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Mahant Narendra Giri Case: भीलवाड़ा का अशोक चोटिया कैसे बना आनंद गिरी, जानिए पूरी 'कुंडली'

आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के निवासी हैं. (Courtesy: https://www.facebook.com/swami.anandgiriji.9)

आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के निवासी हैं. (Courtesy: https://www.facebook.com/swami.anandgiriji.9)

Mahant Narendra Giri Maharaj Suicide Case: महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में पुलिस ने आनंद गिरि को गिरफ्तार किया है. आनंद गिरि (Anand Giri) का विवादों से पुराना नाता रहा है. पढ़ें गुरु नरेंद्र गिरि के इस शिष्य की दिलचस्प कहानी.

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भीलवाड़ा. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष और प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ  के महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या (Narendra Giri Suicide Case) मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उनके पूर्व शिष्य आनंद गिरि ( Anand Giri) का विवादों से पुराना नाता रहा है. इस हाईप्रोफाइल केस में पुलिस सहित दूसरी एजेंसियां भी सक्रिय होती नजर आ रही है. अब लोगों जानना चाहते हैं आखिर आनंद गिरि कौन हैं? दिवंगत महंत नरेंद्र गिरि का कृपापात्र और एक समय में खुद को उनका उत्तराधिकारी कहने वाले आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के निवासी हैं.

संन्यासी बनने से पहले उनका नाम अशोक खंडेलवाल उर्फ अशोक चोटिया था. भीलवाड़ा जिले के ब्राह्मणों की सरेरी का निवासी है आनंद गिरि. अशोक चोटिया से आनंद गिरि बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं है. कुंभ मेले के दौरान एक संत के जरिए नरेन्द्र गिरि से इसका परिचय हुआ. फिर उन्होंने बाघम्बरी मठ को ही अपना ठिकाना और नरेद्र गिरि को अपना गुरु बना लिया.

परिवार गरीब और खुद अमीर हैं आनंद गिरि

आनंद गिरि का परिवार आज भी बेहद गरीबी में गुजर-बसर करता है. जानकार बताते हैं कि आनंद गिरि चार भाइयों में सबसे छोटा हैं. उनके एक भाई अभी भी ठेले पर सब्जी बेचते हैं. जबकि दो भाई कबाड़ का काम करते हैं. परिवार भले ही अभावों में गुजारा करता हो, लेकिन आनंद गिरि खुद लग्जरी लाइफ जीता है. महंगे सोने की चेन, रत्नजड़ित अंगुठी पहनना और होटलों में रहना उसकी आदतों में शुमार है. माना जाता है कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि का सान्निध्य पाकर ही आनंद गिरि ऐसी जिंदगी जीने लगे. कुंभ मेले के चलते देश-विदेश में उनके संपर्क सूत्र विकसित हो गए. कई विदेश दौरे भी उसके खाते में दर्ज हैं. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में दो साल पहले एक विवाद के बाद जेल की हवा भी खा चुका है. पिछले प्रयाग कुंभ के दौरान गंगा संरक्षण पर वृहत कार्यक्रम आयोजित कर सुर्खियां बटोरी थी.

ये भी पढ़ें: Mahant Narendra Giri Death: आनंद गिरि के पिता का दावा- परिवार को कभी नहीं दिए पैसे, आरोप गलत
मां के निधन पर आखिरी बार आए थे गांव

आनंद गिरि का भीलवाड़ा कनेक्शन सामने आने के बाद लोग बताते हैं कि उनका यहां कम ही आना जाना होता था. पांच महीने पहले वो अपने मां के निधन पर आखिरी बार गांव आए थे. 2013 में भी एक बार वो गांव आए थे, तब उनके गुरु महंत नरेन्द्र गिरि भी साथ ही आए थे. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने पिछले दिनों विवाद के बाद उन्हें मठ से निकाल दिया था. तब से वो हरिद्वार में रह रहे थे.

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