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COVID-19: महासंकट में आई भीलवाड़ा की Textile Industry, 400 यूनिट में रुका काम, 1500 करोड़ अटके

1 लाख से अधिक लोगों को इससे प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है.

1 लाख से अधिक लोगों को इससे प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है.

टेक्सटाइल सिटी के नाम से मशहूर भीलवाड़ा (Textile City Bhilwara) का कपड़ा उद्योग संकट में है. करीब सवा माह पहले COVID-19 का हॉटस्पॉट रह चुके भीलवाड़ा में करीब 400 से अधिक कपड़ा इकाइयों में उत्‍पादन लगभग बंद है.

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भीलवाड़ा. देशभर में टेक्सटाइल सिटी के नाम से मशहूर भीलवाड़ा (Textile City Bhilwara) में अब टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री संकट में आ गई है. करीब सवा माह पहले कोरोना वायरस (COVID-19) के हॉटस्पॉट रह चुके भीलवाड़ा में स्थित करीब 400 से अधिक कपड़ा इकाइयों में उत्‍पादन लगभग बंद है. प्रतिदिन 26 लाख मीटर कपड़े का उत्‍पादन करने वाले इस शहर की कपड़ा इंडस्ट्री का सालाना टर्न ओवर 15 हजार करोड़ रुपए का है. लेकिन कोरोना संकट काल में इस इंडस्ट्री का करीब 1500 करोड़ रुपए का भुगतान अटकने से अब संकट के बादल छाने लगे हैं. यहां पिछले 20 मार्च से कर्फ्यू लगा हुआ है.

बैंक के ब्‍याज का मीटर लगातार चल रहा है
टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की चिंता है कि इकाइयां बंद हैं. आधा तैयार माल पड़ा हुआ है. बेचे गए कपड़े का भुगतान रुका हुआ है. लेकिन बैंक के ब्‍याज का मीटर लगातार चल रहा है. बकाया राशि लॉकडाउन खुलने के बाद कब मिलेगी यह कहना मुश्किल है. विविंग मिल एसोसिएशन के अध्‍यक्ष संजय पेड़ीवाल कहते हैं कि हम लोगों ने बड़ी मुश्किल से मार्च का भुगतान श्रमिकों को किया है. लेकिन अब अप्रैल का भुगतान करना मुश्किल है.

बैंकों 20 से 40 प्रतिशत अतिरिक्‍त वर्किंग कैपिटल की मांग
बकौल पेड़ीवाल यह तभी संभव हो पाएगा जब ईएसआई या पीएफ फण्‍ड के मर्जर से इसे किया जाए. मजदूर हमारी रीढ़ की हड्डी हैं. दूसरा हमारे टीडीएस, टफ अनुदान और जीएसटी रिफंड जैसे मुद्दों पर सहानुभुतिपूर्वक विचार कर तुरंत इनका भुगतान किया जाना चाहिए. इसके साथ ही हमें बैंकों से कम से कम 20 से 40 प्रतिशत अतिरिक्‍त वर्किंग कैपिटल देना चाहिए. एक साल तक के लिए छोटे और मध्य श्रेणी के उद्योगों की ब्‍याज दर कम करनी चा‍हिए. अन्यथा यह उद्योग चल नहीं पाएंगे. यह उद्योग देश में सर्वाधिक रोजगार पैदा करने वाला उद्योग है.

फैक्ट फाइल
- 400 छोटी-बड़ी कपड़ा फैक्ट्रियां हैं भीलवाड़ा में.
- 14 स्पिनिंग यूनिट में बनाया जाता है धागा.
- 19 प्रोसेर्स हाउस में होती है कपड़ों की प्रो‍सेसिंग.
- 26 लाख मीटर कपड़े का प्रतिदिन होता है उत्‍पादन.
- 96 करोड़ मीटर कपड़े का सालाना होता है उत्‍पादन.
- 27 टेक्‍टसटाइल मार्केट और 2 हजार दुकानें हैं.
- 70 देशों में कपड़ा और धागा होता है निर्यात.
- 6 सौ करोड़ रुपए के कपड़े का होता है निर्यात
- 12 सौ करोड़ रुपए के धागे का होता है निर्यात.
- 15 हजार करोड़ रुपए का सालाना टर्न ओवर है.
- 1 लाख से अधिक लोगों को इससे मिला हुआ है प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रोजगार.

लॉकडाउन पीरियड के लोन का पूरा ब्‍याज माफ हो
मेवाड़ चैम्‍बर्स ऑफ कॉमर्स एण्‍ड इण्‍डस्‍ट्रीज के सचिव आरके जैन कहते है कि प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से भीलवाड़ा कपड़ा उद्योग से हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है. इस समय इस उद्योग को पूंजी संकट का सामान करना पड़ रहा है. मेवाड़ चैम्‍बर्स आफ कॉमर्स इण्‍डस्‍ट्रीज ने अपनी समस्‍याओं को लेकर केन्‍द्र और राज्‍य सरकार को अवगत करवाया है. हमने राज्‍य सरकार से बिजली की दर कम करने के साथ-साथ अन्‍य रियायतें देने का आग्रह किया है. हमारा आग्रह है कि लॉकडाउन पीरियड के लोन का पूरा ब्‍याज माफ करें. 24 महीनों की किश्‍त भुगतान को आगे बढ़ाया जाये ताकि उद्योगों को राहत मिल सके. जैन के अनुसार यदि समय रहते केन्‍द्र और राज्‍य सरकार ने कपड़ा उद्योग को समुचित रियायतें नहीं दी तो यह लॉकडाउन और कर्फ्यू तेजी से आगे बढ़ते हुए भीलवाड़ा के विकास के पहियों में ब्रेक लगा देगा.

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