COVID-19: कोरोना से जंग में भीलवाड़ा देशभर में बन रहा 'नजीर', ये हैं सफलता के अहम कदम
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COVID-19: कोरोना से जंग में भीलवाड़ा देशभर में बन रहा 'नजीर', ये हैं सफलता के अहम कदम
इस मॉडल की पूरी रूप-रेखा बनाने वाले भीलवाड़ा कलक्टर राजेन्द्र भट्ट ही हैं.

कोरोना (COVID-19) के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी है, लेकिन इस लड़ाई में भीलवाड़ा (Bhilwara) का नाम सबसे आगे होगा. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के चलते भारत के जिस भीलवाड़ा को इटली की तरह कहा जाने लगा था आज वही शहर अब देशभर के लिए नजीर साबित हो रहा है.

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भीलवाड़ा. कोरोना (COVID-19) के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी है, लेकिन इस लड़ाई में भीलवाड़ा (Bhilwara) का नाम सबसे आगे होगा. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के चलते भारत के जिस शहर को इटली की तरह कहा जाने लगा था, आज वही शहर अब देशभर के लिए नजीर साबित हो रहा है.

पॉजिटिव मरीजों की एक चेन बन गई थी
दरअसल राजस्थान के भीलवाड़ा के अंदर कोराना पॉजिटिव मरीजों की एक चेन बन गई थी. लेकिन सरकार और जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट ने त्वरित कदम उठाते हुए पूरे भीलवाड़ा को सील कर शहर में कर्फ्यू लगा दिया. प्रशासन ने युद्धस्तर पर कोरोना से लड़ने का एक्शन प्लान बनाया. इसका नतीजा ये हुआ की पीएम के साथ हुई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में भीलवाड़ा मॉडल की चर्चा हुई. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने भीलवाड़ा का जिक्र करते हुए यहां तक कहा कि सभी राज्यों को ये मॉडल अपनाना चाहिए.

कलक्टर राजेन्द्र भट्ट रहे हीरो
जिस भीलवाड़ा मॉडल की चर्चा पूरे देश में हो रही हो आज उस मॉडल के जनक की भी चर्चा होनी चाहिए. भले ही फैसला मौजूदा सरकार का था, लेकिन मॉडल की पूरी रूप-रेखा बनाने वाले भीलवाड़ा कलक्टर राजेन्द्र भट्ट ही हैं. राजेन्द्र भट्ट ने न्यूज़18 से बात करते हुए बताया कि किस तरह भीलवाड़ा मॉडल छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कारगर है.



भीलवाड़ा मॉडल में क्या-क्या हुआ

  • भीलवाड़ा में पुलिस ने 20 मार्च को ही पूरे शहर में कर्फ्यू लगाकार सारे रास्ते सील कर दिए. शहर के सभी कारखानों को बंद करवा दिया और किसी भी फैक्ट्री के मजदूर को शहर से बाहर नहीं निकलने दिया.

  • 21 तारीख को चिकित्सा विभाग ने फैसला किया और 16 ​हजार स्वास्थ्य​कर्मियों की 1948 टीमों ने करीब 18 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का काम 10 दिन में कर लिया. वहीं अभी वहां दूसरे और तीसरे चरण के सर्वे का काम जारी है. अब तक 25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है. अभी 13 अप्रैल तक स्क्रीनिंग का काम जारी रहेगा.

  • जिला प्रशासन की ओर से कोरोना से निपटने के लिए तत्काल तैयारियां शुरू की गईं. 21 मार्च के बाद ही प्रशासन ने निजी अस्पतालों, होटल, धर्मशालाओं और सामुदायिक भवनों का अधिग्रहण करके क्वारंटाइन के लिए सुरक्षित कर लिया.

  • जिन लोगों में भी सर्दी-जुकाम के थोड़े से भी लक्षण नजर आए, उनको घरों से निकालकर क्वारंटाइन किया गया.

  • 3 अप्रैल से 13 अप्रैल तक प्रशासन ने एहतियातन वहां कर्फ्यू का सख्ती से पालन कराते हुए पुलिस, चिकित्सा विभाग और सफाई कर्मचारियों को छोड़कर सभी के पास निरस्त कर दिए.

  • जिला कलक्टर राजेंद्र भट्ट सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से आम जनता को घर में रहने और साफ सफाई रखने तथा सोशल डिस्टेन्स बनाए रखने की अपील करते रहे.


लॉकडाउन के कारण ही भारत की स्थिति ठीक है
लॉकडाउन के सवाल पर भीलवाड़ा जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट का कहना है कि लॉकडाउन के कारण ही और देशों के मुकाबले इतनी आबादी होने के बाद भी भारत की स्थिति अभी ठीक है. लेकिन अगर तीन साइकल (14 दिन का एक साइकल) मतलब 42 दिन का लॉकडाउन अभी भी चाहिए ताकि कोरोना के चेन को तोड़ा जा सके.

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