COVID-19: भीलवाड़ा में 21 पॉजिटिव मरीज, जबर्दस्त इच्छाशक्ति से मुकाबला करने में जुटे हैं लोग

सरपंच किस्मत गुर्जर गांव में हाइपोक्लोराइड का स्प्रे करने में जुटी है.
सरपंच किस्मत गुर्जर गांव में हाइपोक्लोराइड का स्प्रे करने में जुटी है.

राजस्थान में कोरोना वायरस (Corona virus) के कहर से सबसे ज्यादा प्रभावित भीलवाड़ा के लोगों की परिस्थितियों से मुकाबला करने की इच्छाशक्ति (Will power) का कोई सानी नहीं है.

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भीलवाड़ा. राजस्थान में कोरोना वायरस (Corona virus) के कहर से सबसे ज्यादा प्रभावित भीलवाड़ा के लोगों की परिस्थितियों से मुकाबला करने की इच्छाशक्ति (Will power) का कोई सानी नहीं है. यहां आजादी के पहले से ही एक कहावत रही है कि 'गेहूं छोड़कर मक्का खाना, मगर मेवाड़ छोड़कर कहीं नहीं जाना'. संदेश साफ है कि परिस्थितियां चाहे कितनी ही प्रतिकूल क्यों ना हो उनका मुकाबला करना है और रहना भी यहीं हैं. इसकी बानगी है देवरिया गांव की सरपंच किस्मत गुर्जर, जो कोरोना जैसी महामारी का मुकाबला करने के लिए खुद ही मैदान में उतर चुकी है.

45 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं
विश्वभर में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के राजस्थान में अब तक कुल 45 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं. इनमें 21 तो अकेले भीलवाड़ा के हैं. इनमें से 2 मरीजों की मौत हो चुकी है. 4 जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती है. 15 का भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में इलाज चल रहा है. जिला मुख्यालय पर गत आठ दिन से कर्फ्यू लगा हुआ है. फिर भी किस्मत गुर्जर जैसे लोग इन परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए पूरी इच्छाशक्ति से डटे हुए हैं और दूसरों के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं.

गांव में हाइपोक्लोराइड का स्प्रे करने में जुटी हैं किस्मत
भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा पंचायत समिति की देवरिया ग्राम पंचायत की सरपंच किस्मत गुर्जर कोरोना वायरस के संक्रमण से दो-दो हाथ करने के लिए खुद निकल पड़ी है. एक तरफ जहां किस्मत गुर्जर गांव में हाइपोक्लोराइड का स्प्रे करने में जुटी है वहीं जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी चिकित्सालय में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने में जुटे अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर अरुण गौड़ की टीम  भी 'हम हैं हिंदुस्तानी' गाते हुए नजर आती है. यह टीम विश्वास जता रही है कि वो कोरोना का डटकर मुकाबला करेंगे और उसे हराएंगे.



लोग अपनी जमीन छोड़कर जाना पसंद नहीं करते
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में भीलवाड़ा में चाहे अकाल पड़ा हो या फिर बाढ़ आई हो. यहां के लोग कभी विचलित होकर विस्थापित नहीं हुए. इसीलिए देश के विभिन्न हिस्सों में प्रवासी भीलवाड़ा वालों की संख्या कम मिलेगी. क्योंकि यहां के लोगों का मानना है कि चाहे जितनी समस्याएं, लेकिन अपनी जमीन छोड़कर नहीं जाना. यह बात दीगर है कि पिछले 10 बरसों से इस जिले की आसींद और गंगापुर तहसीलों के लोग देश के विभिन्न हिस्सों में आइसक्रीम बेचकर अपनी एक नई पहचान बना रहे हैं.

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