• Home
  • »
  • News
  • »
  • rajasthan
  • »
  • Mahant Narendra Giri Case: जानिए आनंद गिरि का राजस्थान कनेक्शन, ऐसे बना साधु

Mahant Narendra Giri Case: जानिए आनंद गिरि का राजस्थान कनेक्शन, ऐसे बना साधु

आनंद गिरि भीलवाड़ा जिला के आसिन तहसील के ब्राह्मण की सरेरी गांव के मूल निवासी हैं.

आनंद गिरि भीलवाड़ा जिला के आसिन तहसील के ब्राह्मण की सरेरी गांव के मूल निवासी हैं.

Mahant Narendra Giri case: प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच पिछले दिनों बाघम्बरी मठ की संपत्ति—संसाधन, जमीनों की बिक्री को लेकर विवाद हुआ था. राजस्थान के मूल निवासी आनंद गिरि ने महंत पर मठ की जमीनें बेचने का आरोप लगाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

भीलवाड़ा. प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में उत्तराखंड पुलिस ने जिस शिष्य आनंद गिरि को हिरासत में लिया है. आनंद गिरि का राजस्थान के भीलवाड़ा से कनेक्शन है. वह भीलवाड़ा जिला के आसिन तहसील में आने वाले ब्राह्मण की सरेरी गांव के मूल निवासी हैं. अखिल भारतीय अखाड़ा ​परिषद के अध्यक्ष व श्रीपंचायती अखाड़े के महंत स्वामी नरेंद्र गिरि का सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया. उनका शव फंदे से लटका मिला था.  मामले की जांच के लिए डीआईजी, प्रयागराज ने डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है. मामले के विवेचक इंस्पेक्टर महेश भी एसआईटी में शामिल किया गया है.

आनंद गिरि करीब दो दशक से महंत नरेंद्र गिरि के साथ है. वह मूलत: राजस्थान के रहने वाला है. भीलवाड़ा जिले की आसिन तहसील में उनका गांव है. आनंद गिरि वर्ष 2000 में संन्यास लेने के बाद नरेंद्र गिरि के संरक्षण में रहने लगे थे. संस्कृत, वेद व योग की शिक्षा ग्रहण की. मठ के अन्य शिष्यों से खुद की अलग पहचान बनाने के लिए अंग्रेजी की पढ़ाई भी की.

समझिए आनंद गिरी की कहानी

आनंद गिरि बेहद गरीब परिवार है. आनंदगिरी का एक भाई अभी भी सब्जी का ठेला लगाता है. दो भाई गुजरात में भंगार का काम करते हैं. आनंद गिरी का असली नाम अशोक चोटिया है. अपने पिता की चौथी संतान है. 1996 में महज 12 साल की उम्र में घर छोड़कर हरिद्धार चला गया था, जहां नरेद्र गिरी से भेंट हुई. नरेंद्र गिरी 2012 में अशोक को भीलवाड़ा में उसके गांव लाए. उसे परिवार क सामने दीक्षा दिलवाई और आनंद गिरी नाम दिया. उसे पूछा क्या करना चाहता है तो कहा पढ़ाई करना चाहता हू. नरेंद्र गिरी ने आगे उसे पढ़ाया. 2001 में एक भक्ति चैनल पर प्रवचन के दौरान परिवार ने आनंद गिरी को पहचाना.
छह महीने पहले मां की मौत पर घर आया था.

Mhanat Narendra Giri Suicide: देश के इन नामी संतों ने भी की थी खुदकुशी, देखिए लिस्ट

खुद को नरेंद्र गिरी का उत्तराधिकारी प्रचारित किया

बताते हैं कि आनंद गिरि गुरु नरेंद्र गिरि के करीब रहकर मठ व बड़े हनुमान मंदिर का काम देखने लगे. वर्ष 2014 में आनंद गिरि ने खुद को नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी के रूप में प्रचारित करना शुरू किया तो उसका विरोध हुआ. तब नरेंद्र गिरि ने स्पष्ट किया था कि आनंद गिरि उनके उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि शिष्य ही हैं. उन्होंने दीक्षा दी है, लेकिन उत्तराधिकारी किसी को नहीं बनाया है.

गुरु के खिलाफ साजिश के आरोप में किया निष्कासित

परिवार से संपर्क रखने तथा गुरु के खिलाफ साजिश करने के आरोप में आनंद गिरि को निरंजनी अखाड़ा ने 14 मई 2021 को निष्कासित कर दिया था. नरेंद्र गिरि ने उन्हें श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी व बड़े हनुमान जी मंदिर की व्यवस्था से निष्कासित कर दिया था. फिर नरेंद्र गिरि के एक शिष्य के लखनऊ स्थित निवास में 26 मई को गुरु-शिष्य की मुलाकात हुई. आनंद गिरि ने गुरु नरेंद्र गिरि से माफी मांगी थी.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज