कोरोना का खौफ: बीकानेर में मोक्ष के लिए इंतजार कर रही हैं 60 मृतकों की अस्थियां, परिजनों ने मुंह मोड़ा

परिजन कोई ना कोई बहाना बनाकर अस्थियां बाद में ले जाने की बात कहते हैं.
परिजन कोई ना कोई बहाना बनाकर अस्थियां बाद में ले जाने की बात कहते हैं.

कोरोना काल (Corona era) में कोरोना और अन्य कारणों से मौत के शिकार हुये करीब 60 मृतकों की अस्थियों को विसर्जन (Immersion) का इंतजार है. कोरोना के डर से परिजन उन्हें लेने नहीं आ रहे हैं और वे मोक्षधाम (Mokshadham) में रखी हैं.

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बीकानेर. हिन्दू संस्कृति (Hindu culture) में इंसान की मृत्यु के बाद उसकी अस्थियों का विसर्जन करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि हरिद्वार में अस्थियां बहाने से मृतक को मोक्ष (Salvation) की प्राप्ति होती है. लेकिन बीकानेर में कोरोना काल में कोरोना और अन्य कारणों से मौत के शिकार हुये ऐसे कई मृतकों की अस्थियां मोक्ष धाम रखी हैं जिनका अभी तक विसर्जन नहीं हो पाया है. ये अस्थियां श्मशान घाट में अपनों का इंतजार कर रही हैं. कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार तो कर दिया गया लेकिन उनकी अस्थियां अब पोटली मे पैक होकर श्मशान घाट में रखी हुई है. कोरोना के खौफ (Fear of corona) के चलते अपनों ने ही इन अस्थियों से मुंह मोड़ लिया है.

मार्च से अब तक यहां 117 लोगों की अंत्येष्टि हुई
बीकानेर स्थित परदेसियों की बगीची मुक्तिधाम में करीब 60 अस्थि कलशों को मोक्ष का इंतजार है. मार्च से अब तक यहां 117 लोगों की अंत्येष्टि हो चुकी है. लेकिन इनमें से 60 मृतकों की अस्थियों का विसर्जन अभी तक नहीं हो पाया है. मुक्तिधाम के सचिव दीपक गौड़ का कहना है कि हम कई बार मृतकों के परिजनों को अस्थियां ले जाने के लिए फोन कर चुके हैं लेकिन परिजन कोई ना कोई बहाना बनाकर बाद में अस्थियां ले जाने की बात कहते हैं.

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कोरोना के चलते लोगों में भय व्याप्त है


दीपक बताते है कि पहले लॉकडाउन के चलते आवागमन के साधन भी उपलब्ध नहीं थे. इसके कारण मृतकों के परिजन पवित्र नदियों में अस्थि विसर्जन नहीं कर पाए. लेकिन अब जिस तरह से शहर में कोरोना रोगियों की संख्या बढ़ रही है उसके चलते भी परिजन बाहर निकलने से कतरा रहे हैं. कोरोना के चलते लोगों में भय व्याप्त है.

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सीएमएचओ ने कहा वे करवायेंगे अस्थि विसर्जन
वहीं सीएमएचओ डॉ. बीएल मीणा का कहना है कि उनको मामले की जानकारी है. अगर कोई परिजन अपनों की अस्थियां नहीं ले जायेगा तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी अस्थियों को विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया जाएगा. उन्होने कहा कि वे अपने खर्चे के ऊपर इस पुण्य काम को पूरा करवायेंगे. इन अस्थि कलशों पर मौत की तारीख तो लिखी हुई है पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इनके मोक्ष की तारीख कब आएगी ? यह अभी कुछ भी कह पाना मश्किल है.
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