Bhilwara: गधे की चोरी की अनोखी दास्तां, मामला पहले थाने पहुंचा, लेकिन फैसला मंदिर में हुआ, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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Bhilwara: गधे की चोरी की अनोखी दास्तां, मामला पहले थाने पहुंचा, लेकिन फैसला मंदिर में हुआ, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
रामदेव 5 साल पहले खोए अपने गधे को वापस पाकर झूम उठा. मंदिर में गधे को लेने के लिए रामदेव का पूरा परिवार आया.

भीलवाड़ा जिले में एक गधे की चोरी (Donkey theft) का अनूठा मामला सामने आया है. गधे की चोरी का यह मामला पुलिस थाना से होते हुए पशु चिकित्सक और फिर मंदिर (Temple) तक पहुंचा.

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भीलवाड़ा. जिले में एक गधे की चोरी (Donkey theft) का अनूठा मामला सामने आया है. हालांकि, गधे की चोरी की घटना 5 साल पहले हुई थी, लेकिन इसका पटाक्षेप गत सप्ताह हुआ है. यह मामला पुलिस थाना से होते हुए पशु चिकित्सक और फिर मंदिर (Temple) तक जा पहुंचा. मंदिर में मन की सच्चाई के आधार पर इसका फैसला हुआ कि आखिरकार गधा किसका है. पांच साल पहले चोरी हुए इस गधे को लेने के लिए उसके मालिक का पूरा परिवार आया.

दरअसल, भीलवाड़ा जिले के चांदखेड़ी गांव निवासी रामदेव बागरिया का गधा 5 साल पहले चोरी हो गया था. हाल ही में 2 जुलाई को रामदेव बागोरिया अपने गांव से कोटड़ी आ रहे थे. इसी दौरान उन्‍हें रास्ते में मानसिंह जी का झोपड़ा गांव के पास भेड़ों के झुंड के बीच अपना गधा चरता हुआ नजर आया. गधे को देखते ही रामदेव ने उसे आवाज लगाई. अपने पूर्व मालिक की आवाज सुनते ही गधा उनके पास दौड़ा चला आया. रामदेव ने गधे को बिस्किट खिलाए और भेड़ों के ग्वाले से गधा वापस लौटने को कहा, लेकिन ग्वाले ने मना कर दिया. इस पर 3 जुलाई को मामला कोटड़ी थाने पहुंच गया. रामदेव ने गधा चोरी होने की रिपोर्ट दे दी.

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गधे की उम्र के निर्धारण के लिए पशु चिकित्सक से ली गई राय
कोटड़ी थाना अधिकारी सुरेश चौधरी ने बताया कि गधे चोरी की रिपोर्ट पर दोनों पक्षों को बुलाया गया. लेकिन, दोनों ने गधे पर अपना अपना मालिकाना हक जताकर झगड़ा शुरू कर दिया. इस पर दोनों से गधे की उम्र पूछी गई तो वर्तमान मालिक ने इसकी उम्र 7 साल और पूर्व मालिक रामदेव बागरिया ने 12 साल बताई. इसका निर्णय करने के लिए पशु चिकित्सक की सहायता ली गई. पशु चिकित्सक ने गधे की उम्र लगभग 10 वर्ष बताई.

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5 साल पहले के फोटो और उसके इलाज के साक्ष्य भी पेश किए
पूर्व मालिक रामदेव ने पुलिस को अपने गधे के 5 साल पहले के फोटो और उसके इलाज के साक्ष्य भी पेश किए. फिर भी गधे के वर्तमान मालिक ने उसको चुराना स्वीकार नहीं किया. इसके बाद यह तय किया गया कि गधे को कोटड़ी के प्रमुख चारभुजानाथ के मंदिर परिसर में बांधते हैं जो इसका असली मालिक होगा वह ईमानदारी से उसे खोलकर ले जाएगा. इस बीच गधे को एक दिन थाने में ही रखा गया.

पुलिस की मौजूदगी में गधे को मंदिर में बांधा गया
4 जुलाई को गधे को पुलिस की मौजदूगी में मंदिर में बांध दिया गया. अब पूरा मामला ईमानदारी पर आकर टिक गया. दोनों पक्ष वहां आ गये. इस प्रक्रिया में रामदेव अपने गधे को खोलकर कर घर ले गया. इस पर गधे के वर्तमान मालिक ने कोई विरोध नहीं किया. उधर, रामदेव 5 साल पहले खोए अपने गधे को वापस पाकर झूम उठा. मंदिर में गधे को लेने के लिए रामदेव का पूरा परिवार आया था.
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