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Corona Warriors: 7 साल की मासूम बेटी को ताले में बंद कर देश सेवा में जुटे हैं पति-पत्नी

दिक्षिता के पिता मेडिकल विभाग में कंपाउडर और मम्मी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल है.

दिक्षिता के पिता मेडिकल विभाग में कंपाउडर और मम्मी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल है.

यह कहानी है भीलवाड़ा (Bhilwara) के एक ऐसे छोटे से परिवार की जिसमें पति-पत्नी और उनकी मासूम बेटी तीनाें सदस्य कोरोना वॉर ...अधिक पढ़ें

भीलवाड़ा. यह कहानी है भीलवाड़ा (Bhilwara) के एक ऐसे छोटे से परिवार की जिसमें पति-पत्नी और उनकी मासूम बेटी तीनाें सदस्य कोरोना वॉरियर्स (Corona warriors) की बड़ी भूमिका निभा रहे  हैं. इस परिवार में पति मेडिकल विभाग में तो पत्नी पुलिस में है. राजस्थान में सबसे पहले कोरोना वायरस (COVID-19) के हॉटस्पॉट बने भीलवाड़ा शहर में रहने वाले इस दंपति के महज 7 साल की बेटी भी इन दोनों कोरोना वॉरियर से किसी भी मायने में कम नहीं है. संकट की इस घड़ी में जब पति और पत्नी दोनों ड्यूटी पर होते हैं तो यह मासूम घंटों घर में अकेली ताले में बंद रहती है.

दोनों लगातार ड्यूटी दे रहे हैं
भीलवाड़ा में निवासी दिलखुश जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय में कंपाडर है. दिलखुश की पत्नी सरोज राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल है. भीलवाड़ा में कोरोना संक्रमण के चलते पहले 20 मार्च से 3 अप्रैल तक कर्फ्यू लगा था. अब यहां 3 अप्रैल से आगामी 13 अप्रैल तक महा-कर्फ्यू लगा हुआ है. पति-पत्नी दोनों के विभाग ऐसे हैं जो संकट की इस घड़ी सबसे ज्यादा सक्रिय और वे दिन रात आमजन की सेवा में लगे हैं.

Corona Warriors: पति-पत्नी दोनों करते हैं ड्यूटी, 7 साल की मासूम बेटी रहती है ताले में 'बंद' Corona Warriors:Both husband and wife on duty-7-year-old innocent daughter stays 'locked' in locks
कांस्टेबल सरोज (मध्य में).


चाहकर भी कोई परिजन सहायता के लिए नहीं आ सकता
दिलखुश और सरोज के 7 साल की बिटिया है दिक्षिता राज सिंह. वह तीसरी कक्षा में पढ़ती है. यह मासूम पिछले करीब 10 दिनों से दिनभर घर में अकेली ताले में बंद रहती है. हालात ऐसे हैं कि इसकी सार संभाल करने के लिए परिवार से भी कोई व्यक्ति यहां नहीं आ सकता है. लिहाजा पति-पत्नी और बेटी कोरोना संकट के इस काल में अलग-अलग मोर्चों पर जूझ रहे हैं.

8-9 घंटे ताले में बंद रहती है सात साल की मासूम
भीलवाड़ा शहर के मीरा नगर में रहने वाले दिलखुश अस्पताल में लगातार 10 दिन की ड्यूटी पर हैं. वो घर आएंगे तो भी बेटी से नहीं मिल पाएंगे. क्योंकि लगातार आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी देने के बाद उन्हें अगले 10 दिन घर में आइसोलेशन में रहना होगा. वहीं दिक्षिता की मां सरोज भीलवाड़ा शहर में लगे महा कर्फ्यू के दौरान अपनी टीम के साथ गली मोहल्लों में बाइक पर सायरन बजाते हुए लोगों को घरों में सुरक्षित रहने की हिदायत देते हुए ड्यूटी को अंजाम देती है. वह एक बार ड्यूटी पर निकलने के बाद 8-9 घंटे बाद ही घर लौटती हैं. ऐसे हालात में दिक्षिता दिनभर अकेली ताले में बंद रहती है.

दिलखुश जिला अस्पताल में ड्यूटी कर रहे हैं.


हमें कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ना है
इन सभी हालात पर सरोज का कहना है कि 'मेरे और मेरे पति के लिए ड्यूटी पहले हैं. देश के लिए हम दोनों मिलकर काम कर रहे हैं. हमें कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ना है.' बेटी को अकेले छोड़ने पर सरोज बेहद बोल्ड होकर कहती है कि भगवान सबकी रक्षा करेगा. घबराने की इसमें कोई बात नहीं है. यह बात जरूर है कि मैं ड्यूटी खत्म करके घर जाती हूं तो बेटी की सूनी निगाहें मुझे घूरती रहती हैं.

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Tags: Bhilwara news, Corona warriors, Coronavirus, Rajasthan news

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