Lockdown में ठप हुआ मिनिएचर का कारोबार, अब भी रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे 300 चित्रकार

कोरोना की वजह से पर्यटकों की संख्या काफी कम है.
कोरोना की वजह से पर्यटकों की संख्या काफी कम है.

Corona Crisis: मिनिएचर आर्ट (Miniature art) से बीकानेर की पहचान जुड़ी है. COVID-19 की वजह से लागू Lockdown में पर्यटकों का आना कम होने से तकरीबन 300 कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट मंडरा रहा है.

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बीकानेर. कोरोना (COVID-19) के खतरे के बीच व्यापार से जुड़े लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बीकानेर की मिनिएचर आर्ट (Miniature Art) का व्यापार भी कोरोना से काफी प्रभावित हुआ है. इसके कारण कई चित्रकारों के सामने अब अपनी रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो गया. अपनी बेबसी का दुखड़ा ये चित्रकार किसी को बोल भी नहीं सकते, लेकिन ग्राहकों के इंतजार में इन चित्रकारों की आंखे अब टकटकी लगाकर देखती रहती है. देशभर में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अब तक कई कारोबार पहले की तरह शुरू नहीं हो पाए हैं. इनमें बीकानेर की मिनिएचर आर्ट का व्यापार भी शामिल है.

यह व्यापार कारोबार अपने अब तक के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है. लॉकडाउन में ठप हुआ यह कारोबार आज तक पटरी पर नहीं लौट पाया है. मिनिएचर चित्रकारी करने वाले ढाई सौ से 300 चित्रकारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. कभी इन दिनों देसी विदेशी पर्यटकों से भरे रहने वाले इनकी दुकानों में अब इक्का-दुक्का ग्राहक भी नजर नहीं आ रहे हैं.

जुड़ी है बीकानेर की पहचान



इस कला से जुड़े राजू स्वामी बताते हैं कि ऐसे हालात पहले जीवन में कभी नहीं देखे. इस कला से बीकानेर की पहचान जुड़ी हुई है, लेकिन अब कोरोना के बाद ना तो देसी पर्यटक आ रहे हैं और ना ही विदेशी पर्यटक, इस कला से जुड़े आर्टिस्टों को अब अपने परिवार के पेट पालने की चिंता सताने लगी है. बीकानेर की मिनिएचर आर्ट शैली देश विदेश में पसंद की जाती है. मिनिएचर आर्ट अपने बारीक काम के कारण इसकी मांग विदेशों में बहुत ज्यादा रहती है. बीकानेर आने वाले देसी विदेशी पर्यटक बीकानेर मिनिएचर आर्ट की पेंटिंग को अपनी यात्रा की यादगार के तौर पर इन कलाकारों से खरीदते हैं, लेकिन कोरोना के चलते ना तो देसी पर्यटक आ रहे हैं और ना ही विदेशी पर्यटक आ रहे हैं जिससे मिनिएचर पेंटिंग करने वाले पेंटर को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है. इस कला से जुड़े कलाकार अब अन्य कामों के जरिए अपना गुजर बसर कर रहे हैं. राजू स्वामी ने बताया कि सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई मदद नहीं मिल पाई है जिससे इस कला से जुड़े हुए लोगों को अपने परिवार को पालने की चिंता सताने लगी है.
चित्रकारों की हालत खराब

अपनी अनूठी कला से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले इन चित्रकारों की हालत खराब सी हो चली है. देशी के अलावा विदेशी पर्यटकों की आवाजाही नहीं होने के कारण इन पर दुखों का पहाड़ भी टूटने लग गया है. लेकिन अभी भी इन चित्रकारों को उम्मीद है कि एक बार फिर दिन बदलेंगे और एक बार फिर इनकी कला को नई पहचान मिल सकेगी. लेकिन इन चित्रकारों के सबसे ज्यादा परेशानी इनके परिवार के पेट पालने की दिख रही है. अब देखना होगा कि कब तक हालात सुधरेंगे और कब तक इन मायूस चेहरों पर खुशी की मुस्कान आएगी.
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