितरण के साथ साथ जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री और भोजन पैकेट उपलब्ध करवाने में सरकारी अमला जुटा हुआ है.

588 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए हैं
यहां अभी तक कुल 588 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से 21 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. 485 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है और 82 की रिपोर्ट आने वाली है. शहर के छह क्वॉरेंटाइन में 436 संदिग्ध मरीजों को रखा गया है तो शहर के 5 प्रमुख प्राइवेट हॉस्पिटल का अधिग्रहण कर उनमें 200 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया जा रहा है. साथ ही शहर के कई होटल, धर्मशालाएं और सामुदायिक भवनों को अधिग्रहण कर उनमें 4000 बेड की क्षमता का क्वॉरेंटाइन भी तैयार किया जा रहा है. जिले में अब तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 2088 टीमों द्वारा 4 लाख 22 हज़ार 358 घरों का सर्वे कर 21 लाख 64 हजार 311 सदस्यों की पड़ताल की जा चुकी है. राहत की बात यह के यहां उपचाराधीन पॉजिटिव मरीजों से में 3 रिपोर्ट अब नेगेटिव आई है.

यहां रहने वालों में डर भी है और गुस्सा भी

यहां रहने वाले उम्‍मेद शर्मा का कहना है कि आज वस्‍त्रनगरी को बांगड़ अस्पताल ने वुहान शहर बनने के कगार पर ला दिया है. यदि अस्पताल के चिकित्‍सकों ने लापवाही न दिखाई होती, तो आज शायद यह स्थिति उत्‍पन्‍न नहीं होती. शहरवासी हिमांशु धारीवाल का कहना है कि हमें अब दुख हो रहा है. जो शहर विश्‍व में वस्‍त्रनगरी के नाम से प्रसिद्ध था, आज वह कुछ लोगों की लापरवाही के कारण तबाही के मोड़ पर खड़ा है. हमने अपने जीवन में ऐसे दिनों की कल्पना न की थी. अब आने वाले 21 दिन हम सबके लिए और मुश्किल भरे होंगे. वहीं धीरज आहुजा ने कहा कि भीलवाड़ा सिटी अब पूरे देश में कोरोना सिटी के नाम से जाना जा रहा है। जिले में लगातार पॉजिटिव मरीजों की संख्‍या बढ़ने के कारण अब डर फैलता जा रहा है.

जीवट वाले लोग हैं यहां के निवासी, 3 मरीज की रिपोर्ट अब निगेटिव
यहांचाहे अकाल पड़ा हो या फिर कोई और विपदा आई हो. यहां के लोग कभी विचलित होकर विस्थापित नहीं हुए. इसीलिए देश के विभिन्न हिस्सों में आपको भीलवाड़ा के प्रवासी लोग कम ही मिलेंगे. यहां तो आजादी के पहले से ही यह कहावत बोली जाती रही है कि गेहूं छोड़कर मक्का खाना मगर मेवाड़ छोड़कर कहीं नहीं जाना. अब जरूर पिछले 10 बरसों से इस जिले की आसींद और गंगापुर तहसीलों के लोग देश के विभिन्न हिस्सों में आइसक्रीम बेचकर अपनी एक नई पहचान बना रहे हैं.

 

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