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निर्विरोध उप-सरपंच बना 98 साल का बुजुर्ग, अगले दिन हुई मौत, लोगों ने कहा- यही थी उनकी आखिरी इच्‍छा
Bikaner News in Hindi

Satveer Singh Rathore | News18 Rajasthan
Updated: January 24, 2020, 8:28 PM IST
निर्विरोध उप-सरपंच बना 98 साल का बुजुर्ग, अगले दिन हुई मौत, लोगों ने कहा- यही थी उनकी आखिरी इच्‍छा
98 साल के नानूराम भांभू उप-सरंपच का निधन.

98 साल के नानूराम भांभू (Nanuram Bhambhu) की इच्‍छा थी कि वह पंचायत चुनाव (Panchayat elections) में अपने गांव के सरपंच या उप-सरपंच बनें. ग्रामीणों ने उन्हें निर्विरोध जीत भी हासिल करवाई, लेकिन उप-सरपंच बनने के अगले दिन ही उनका देहांत हो गया.

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बीकानेर. 98 साल के बुजुर्ग की इच्छा थी, वो पंचायत चुनाव (Panchayat elections) में अपने गांव के सरपंच या उप-सरपंच बनें. इसी इच्छा को लेकर नानूराम भांभू (Nanuram Bhambhu) चुनाव में उप-सरंपच पद के दावेदार बने. अपने गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति की इच्छा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने उन्हें निर्विरोध जीत हासिल करवाई, लेकिन उप-सरपंच बनने के अगले दिन ही 98 वर्षीय नानूराम भांभू का देहांत हो गया.

यहां का है मामला
बीकानेर के नोखा उपखंड की ग्राम पंचायत जयसिंहदेसर मगरा के रहने वाले नानूराम भांभू 98 वर्ष के थे और उन्होंने ग्रामीणों के बीच इस पंचायत चुनाव में सरपंच या फिर उप-सरंपच बनने की इच्छा लोगों के बीच रखी. भांभू की उम्र को देखते हुए ग्रामीणों ने भी उनकी इस इच्छा को पूरा करने का दायित्व ले लिया और निर्विरोध जीत हासिल करवा दी. जीत के बाद नानूराम भांभू के चेहरे की खुशी ये साफ बयां कर रही थी कि जैसे उनके इस जीवन का सपना पूरा हो गया. जीत हासिल करने के बाद जहां एक तरफ गांव में खुशी का माहौल था तो इसी बीच भांभू ने अपनी देह त्याग दी. जबकि निधन के बाद ग्रामीणों में चर्चा रही कि इसी इच्छा के लिए भांभू जिंदा थे.

शपथ लेने के बाद जताई खुशी और फिर ली अंतिम सांस

गांव के बुजुर्ग व्यक्ति होने के कारण हर कोई नानूराम भांभू की बात मानता था और उनका सम्मान भी करता था. यही वजह थी कि उनकी इस इच्छा को देखते हुए सभी ग्रामीण एकमत हो गए और जीत भी हासिल करवा दी. नानूराम ने 18 जनवरी को पद और गोपनीयता की शपथ भी ली. शपथ लेने के बाद उन्होंने हाथ जोड़कर पूरी ग्राम पंचायत का आभार जताते हुए अपनी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए सभी के सामने अपनी खुशी का इजहार किया. इस दौरान मानो ऐसा लगा कि वह अपनी इसी अंतिम इच्छा के लिए जी रहे थे क्योंकि उसके अगले दिन ही उनकी सेहत खराब हो गई और जीवन त्याग दिया. जबकि उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए.

 

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First published: January 24, 2020, 8:26 PM IST
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